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Aam Aadmi Party: राष्ट्रीय राजनीति में शुक्रवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी से अलग होने का फैसला किया और भारतीय जनता पार्टी(BJP) में शामिल हो गए. इस घटनाक्रम ने न सिर्फ संसद में पार्टी की ताकत को प्रभावित किया, बल्कि संगठन के भीतर चल रही खींचतान को भी खुलकर सामने ला दिया.
पार्टी छोड़ने वालों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी के नाम प्रमुख हैं. एक साथ इतने सांसदों के जाने से पार्टी की संसदीय उपस्थिति में अचानक कमी आई है और इसे अब तक का सबसे बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है.
#WATCH | Delhi: Rajya Sabha MPs Raghav Chadha, Sandeep Pathak and Ashok Mittal meet BJP National President Nitin Nabin at the party headquarters
— ANI (@ANI) April 24, 2026
2/3rd MPs of AAP in the Rajya Sabha announced merging with the BJP. pic.twitter.com/LGhJ0bHyJ1
राज्यसभा में घटा आंकड़ा, दो-तिहाई समूह के अलग होने का दावा
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान राघव चड्ढा(Raghav Chadha) ने मीडिया के सामने कहा कि यह फैसला व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामूहिक है. उनके साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद रहे. उन्होंने बताया कि राज्यसभा में पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने एक साथ अलग होने का निर्णय लिया है और अब वे एक समूह के रूप में नई राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इस कदम के बाद संसद में पार्टी की संख्या घटकर सीमित रह गई है, जिसमें अब लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर कुल छह सदस्य ही बचे हैं.
अलग-अलग पृष्ठभूमि, एक जैसा फैसला
पार्टी छोड़ने वाले सभी नेताओं की पृष्ठभूमि अलग-अलग रही है, लेकिन इस बार उनका निर्णय एक जैसा रहा. स्वाति मालीवाल, जो हाल के वर्षों में पार्टी नेतृत्व को लेकर मुखर रही थीं, पहले ही अपने बयान से असहमति जता चुकी थीं. वहीं संदीप पाठक ने शिक्षा और संगठन दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी जैसे नाम भी अलग-अलग समय पर पार्टी से जुड़े, लेकिन अंततः सभी ने एक साथ अलग होने का रास्ता चुना.
दिल्ली चुनाव 2025 के बाद बढ़ती गई असहमति
फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पार्टी के भीतर असंतोष को और बढ़ा दिया था. चुनाव में हार के बाद संगठन के फैसलों, नेतृत्व की रणनीति और राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल उठने लगे थे. लगातार सामने आ रही इन चर्चाओं ने धीरे-धीरे एक बड़े संकट का रूप ले लिया. अब वही असंतोष खुलकर सामने आया है, जिसने पार्टी की एकजुटता पर असर डाला है.
BJP में शामिल होने से बदला राजनीतिक संदेश
घोषणा के कुछ ही समय बाद राघव चड्ढा(Raghav Chadha) ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह कदम पहले से तय रणनीति का हिस्सा था. उनके साथ अन्य नेताओं का भी उसी दिशा में जाना इस पूरे घटनाक्रम को और अहम बनाता है. इससे राजधानी की राजनीति में नई स्थिति बनी है और आने वाले समय में इसके दूरगामी असर की संभावना जताई जा रही है.
कांग्रेस ने साधा निशाना, उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई. पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने तीखी टिप्पणी करते हुए आम आदमी पार्टी(AAP) और भाजपा(BJP) के बीच अंतर पर सवाल उठाए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब यह देखना बाकी है कि अरविंद केजरीवाल आगे क्या रुख अपनाते हैं. इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है.
स्थापना के बाद सबसे बड़ा संकट
करीब 14 साल पहले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उभरी आम आदमी पार्टी के लिए यह घटनाक्रम एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. राज्यसभा के अधिकांश सदस्यों के एक साथ जाने से पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व क्षमता दोनों पर सवाल खड़े हुए हैं. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब पार्टी आने वाले चुनावों में अपनी रणनीति को मजबूत करने में लगी हुई थी. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस संकट के बाद पार्टी खुद को किस तरह पुनर्गठित करती है.
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