Kolkata News : बस दो मिनट की जल्दबाज़ी कभी-कभी सबसे महंगी साबित हो जाती है. प्लेटफार्म के ठीक सामने से पटरियों को पार करना, फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) या अंडरपास को नजरअंदाज करना यात्रियों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है. फुट ओवर ब्रिज तक पहुँचने में देर लगने का डर, भीड़-भाड़ और अधीरता – ये तीनों कारण रेलवे ट्रेसपासिंग की घटनाओं को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं. पूर्व रेलवे लगातार इस सुरक्षा उल्लंघन से जूझ रहा है, लेकिन भीड़ और जल्दबाज़ी पटरियों को दुर्घटनाओं के गलियारे में बदलते जा रहे हैं.
अधीरता के भयावह परिणाम
वर्तमान वित्तीय वर्ष के आंकड़े इस खतरे की गंभीरता दर्शाते हैं. अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक, पूर्व रेलवे क्षेत्र में पटरियों पर अवैध प्रवेश (ट्रेसपासिंग) के कारण कुल 1,886 मौतें और 319 घायल हुए. यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह उन परिवारों की कहानियां हैं जिनका जीवन केवल कुछ मिनटों की लापरवाही की वजह से बदल गया.
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रेलवे अधिकारियों का कहना है कि प्लेटफार्म के पास शॉर्टकट लेने की प्रवृत्ति तेज़ और लोकल ट्रेनों की रफ़्तार के कारण बहुत खतरनाक है. यात्रियों को अक्सर लगता है कि “बस दो मिनट” का समय बचाना ज़रूरी है, लेकिन यही दो मिनट कभी-कभी हमेशा के लिए जीवन को रोक देते हैं.
रेलवे ने उठाए सुरक्षा उपाय
‘शून्य दुर्घटना’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए पूर्व रेलवे ने कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं:
- भौतिक अवसंरचना: भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर मजबूत फुट ओवर ब्रिज, अंडरपास और सबवे बनाए गए हैं. यात्रियों को प्लेटफार्म पार करने में सुविधा और सुरक्षा प्रदान करने के लिए रणनीतिक रूप से जगह-जगह क्रॉसिंग पॉइंट तैयार किए गए हैं.
- जागरूकता अभियान: स्टेशनों पर प्रतिदिन जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं. पोस्टर, डिजिटल स्क्रीन और सार्वजनिक घोषणाओं के जरिए यात्रियों को पटरियों पर न चलने की सलाह दी जाती है.
- भौतिक अवरोध और मार्गदर्शन: पटरियों के किनारे फेंसिंग और बाउंड्री वॉल को मजबूत किया गया है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित क्रॉसिंग पॉइंट पर मार्गदर्शन किया जा सके.
- तकनीकी निगरानी: सीसीटीवी कैमरे, प्लेटफार्म अलार्म और पैट्रोलिंग स्टाफ के माध्यम से अवैध प्रवेश की लगातार निगरानी की जाती है.
कानूनी कार्रवाई और जुर्माना
रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 147 के तहत बिना अनुमति रेलवे परिसर में प्रवेश करना आपराधिक अपराध माना जाता है. इसके तहत दोषी व्यक्ति को छह महीने तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. वर्ष 2025-26 (फरवरी तक) के दौरान, इस धारा के तहत 5,557 व्यक्तियों पर मुकदमा चलाया गया. रेलवे अधिकारी अचानक जांच और मुकदमों में वृद्धि कर सुरक्षा उल्लंघन रोकने की दिशा में कदम उठा रहे हैं.
यात्रियों के लिए गंभीर चेतावनी
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा, “हम फुट ओवर ब्रिज और अंडरपास इसलिए बनाते हैं ताकि आप सुरक्षित घर पहुँच सकें. दो मिनट की जल्दी कभी भी जीवन से अधिक कीमती नहीं होती. कोई भी शॉर्टकट आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है. कृपया निर्धारित क्रॉसिंग पॉइंट और सबवे का ही उपयोग करें. याद रखें, आपका परिवार आपको प्लेटफार्म पर नहीं, घर पर देखना चाहता है.”
जीवन से अधिक कीमती नहीं कोई मिनट
रेलवे पटरियां देश के परिवहन की जीवनरेखा हैं. पैदल चलने वालों के लिए ये टहलने की जगह नहीं हैं. सिर्फ कुछ मिनट बचाने के चक्कर में जीवन गंवाना किसी भी कीमत पर उचित नहीं है. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा, अवसंरचना और कानूनी उपायों के बावजूद, सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय स्वयं यात्रियों की समझदारी और धैर्य है.
पूर्व रेलवे का संदेश स्पष्ट है: पटरियों को पार करने की जल्दबाज़ी से बचें, सुरक्षित क्रॉसिंग का इस्तेमाल करें और अपने और अपने परिवार के जीवन को अनमोल बनाएं.
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