Share Market: सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर रही. सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट दिखी और प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए. मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा.
सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार दबाव
कारोबार की शुरुआत में NIFTY 50 करीब 519 अंकों की गिरावट के साथ 24,659 के आसपास खुला, जो लगभग 2% की कमजोरी दर्शाता है. वहीं BSE Sensex 2,775 अंक टूटकर 78,512 के स्तर पर आ गया. शुरुआती घंटों में ही बिकवाली का दबाव साफ दिखा, जिससे बाजार का मूड नकारात्मक बना रहा.
विश्लेषकों के मुताबिक, निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं.
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क्यों बढ़ी घबराहट?
मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव वैश्विक सप्लाई चेन और कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर डाल सकता है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.
संभावित जोखिम:
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
- खाड़ी देशों के साथ भारत के व्यापार पर असर
- क्षेत्र में कार्यरत लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता
अगर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत आगे बढ़ती है और तेल आपूर्ति सामान्य रहती है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है.
टेक्निकल संकेत दे रहे हैं क्या संदेश?
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, सूचकांक 200-डे एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (200-EMA) के नीचे फिसल गया है. यह स्तर लंबी अवधि के ट्रेंड का अहम संकेतक माना जाता है. यदि बाजार लगातार इस स्तर के नीचे बंद होता है, तो कमजोरी और गहरी हो सकती है. हालांकि, मौजूदा गिरावट के बाद शॉर्ट कवरिंग या वैल्यू बाइंग से तेज रिकवरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
सभी सेक्टरों में बिकवाली
बड़े और मझोले शेयरों में व्यापक गिरावट देखी गई.
- निफ्टी 100: 2% से अधिक नीचे
- निफ्टी मिडकैप 100: 3.43% की गिरावट
- निफ्टी स्मॉलकैप 100: 3.78% की कमजोरी
ऑटो, FMCG और IT सेक्टरों में खासा दबाव रहा. लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखे, जिससे बाजार में व्यापक कमजोरी का संकेत मिला.
सोना-चांदी चमके
शेयर बाजार की गिरावट के बीच निवेशकों ने सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख किया. 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 3% बढ़कर ₹1,67,329 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई. चांदी भी करीब 3.89% उछलकर ₹2,85,700 प्रति किलोग्राम पर दर्ज की गई.
वैश्विक बाजारों में भी दबाव
एशियाई बाजारों में कमजोरी रही. जापान, सिंगापुर और हांगकांग के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में रहे. वहीं अमेरिका में भी दबाव देखने को मिला. S&P 500 और Nasdaq Composite में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे साफ है कि यह दबाव केवल घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक है.
आगे क्या देखें निवेशक?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी. निवेशकों को फिलहाल सतर्क रुख अपनाने, पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने और घबराहट में निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जा रही है.
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