इस खबर में क्या है?
ED Arrests I-PAC Director: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक बड़ी कार्रवाई सामने आयी है. सोमवार देर रात केंद्रीय एजेंसी ने राजनीतिक रणनीति तैयार करने वाली संस्था I-PAC से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी विनेश चंदेल को हिरासत में लेकर बाद में गिरफ्तार कर लिया. यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गयी है. इस घटनाक्रम के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गयी है, क्योंकि संबंधित संस्था तृणमूल कांग्रेस के चुनावी अभियान में सक्रिय बतायी जा रही है.
पूछताछ के बाद देर रात कार्रवाई, अदालत में होगी पेशी
जांच एजेंसी के मुताबिक, विनेश चंदेल से सोमवार को दिल्ली में कई घंटे तक पूछताछ की गयी. इसके बाद उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया. अब उन्हें विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां एजेंसी आगे की पूछताछ के लिए रिमांड मांग सकती है.
अवैध खनन से जुड़ी रकम के ट्रांसफर की जांच
ईडी की जांच में यह पहलू सामने आया है कि अवैध कोयला खनन से जुड़े नेटवर्क की कमाई का कुछ हिस्सा कथित तौर पर हवाला चैनलों के जरिये I-PAC तक पहुंचा. एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि अनूप माझी उर्फ लाला से जुड़े सिंडिकेट से करीब 20 करोड़ रुपये किन परिस्थितियों में संबंधित खातों तक पहुंचे.
चुनावी खर्च से जोड़कर भी जांच तेज
एजेंसी को यह आशंका भी है कि संदिग्ध धन का इस्तेमाल चुनावी गतिविधियों में किया गया हो सकता है. इसी सिलसिले में हाल ही में दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद स्थित I-PAC के दफ्तरों पर छापेमारी की गयी थी. जांच का फोकस अब पैसों के उपयोग और उसके अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने पर है.
राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज, विपक्ष ने उठाए सवाल
गिरफ्तारी के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी(Abhishek Banerjee) ने इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई विपक्ष को दबाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है. उनके मुताबिक इससे निष्पक्ष माहौल प्रभावित हो सकता है.
The arrest of Vinesh Chandel, co-founder of I-PAC, barely 10 days before the Bengal elections, is not just alarming- It shakes the very idea of a level playing field.
— Abhishek Banerjee (@abhishekaitc) April 13, 2026
At a time when WB should be moving toward free and fair elections, this kind of action sends a chilling message:…
संस्थाओं के इस्तेमाल पर भी उठे आरोप
उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई का पैटर्न सवाल खड़े करता है, जहां कुछ मामलों में तेजी दिखाई जाती है जबकि अन्य मामलों में ढील नजर आती है. इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गयी है.
पहले भी हुई थी छापेमारी, मामला अदालत में लंबित
इस प्रकरण की पृष्ठभूमि जनवरी 2026 से जुड़ी है, जब कोलकाता में I-PAC से जुड़े परिसरों पर छापेमारी हुई थी. उस समय जांच में बाधा डालने और डिजिटल साक्ष्यों को लेकर विवाद सामने आया था. यह मामला फिलहाल अदालतों में विचाराधीन है.
मतदान से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
राज्य में 23 और 29 अप्रैल को मतदान प्रस्तावित है. ऐसे समय में इस गिरफ्तारी को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गयी है. एक ओर इसे कानून के तहत की गयी कार्रवाई बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे चुनाव से पहले का दबाव बताया जा रहा है.
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