Patna Metro : पटना मेट्रो में बहाली का सपना दिखाकर युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सिर्फ नौकरी दिलाने तक सीमित नहीं था, बल्कि सरकारी योजनाओं का भी गलत इस्तेमाल कर रहा था. हालिया कार्रवाई में आरोपियों के पास से कई आयुष्मान भारत कार्ड बरामद किए गए हैं, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है.
गिरफ्तारी के बाद खुलने लगी ठगी की परतें
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा 28 दिसंबर 2025 को हुआ, जब जक्कनपुर थाना पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार आरोपियों में सहरसा का नवनीत कुमार, सुपौल का अखिलेश कुमार और नवादा का दिनेश साव शामिल हैं. पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि ये लोग लंबे समय से संगठित तरीके से ठगी कर रहे थे.
फर्जी कंपनी और वेबसाइट के जरिए भरोसा जीतने की कोशिश
जांच में सामने आया कि गिरोह ने खुद को वैध दिखाने के लिए ‘उर्मिला एजुकेशन एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से एक कंपनी बनाई थी. इसके साथ ही एक प्रोफेशनल वेबसाइट भी तैयार की गई थी, जिस पर पटना मेट्रो में डाटा एंट्री ऑपरेटर और इलेक्ट्रिशियन जैसे पदों पर भर्ती का विज्ञापन डाला गया. वेबसाइट देखने के बाद बड़ी संख्या में युवाओं ने आवेदन किया.
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आवेदन शुल्क से लेकर नौकरी दिलाने तक की ठगी
पुलिस के अनुसार 2500 से अधिक युवाओं ने इस फर्जी भर्ती प्रक्रिया में आवेदन किया था. हर अभ्यर्थी से करीब 1200 रुपये आवेदन शुल्क के रूप में वसूले गए. इसके बाद चयन और नियुक्ति का झांसा देकर अलग-अलग चरणों में और पैसे लिए गए. शुरुआती अनुमान के मुताबिक सिर्फ आवेदन शुल्क से ही लाखों रुपये जुटाए गए, जबकि कुल ठगी की रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती है.
आयुष्मान भारत योजना के नाम पर दूसरा फर्जीवाड़ा
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को आरोपियों के पास से 19 आयुष्मान भारत कार्ड मिले. शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि गिरोह गांव और कस्बों के लोगों को मुफ्त इलाज का लालच देकर आयुष्मान कार्ड बनवाता था. इसके बाद निजी अस्पतालों से कथित सांठगांठ कर कार्डधारकों के नाम पर इलाज दिखाया जाता था और सरकारी राशि का गलत इस्तेमाल किया जाता था.
निजी अस्पतालों की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस को आशंका है कि इस फर्जीवाड़े में कुछ निजी अस्पतालों की भी भूमिका हो सकती है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड के जरिए फर्जी इलाज दिखाया गया और कितनी सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ.
सरगना की तलाश, रिमांड की तैयारी
इस गिरोह का एक मुख्य सरगना अखिलेश यादव बताया जा रहा है, जिसे जक्कनपुर थाना पुलिस पहले गिरफ्तार नहीं कर पाई थी. बाद में जानकारी मिली कि उसे दानापुर पुलिस ने शराब से जुड़े एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. अब जक्कनपुर थाना पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है और इसके लिए कोर्ट में आवेदन दिया जाएगा.
दो साल से सक्रिय, करोड़ों की ठगी का शक
पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह गिरोह करीब दो वर्षों से सक्रिय था और इस दौरान करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने की आशंका है. आरोपियों के पास से लगभग 20 अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड भी बरामद किए गए हैं. इनके जरिए पुलिस ठगी की पूरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है. पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
सरकारी योजनाओं के नाम पर भरोसे से खिलवाड़
पटना मेट्रो की नौकरी और आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी सरकारी योजनाओं के नाम पर किया गया यह फर्जीवाड़ा न सिर्फ आर्थिक अपराध है, बल्कि आम लोगों के भरोसे के साथ किया गया गंभीर धोखा भी है. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए हर स्तर पर जांच कर रही है.
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