Bengal News: कोलकाता के एक निजी अस्पताल में हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में अहम उपलब्धि दर्ज की गई है. 62 वर्षीय महिला, जिनकी शारीरिक संरचना अत्यंत दुर्लभ मानी जा रही है, में सफलतापूर्वक स्थायी पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया. चिकित्सकों के अनुसार, इस तरह की जटिल स्थिति में यह देश का पहला और वैश्विक स्तर पर दूसरा मामला है.
‘कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक’ के साथ दुर्लभ वाल्व संरचना
शहर के मुकुंदपुर स्थित Manipal Hospitals में भर्ती महिला कृत्रिम बाईकैवल वाल्व प्रणाली से जुड़ी असामान्य शारीरिक स्थिति से पीड़ित थीं. इस जटिल संरचना के कारण उनके हृदय की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही थी.
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अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और कैथ लैब निदेशक Soumya Patra ने बताया कि मरीज ‘कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक’ से ग्रसित थीं, जिसमें हृदय की विद्युत गतिविधि बाधित हो जाती है और धड़कनों की गति असामान्य रूप से धीमी हो सकती है. ऐसी स्थिति में स्थायी पेसमेकर जीवनरक्षक साबित होता है.
डॉ. पात्रा ने यह सर्जरी कार्डियक सर्जन Subhashish Deb और विशेषज्ञ टीम के सहयोग से संपन्न की. उनका कहना है कि कृत्रिम बाईकैवल वाल्व सिस्टम हृदय की मूल संरचना को बदल देता है, जिससे पारंपरिक तकनीकों से पेसमेकर लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
पहले भी हो चुकी थी जटिल सर्जरी
दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर की रहने वाली श्यामली बिश्वास को लंबे समय से हृदय संबंधी समस्याएं थीं. वर्ष 2023 में उनके प्राकृतिक ट्राइकसपिड वाल्व के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने पर वेल्लोर में वाल्व प्रतिस्थापन सर्जरी की गई थी.
हाल ही में उनकी स्थिति बिगड़ने पर 2 फरवरी को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. जांच में कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक की पुष्टि होने के बाद विशेषज्ञों ने तुरंत स्थायी पेसमेकर लगाने का निर्णय लिया. जटिल शारीरिक संरचना के कारण यह प्रक्रिया अत्यंत सावधानी और विशेष तकनीकी रणनीति के साथ पूरी की गई.
परिवार ने जताया भरोसा, डॉक्टरों ने बताया मील का पत्थर
मरीज की बेटी नबामिता ने बताया कि परिवार पहले से ही उनकी मां की सेहत को लेकर चिंतित था, क्योंकि वे एक बड़ी सर्जरी से गुजर चुकी थीं. वर्तमान में मरीज विशेष चिकित्सा निगरानी में हैं और चिकित्सकों को उम्मीद है कि वह धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटेंगी.
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह उपलब्धि न केवल संस्थान बल्कि देश के कार्डियक विज्ञान के लिए भी महत्वपूर्ण है. विशेषज्ञों के अनुसार, दुर्लभ संरचनात्मक जटिलताओं के बावजूद सफल पेसमेकर प्रत्यारोपण भविष्य में ऐसे मामलों के उपचार का मार्ग प्रशस्त करेगा.
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