Pakistan Attack in Afghanistan: रविवार, 22 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर हवाई हमले किए. कार्रवाई डूरंड लाइन से सटे पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में की गई. पाकिस्तानी पक्ष का दावा है कि निशाना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकाने थे. हालांकि हमलों के सटीक स्थान और हताहतों के आधिकारिक ब्योरे को लेकर अब भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.
पक्तिका प्रांत के बरमल और उरघुन इलाकों में कई विस्फोट दर्ज किए गए. मरघा क्षेत्र में रुक-रुक कर धमाकों की आवाजें सुनी गईं. स्थानीय स्तर पर यह भी कहा गया कि बरमल जिले के बनुसी इलाके में एक धार्मिक परिसर को नुकसान पहुंचा. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों में कम से कम 28 संदिग्ध टीटीपी लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है, लेकिन इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. काबुल प्रशासन की ओर से तत्काल औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.
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Afghan media reports Pakistani airstrikes in Paktika & Nangarhar provinces, including Barmal, Urgun, Khogyani, Behsud & Ghani Khel districts.
— India First Post (@ifpost47) February 22, 2026
Claims a religious madrassa was hit and 17 Afghan civilians were killed in Ghani Khelo and Garda Samia (Behsud).
(📹 ToloNews) pic.twitter.com/rXtsaxgr2N
पूर्वी अफगानिस्तान के कई जिलों में हलचल
अफगान मीडिया चैनल TOLOnews ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि नंगरहार प्रांत के खोगयानी जिले सहित अन्य इलाकों में भी हवाई गतिविधि देखी गई. पक्तिका के बरमल और अरगुन के अलावा नंगरहार के बहसूद और घनी खेल क्षेत्रों का भी उल्लेख किया गया.
स्थानीय निवासियों के हवाले से कुछ स्थानों पर जनहानि की आशंका जताई गई है. घनी खेल और गरदा सामिया क्षेत्रों में 17 लोगों के मारे जाने की खबरें भी सामने आईं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है. सोशल मीडिया पर कथित हमलों के बाद के वीडियो प्रसारित हो रहे हैं, जिनमें क्षतिग्रस्त इमारतें और धुएं के गुबार दिखाई दे रहे हैं.
Pakistan carried out an airstrike on a mosque in Afghanistan, killing 17 members of the same family, including children.
— Elite Predators (@elitepredatorss) February 22, 2026
According to the sources, at least 17 members of a family were killed in an attack on a residential house in Gardi Kach village of Behsud district. https://t.co/rPQeki1QW1 pic.twitter.com/6vXxNm9XnM
इस्लामाबाद का बयान: ‘चयनित और खुफिया आधारित ऑपरेशन’
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गई. उनके अनुसार सात शिविरों को निशाना बनाया गया, जहां टीटीपी और उससे जुड़े समूह सक्रिय बताए गए.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह अभियान हाल में पाकिस्तान में हुए आत्मघाती हमलों के बाद चलाया गया. इस्लामाबाद ने दावा किया कि इन हमलों की साजिश अफगानिस्तान की धरती से रची गई थी.
हालिया आतंकी हमलों ने बढ़ाया दबाव
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर जिले में हुए आत्मघाती हमले में सुरक्षा चौकी को निशाना बनाया गया था. विस्फोट में कई सैनिकों और एक बच्चे की मौत हुई थी. इसके अलावा बन्नू जिले में भी सुरक्षा काफिले पर हमला हुआ, जिसमें एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी सहित दो सुरक्षाकर्मी मारे गए.
पाकिस्तानी सेना ने इन घटनाओं के बाद स्पष्ट संकेत दिया था कि वह जिम्मेदार समूहों के खिलाफ सीमा की परवाह किए बिना कार्रवाई करेगी. सैन्य मीडिया विंग के मुताबिक, खुफिया अभियान के दौरान पांच संदिग्ध आतंकियों को भी मार गिराया गया.
टीटीपी को लेकर बढ़ती कूटनीतिक खींचतान
पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि टीटीपी अफगानिस्तान में शरण लेकर गतिविधियां चला रहा है. काबुल में तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है. दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकल सका.
अक्टूबर 2025 में भी सीमा पार हमलों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा था. कतर की मध्यस्थता से संघर्षविराम की घोषणा हुई थी, लेकिन कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया.
क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार हवाई हमले अल्पकालिक सुरक्षा दृष्टिकोण से प्रभावी दिख सकते हैं, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों में नई जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं. डॉन न्यूज के हवाले से पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा है कि अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए वह आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.
वहीं क्षेत्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यदि सीमा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इसका असर व्यापार, आवागमन और स्थानीय आबादी की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है. फिलहाल दोनों देशों के बीच स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर घटनाक्रम पर टिकी है.
एएनआई के इनपुट के साथ.
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