Jamshedpur News : जुगसलाई नगर परिषद में 44 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद नगर निकाय चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं. चुनावी माहौल बनने लगा है. इस बार कुल 44,239 मतदाता अपने वार्ड के प्रतिनिधियों को चुनेंगे. नगर परिषद क्षेत्र में कुल 22 वार्ड हैं, जिनके लिए 41 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. इनमें से 11 सीटें विशेष आरक्षण के तहत आती हैं और शेष 11 सीटें सामान्य घोषित की गई हैं.
आरक्षित और महिला सीटों का विवरण
महिला प्रतिनिधियों के लिए कुल 9 सीटें आरक्षित हैं. इनमें से कुछ सीटें विशेष वर्ग की महिलाओं के लिए निर्धारित की गई हैं. उदाहरण के तौर पर, वार्ड 6 और 10 में केवल अति पिछड़ा वर्ग 1 की महिलाएं चुनाव लड़ सकती हैं, जबकि वार्ड 13 में पिछड़ा वर्ग 2 की महिलाएं ही उम्मीदवार हो सकती हैं. इसके अलावा, सामान्य वर्ग की महिलाएं वार्ड 15, 19, 20, 21 और 22 में चुनाव लड़ सकती हैं.
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वार्ड आरक्षण की बात करें तो अति पिछड़ा वर्ग 1 के लिए वार्ड 1, 5, 6, 7, 9, 10 और 11 आरक्षित हैं. पिछड़ा वर्ग 2 के लिए वार्ड 13, 14 और 18 को आरक्षित घोषित किया गया है. शेष 11 वार्डों को अनारक्षित रखा गया है.
जुगसलाई में चुनाव का इतिहास
जुगसलाई नगर परिषद में अब तक केवल दो बार चुनाव आयोजित हुए हैं. पहला चुनाव 1977 में कराया गया था, जिसमें मुरलीधर केडिया को पहले अध्यक्ष के रूप में चुना गया. इससे पहले यह क्षेत्र नगर पालिका और उससे पहले अधिसूचित क्षेत्र समिति के रूप में कार्यरत था. 1924 में अधिसूचित क्षेत्र समिति का गठन हुआ, और 1976 में इसे नगर पालिका का दर्जा मिला.
मुरलीधर केडिया और सादगी भरा चुनावी दौर
मुरलीधर केडिया बताते हैं कि उस समय चुनाव बेहद सादगी भरे तरीके से होते थे. उन्होंने वार्ड पार्षद का चुनाव मात्र 2,000 रुपये खर्च कर लड़ा था. यह राशि सिर्फ हैंडबिल छपवाने में लगी थी, जबकि पोस्टर, होर्डिंग या बड़े प्रचार अभियान नहीं किए गए. उस दौर में अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष नहीं, बल्कि चुने गए सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता था.
मतदाता और वार्ड संरचना
उस समय प्रत्येक वार्ड में लगभग 1,000 मतदाता होते थे और उम्मीदवार अपने मोहल्लों के प्रत्येक परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानते थे. वार्ड संरचना इस तरह बनाई गई थी कि स्थानीय लोगों के साथ व्यक्तिगत संपर्क और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके.
लोकतांत्रिक महत्व और भविष्य
यह चुनाव जुगसलाई के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है. 44 वर्षों के बाद मतदाता अपने वार्ड प्रतिनिधियों को चुनेंगे, जो नगर परिषद के कामकाज और विकास में निर्णायक भूमिका निभाएंगे. इस चुनाव के परिणाम से नगर परिषद का भविष्य तय होगा और स्थानीय प्रशासन में नई ऊर्जा का संचार होगा.
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