Bihar News : बिहार के भागलपुर में प्रस्तावित अंतरराज्यीय बस अड्डा के निर्माण की दिशा में जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है. अगरपुर मौजा में स्थित 10.58 एकड़ भूमि को इस परियोजना के लिए चिह्नित किया गया है. जिला भू-अर्जन कार्यालय की ओर से प्रारंभिक अधिसूचना जारी करते हुए कुल 21 रैयतों को भूमि से संबंधित पक्षकार के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. चयनित भूखंड वर्तमान में खेती योग्य है और इसे उपजाऊ कृषि भूमि की श्रेणी में रखा गया है.
सामाजिक प्रभाव आकलन में नहीं दिखा प्रतिकूल असर
भूमि अधिग्रहण से पहले राज्य स्तरीय सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन इकाई द्वारा विस्तृत अध्ययन कराया गया. मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित बस अड्डा परियोजना से स्थानीय स्तर पर किसी भी सार्वजनिक संसाधन को नुकसान नहीं पहुंचेगा. अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि आसपास मौजूद शिक्षण संस्थान, धार्मिक स्थल, श्मशान, कब्रगाह, चारागाह, खेल मैदान और अन्य सामुदायिक सुविधाएं परियोजना से अप्रभावित रहेंगी.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भूमि अर्जन के कारण किसी प्रकार का विस्थापन नहीं होगा, क्योंकि चयनित क्षेत्र में आवासीय संरचनाएं मौजूद नहीं हैं. इस कारण पुनर्वास से जुड़ी कोई समस्या सामने आने की संभावना नहीं जताई गई है.
भूमि अर्जन से 21 रैयत होंगे प्रभावित
सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन के दौरान यह सामने आया है कि प्रस्तावित भूमि अर्जन से कुल 21 रैयत सीधे तौर पर प्रभावित होंगे. रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह भूमि राज्य या केंद्र सरकार की किसी आरक्षित या पूर्व आवंटित श्रेणी में शामिल नहीं है. वर्तमान में इस जमीन का उपयोग कृषि कार्य के लिए किया जा रहा है, जो संबंधित रैयतों की आय का प्रमुख स्रोत है.
जनसुनवाई और सर्वेक्षण की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी राय रखी. उपस्थित जन समुदाय ने अध्ययन रिपोर्ट पर सहमति जताते हुए यह अपेक्षा रखी कि प्रभावित रैयतों को नियमानुसार मुआवजा और समाधान उपलब्ध कराया जाएगा.
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कृषि व राजस्व अधिकारियों की समिति ने की स्थल जांच
कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की गठित समिति ने प्रस्तावित स्थल का भौतिक निरीक्षण कर अपनी संयुक्त जांच रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्जन के लिए चयनित भूमि पूरी तरह सिंचित है और इसकी उर्वरता अच्छी मानी जाती है. समिति के अनुसार परियोजना की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए केवल न्यूनतम आवश्यक क्षेत्र का ही चयन किया गया है.
जांच के दौरान अन्य संभावित स्थलों पर भी विचार किया गया, लेकिन वे तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टि से उपयुक्त नहीं पाए गए. समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि आसपास समान क्षेत्रफल की बंजर या अनुपयोगी भूमि उपलब्ध नहीं है. अधिकारियों का मानना है कि इस भूमि के अधिग्रहण से लोकहित की पूर्ति होगी और भागलपुर में अंतरराज्यीय बस अड्डा निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा.
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