NIA Investigation: मालदा के कालियाचक में न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई घटना अब राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसी तक पहुंच गई है. सात जजों को बंधक बनाये जाने के मामले में चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) से जांच कराने की पहल की है. इस संबंध में आयोग की ओर से NIA के डायरेक्टर जनरल को पत्र भेजा गया है. इसके साथ ही पत्र की प्रति पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और राज्य के मुख्य सचिव को भी भेजी गई है. यह पूरा घटनाक्रम उस समय और गंभीर हो गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अपने संज्ञान में लेते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच की जरूरत जतायी.
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद बढ़ी हलचल
चुनाव आयोग की ओर से भेजे गये पत्र में कहा गया है कि बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान तैनात न्यायिक अधिकारियों के घेराव के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान में लिया है. अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच NIA या CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की बात कही थी. इसी के बाद आयोग ने NIA से इस मामले में जांच करने और अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपने का आग्रह किया है.
मालदा की घटना को कोर्ट ने माना गंभीर
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मालदा की घटना पर कड़ा रुख अपनाया था. अदालत ने इसे ‘अक्षम्य अपराध’ और ‘लोकतंत्र के लिए सीधी चुनौती’ करार दिया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों को निशाना बनाना और उन्हें डराने की कोशिश न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की सुनियोजित कार्रवाई थी.
आयोग ने तुरंत उठाया कदम
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के कुछ ही घंटों बाद भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने NIA के महानिदेशक को आधिकारिक पत्र भेज दिया. आयोग ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच कर रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 10 बड़ी बातें
- NIA जांच का आदेश : सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि घटना की जांच CBI या NIA जैसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए. NIA अब इसकी जांच करेगी.
- सुनियोजित साजिश : कोर्ट ने माना कि यह कोई सामान्य विरोध नहीं था, बल्कि जजों को डराने और चुनावी प्रक्रिया (SIR) में बाधा डालने की सोची-समझी कार्रवाई थी.
- प्रशासनिक विफलता : मालदा के डीएम, एसपी, राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव के रवैये को कोर्ट ने अत्यंत निंदनीय बताया.
- रेस्क्यू के बाद भी हमला : कोर्ट ने नोट किया कि आधी रात को जजों को छुड़ाकर ले जाने के दौरान भी उनकी गाड़ियों पर पत्थर, बांस और ईंटों से हमला किया गया.
- बिना दाना-पानी के बंधक : जजों को करीब 9 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया. उन्हें भोजन-पानी तक नहीं दिया गया.
- आपराधिक अवमानना : कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के काम में बाधा डालना आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है.
- जजों को सुरक्षा कवच : कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि जहां भी जज ड्यूटी पर हैं, वहां तत्काल केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए.
- 5 लोगों से ज्यादा की एंट्री बैन : सुनवाई केंद्रों पर एक समय में 5 से अधिक लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है.
- मुख्य सचिव को नोटिस : कोर्ट ने मुख्य सचिव, डीजीपी और मालदा के डीएम-एसपी को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए.
- 6 अप्रैल को अगली सुनवाई : सभी संबंधित अधिकारियों को 6 अप्रैल को वर्चुअली कोर्ट के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया है.
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