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पूर्व रेलवे ने समपार फाटक हटाकर बढ़ाई सुरक्षा, पुलों को मिला नया जीवन

Eastern Railway News : पूर्व रेलवे ने फरवरी 2026 में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार किए हैं. समपार फाटक हटाए गए और ट्रैक आधुनिकीकरण को तेज किया गया. इससे सुरक्षा और संचालन दोनों में सुधार हुआ.

Eastern Railway News : पूर्व रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने फरवरी 2026 के दौरान बुनियादी ढांचे के विकास, सुरक्षा सुधार और ट्रैक रखरखाव के आधुनिकीकरण को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया है. इन प्रयासों का सीधा असर रेलवे नेटवर्क की मजबूती, ट्रेनों की समयबद्ध आवाजाही और यात्रियों की सुरक्षा पर देखने को मिल रहा है. विभाग द्वारा किए गए कार्य यह दर्शाते हैं कि आधुनिक तकनीक और योजनाबद्ध रणनीति के जरिए रेलवे संचालन को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में लगातार प्रगति हो रही है. खासतौर पर लेवल क्रॉसिंग समाप्त करने, पुलों को मजबूत करने और ट्रैक की निगरानी बढ़ाने जैसे कदमों ने नेटवर्क की समग्र कार्यक्षमता को नई दिशा दी है.

11 मानवयुक्त समपार फाटकों को समाप्त किया

जन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने 11 मानवयुक्त समपार फाटकों को समाप्त किया. इनकी जगह सीमित ऊँचाई वाले सबवे और वैकल्पिक मार्ग विकसित किए गए हैं, जिससे सड़क और रेल यातायात के बीच संभावित टकराव के खतरे को काफी हद तक खत्म कर दिया गया है. यह कदम न केवल दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक होगा, बल्कि ट्रेनों की गति और समयपालन में भी सुधार लाएगा.

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इसके साथ ही, रेलवे नेटवर्क की संरचनात्मक मजबूती को ध्यान में रखते हुए 13 पुलों का पुनर्निर्माण किया गया. यह कार्य पुलों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. वहीं 9 पुलों का रीग्रेडिंग किया गया, जिससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु और सुरक्षित हो सके. इसके अलावा, 9 महत्वपूर्ण स्थानों पर नए साइड पाथवे बनाए गए हैं, जो ग्राउंड स्टाफ के लिए सुरक्षित मूवमेंट और बेहतर निगरानी की सुविधा प्रदान करेंगे.

सियालदह मंडल में तकनीकी सुधार से परिचालन दक्षता में इजाफा

सियालदह मंडल में ट्रैक संरचना से जुड़े जटिल बिंदुओं को सुधारने के लिए 7 फोर्स्ड लेआउट को ठीक किया गया. यह कार्य तकनीकी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे रोलिंग स्टॉक पर पड़ने वाले अनावश्यक दबाव और घिसाव को कम किया जा सकता है. इसके साथ ही, ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सहज और बाधारहित बनाने में भी यह सुधार कारगर साबित होगा.

विशेषज्ञों के अनुसार, फोर्स्ड लेआउट में सुधार करने से ट्रैक की लाइफ बढ़ती है और मेंटेनेंस की जरूरत भी कम होती है. इससे लंबे समय में रेलवे को आर्थिक और परिचालन दोनों स्तर पर लाभ मिलता है.

ट्रैक रखरखाव में आधुनिक तकनीक का उपयोग

इंजीनियरिंग विभाग ने ट्रैक नवीनीकरण और उसकी निगरानी को भी प्राथमिकता दी है. फरवरी के दौरान 41.75 समतुल्य थ्रू टर्नआउट रिन्यूअल (TTR) किए गए, जिनमें पुराने और जर्जर हिस्सों को हटाकर आधुनिक उपकरण लगाए गए. इससे ट्रैक की गुणवत्ता में सुधार हुआ और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम हुई.

निवारक सुरक्षा उपायों के तहत 1,320 किलोमीटर रेल पटरियों का अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (USFD) परीक्षण किया गया. इस तकनीक के जरिए पटरियों के भीतर मौजूद सूक्ष्म दरारों का समय रहते पता लगाया जा सकता है, जिससे बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सके. यह आधुनिक तकनीक रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है.

इसके अलावा, 1,06,270 घन मीटर बैलेस्ट बिछाया गया, जो ट्रैक की स्थिरता बनाए रखने और पानी की निकासी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है. बेहतर बैलेस्ट प्रबंधन से ट्रैक की मजबूती बढ़ती है और भारी ट्रैफिक के दौरान भी संचालन प्रभावित नहीं होता.

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी / पूर्व रेलवे, शिबराम माझि ने कहा कि ये उपलब्धियां रेलवे की सुरक्षा और आधुनिकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं. उन्होंने बताया कि लेवल क्रॉसिंग को समाप्त करने और अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग से यात्रियों को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा प्रदान की जा रही है.

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सोनी कुमारी
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