PMMVY 2026: माताओं और नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना(Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana) को प्रभावी तरीके से लागू किया है. यह योजना गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषण संबंधी जरूरतों के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्रदान करती है. इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बालिका जन्म को प्रोत्साहित करना भी है. पूरी राशि DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है.
दो चरणों में मिलती है आर्थिक सहायता
योजना के तहत लाभ का स्वरूप स्पष्ट रूप से निर्धारित है:
- पहली संतान पर सहायता (कुल 5,000 रुपये):
- 3,000 रुपये गर्भावस्था के पंजीकरण और आवश्यक जांच के बाद.
- 2,000 रुपये शिशु के जन्म पंजीकरण और टीकाकरण से जुड़ी शर्तें पूरी होने पर.
- दूसरी संतान यदि बेटी हो (कुल 6,000 रुपये):
- 6,000 रुपये की एकमुश्त सहायता सीधे बैंक खाते में.
इस प्रावधान का उद्देश्य मातृ पोषण में सुधार और बेटियों के जन्म को सकारात्मक सामाजिक संदेश देना है.
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पात्रता की प्रमुख शर्तें
योजना का लाभ लेने के लिए निम्नलिखित शर्तें लागू होती हैं:
महिला की न्यूनतम आयु 19 वर्ष होनी चाहिए.
- परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक नहीं हो.
- गर्भावस्था का समय पर पंजीकरण अनिवार्य है.
- लाभार्थी के पास बैंक खाता और आधार से जुड़ी जानकारी होनी चाहिए.
- ई-श्रम कार्ड, बीपीएल कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड या दिव्यांग श्रेणी से जुड़ी महिलाएं भी पात्र हो सकती हैं (नियमों के अनुसार).
आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प
योजना का लाभ लेने के लिए बच्चे के जन्म के 270 दिनों के भीतर आवेदन करना जरूरी है.
आवेदन के तरीके:
- आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन.
- नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र पर संपर्क कर फॉर्म भरना.
- सरकारी स्वास्थ्य केंद्र/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दस्तावेज जमा करना.
आवेदन के समय पहचान पत्र, बैंक खाता विवरण, गर्भावस्था पंजीकरण प्रमाण और संबंधित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है.
अब तक कितना पहुंचा लाभ?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है. हजारों करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित किए गए हैं. इस पहल से न केवल गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहारा मिला है, बल्कि पोषण जागरूकता और बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी बढ़ावा मिला है.
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