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बिहार में बिजली खपत ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, गर्मी के साथ गैस संकट ने बढ़ाया दबाव

Patna News: बिहार में मार्च में ही बढ़ती गर्मी ने बिजली की मांग बढ़ा दी है. पटना समेत कई शहरों में रिकॉर्ड खपत दर्ज की जा रही है. गैस संकट और इलेक्ट्रिक उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल इसकी बड़ी वजह बना है.

Patna News: बिहार में मार्च महीने के दौरान ही बढ़ती गर्मी ने लोगों की दिनचर्या बदलनी शुरू कर दी है. तापमान में तेजी से इजाफा होने के कारण घरों में पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बढ़ गया है, जिससे बिजली की मांग अचानक बढ़ गई है. आंकड़ों के अनुसार, जहां पिछले साल मार्च के अंत तक बिजली खपत करीब 500 मेगावाट के आसपास रहती थी, वहीं इस बार यह स्तर समय से पहले ही पार हो चुका है. बिजली कंपनियां इस बढ़ती मांग को लेकर सतर्क हो गई हैं और उपभोक्ताओं से भी संयम बरतने की अपील कर रही हैं ताकि सप्लाई सिस्टम पर दबाव न बढ़े.

गैस संकट ने बढ़ाया बिजली पर दबाव

बिजली खपत में तेजी के पीछे सिर्फ मौसम ही जिम्मेदार नहीं है. एलपीजी गैस की अनियमित उपलब्धता भी इसका बड़ा कारण बनकर सामने आई है. सिलेंडर की किल्लत और कीमतों में बढ़ोतरी के चलते कई घरों में अब खाना बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हों और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग बढ़ गया है.

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इस बदलाव ने घरेलू बिजली खपत में अतिरिक्त दबाव डाल दिया है. पहले जहां गैस से चलने वाले किचन अब इलेक्ट्रिक उपकरणों पर निर्भर हो रहे हैं, वहां बिजली की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले दिनों में खपत और अधिक बढ़ सकती है.

पटना बना सबसे बड़ा उपभोक्ता

राज्य में कुल बिजली खपत की बात करें तो यह आंकड़ा फिलहाल करीब 4900 मेगावाट तक पहुंच गया है. इसमें राजधानी पटना की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है, जहां 600 से 650 मेगावाट तक की खपत दर्ज की जा रही है.

अन्य शहरों की बात करें तो मुजफ्फरपुर में करीब 210 मेगावाट, गया में 243 मेगावाट और पूर्णिया में लगभग 128 मेगावाट की औसत खपत हो रही है. इन आंकड़ों से साफ है कि शहरी इलाकों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे सप्लाई सिस्टम पर दबाव महसूस किया जा रहा है.

इलेक्ट्रिक उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल

गर्मी के साथ-साथ शहरों में इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा है. मार्च के दूसरे पखवाड़े से ही पंखे, कूलर और एसी लगातार चल रहे हैं. इसके अलावा इंडक्शन चूल्हे और इलेक्ट्रिक ओवन का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसने बिजली की खपत को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है.

बिजली विभाग के अनुमान के अनुसार, पिछले साल जहां अधिकतम खपत 883 मेगावाट तक पहुंची थी, इस बार यह आंकड़ा 1000 मेगावाट को भी पार कर सकता है. इस संभावना को देखते हुए विभाग ने पहले से तैयारी तेज कर दी है.

31 मार्च तक मेंटेनेंस पूरा करने का निर्देश

ऊर्जा विभाग ने बढ़ती मांग को देखते हुए अधिकारियों को अलर्ट कर दिया है. ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने निर्देश दिया है कि 31 मार्च तक सभी मेंटेनेंस कार्य हर हाल में पूरा कर लिए जाएं. पटना सहित सभी जिलों के इंजीनियरों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बिजली आपूर्ति में किसी तरह की बाधा न आए.

ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और वोल्टेज प्रोफाइल को बेहतर करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पेसू की टीम ट्रांसमिशन लाइनों और ट्रांसफार्मरों की लगातार जांच कर रही है, ताकि गर्मी के चरम के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो और लोगों को राहत मिल सके.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
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