Somnath Temple : सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सोमनाथ केवल पत्थरों से बना मंदिर नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा, उसकी चेतना और उसके स्वाभिमान का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि इस पर्व के दौरान एक हजार विद्यार्थियों ने लगातार 72 घंटे तक ‘ओंकार’ मंत्र का उच्चारण किया, जो भारत की जीवित परंपराओं और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि लगभग एक सहस्राब्दी पूर्व सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अनगिनत लोगों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. आक्रमणकारियों ने यह मान लिया था कि मंदिर को नष्ट कर वे भारत की आस्था को समाप्त कर देंगे, लेकिन इतिहास ने यह सिद्ध कर दिया कि सोमनाथ न कभी झुका और न ही समाप्त हुआ. आज भी यहां लहराता ध्वज उसी अमर विश्वास का प्रमाण है.
VIDEO | Somnath: Addressing a gathering at the Somnath Swabhiman Parv celebrations, PM Modi (@narendramodi) says, "When Ghazni to Aurangzeb attacked Somnath, they thought their sword was defeating Sanatan Somnath. Those religious extremists forget that Somnath itself has 'Amrit'… pic.twitter.com/CCrTJkAVV8
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सोमनाथ की गाथा में पराजय नहीं, पुनर्जागरण है
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सोमनाथ की कथा दरअसल भारत की ही कथा है. जिस प्रकार इस मंदिर को बार-बार तोड़ने का प्रयास किया गया, उसी तरह देश की सभ्यता और संस्कृति को मिटाने की कोशिशें भी होती रहीं. लेकिन हर दौर में भारत ने स्वयं को फिर से खड़ा किया. उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश की नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण और विजय की परंपरा को दर्शाता है.
VIDEO | Gujarat: Prime Minister Narendra Modi (@narendramodi) performs aarti at Shree Somnath Mandirs.#SomnathSwabhimanParv
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(Source – Third party)
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शिव का स्वरूप अमरता का प्रतीक : प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा कि गजनी से लेकर औरंगजेब तक, जब-जब सोमनाथ पर आक्रमण हुए, तब आक्रांताओं को लगा कि उनकी शक्ति सनातन आस्था को परास्त कर देगी. लेकिन वे यह समझने में असफल रहे कि सोमनाथ नाम में ही अमरत्व की भावना समाहित है. यहां विराजमान महादेव ‘मृत्युंजय’ हैं, जो मृत्यु पर विजय का प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि शिव को हम हर जगह अनुभव करते हैं, हर जीव में देखते हैं, और ऐसी आस्था को कोई भी ताकत डिगा नहीं सकती.
VIDEO | Prime Minister Narendra Modi’s (@narendramodi) ‘Shaurya Yatra’ is underway in Somnath as part of the Somnath Swabhiman Parv (Jan 8–11), with devotional chants, traditional rituals, and a spiritually charged procession honouring the sacred legacy of Shree Somnath Mandir.… pic.twitter.com/RdnxSbACKX
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ठंड में भी उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
भीषण ठंड के बावजूद सोमनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की ऐतिहासिक भीड़ उमड़ी. पूरे परिसर को भव्य सजावट से सजाया गया था. आतिशबाजी और तीन हजार ड्रोन से सजे भव्य ड्रोन शो ने लोगों को भावविभोर कर दिया. शनिवार की शाम प्रधानमंत्री ने ‘ओंकार’ मंत्रोच्चार में सहभागिता की, मंदिर दर्शन किए और ड्रोन शो का अवलोकन किया. अगले दिन उन्होंने मंदिर में आरती कर पूजा-अर्चना की.
शौर्य यात्रा में वीरों को किया गया नमन
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व किया. यह यात्रा उन वीर योद्धाओं की स्मृति में आयोजित की गई, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया. गिर सोमनाथ जिले में निकली इस शोभायात्रा में 108 अश्वों की भव्य झांकी शामिल रही, जो वीरता, साहस और बलिदान की भावना को दर्शा रही थी.
विशेष वाहन से प्रधानमंत्री ने किया जनसंवाद
यात्रा मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक मौजूद थे. प्रधानमंत्री ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ विशेष रूप से तैयार किए गए वाहन पर सवार होकर लगभग एक किलोमीटर तक लोगों का अभिवादन किया. इस दौरान माहौल उत्साह और गौरव से भरा नजर आया.
बलिदान की स्मृति, भविष्य की प्रेरणा
इसके बाद प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लिया. यह पर्व उन असंख्य लोगों की याद में मनाया जा रहा है जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण अर्पित किए. इतिहास के अनुसार, 1026 ईस्वी में महमूद गजनी के आक्रमण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और रक्षकों ने बलिदान दिया था.
पीआईबी के अनुसार, सदियों तक बार-बार नष्ट करने के प्रयासों के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज भी आस्था, साहस और राष्ट्रीय गौरव का सशक्त प्रतीक बना हुआ है. इसे उसकी प्राचीन गरिमा में पुनः स्थापित करने के पीछे सामूहिक संकल्प, सामाजिक सहभागिता और निरंतर प्रयासों की अहम भूमिका रही है. यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती रहेगी.
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