Iran Taftan Volcano : ईरान के दक्षिण-पूर्वी इलाके में स्थित माउंट तफ्तान ज्वालामुखी में हाल ही में असामान्य हलचल देखी गई है. यह ज्वालामुखी पाकिस्तान की सीमा के पास सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और लंबे समय से शांत रहा है. लेकिन अब हाल ही में रिसर्च में यह सामने आया है कि तफ्तान के शिखर की जमीन धीरे-धीरे ऊपर उठ रही है. साथ ही आसपास के इलाके में सल्फर जैसी तेज़ गंध महसूस की जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता की स्थिति बनी हुई है.
शिखर पर जमीन उठी
वैज्ञानिकों के अनुसार, 2023 से 2024 के बीच तफ्तान के शिखर पर लगभग 9 सेंटीमीटर (लगभग 3.5 फीट) तक जमीन उठ गई है. यह उठाव धीरे-धीरे हुआ और अब तक स्थिर है. विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन के इस ऊपर उठने का कारण नीचे जमा गैस और गर्म पानी (हाइड्रोथर्मल सिस्टम) का दबाव हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि शिखर में हल्का मैग्मा मूवमेंट भी इस प्रक्रिया में शामिल हो सकता है.
JUST IN 🌋 Volcano long considered dormant for hundreds of thousands of years may be showing signs of reawakening. New research suggests that Mount Taftan, located in eastern Iran near the Afghanistan border, could be gearing up for a major eruption — despite remaining inactive… pic.twitter.com/fyp8arrHzO
— The Crypto Bull (@TheCryptoBull11) October 25, 2025
सैटेलाइट और तकनीकी निगरानी
इस ज्वालामुखी की गतिविधि को ट्रैक करने के लिए वैज्ञानिकों ने इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक अपर्चर रडार (InSAR) तकनीक का इस्तेमाल किया. इस तकनीक के जरिए जमीन में हो रही छोटी-छोटी हलचलों को भी बहुत सटीकता से मापा जा सकता है. डेटा को और साफ करने के लिए नई कॉमन मोड फिल्टरिंग विधि अपनाई गई, जिससे वायुमंडलीय शोर हट गया. परिणामस्वरूप यह पता चला कि दबाव का मुख्य स्रोत शिखर से लगभग 490 से 630 मीटर की गहराई में है.
सल्फर डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन
एबीसी न्यूज की रिपोर्ट में बताया गया है कि तफ्तान ज्वालामुखी से साल 2023 में प्रतिदिन लगभग 20 टन सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकल रही थी. इस समय स्थानीय लोगों ने तेज़ सल्फर की बदबू और गैस के निकलने की शिकायतें दर्ज कराई थीं. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह गैस और गर्म पानी की मौजूदगी ही शिखर को “फुलने” जैसा दिखा रही है और इसे सतर्कता के साथ ट्रैक करना जरूरी है.
अन्य संभावनाओं का खंडन
इस घटनाक्रम के बाद कई तरह के अनुमान लगाए गए, लेकिन वैज्ञानिकों ने साफ किया कि भू-कंप या भारी बारिश को इस हलचल का कारण नहीं माना जा सकता. उस समय न तो कोई बड़ा भूकंप आया था और न ही तेज़ बारिश हुई थी. इसलिए मुख्य कारण ज्वालामुखी के भीतर जमा दबाव और गैस ही माना जा रहा है.
तफ्तान ज्वालामुखी की भौगोलिक और वैज्ञानिक जानकारी
तफ्तान ईरान का एक स्तरीय (स्ट्रेटो) ज्वालामुखी है, जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 3,940 मीटर है. यह ज्वालामुखी मकरान सबडक्शन जोन में आता है, जहां अरेबियन प्लेट धीरे-धीरे यूरेशियन प्लेट के नीचे खिसक रही है. शिखर पर मौजूद फ्यूमरोल लगातार सक्रिय रहते हैं, जो अंदर की तापीय गतिविधि और दबाव का संकेत देते हैं. वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह प्राकृतिक गतिविधि तफ्तान की भू-आकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन सतर्कता जरूरी है.
निगरानी और सतर्कता की जरूरत
मुख्य वैज्ञानिक पाब्लो गोंजालेज ने बताया कि यह चेतावनी घबराहट के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने के लिए है. वर्तमान में तफ्तान इलाके में कोई ग्राउंड बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे GPS या सीस्मोग्राफ स्थापित नहीं हैं. इस वजह से सैटेलाइट डेटा ही वैज्ञानिकों के लिए मुख्य स्रोत है.
विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि दबाव लगातार बढ़ता रहा, तो इससे छोटे विस्फोट, गैस का अचानक रिसाव या जहरीली गैस के निकलने की संभावना बढ़ सकती है. उन्होंने सिफारिश की है कि इस पूरे इलाके में निगरानी नेटवर्क बनाया जाए, ताकि संभावित खतरे का नक्शा तैयार किया जा सके, गैस मॉनिटरिंग की जा सके और आपातकालीन योजना बनाई जा सके.
भविष्य की तैयारी
वैज्ञानिक यह भी बता रहे हैं कि तफ्तान पर ध्यान बनाए रखना जरूरी है क्योंकि ज्वालामुखी का शिखर लगातार बदलते दबाव और गैस की गतिविधियों के संकेत देता है. यदि समय रहते उचित निगरानी और तैयारी नहीं की गई, तो भविष्य में अप्रत्याशित घटनाओं का खतरा हो सकता है. इसलिए स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय को सतर्क और सक्रिय रहना होगा.
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