New Income Tax Act: देश की टैक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून लागू करेगी, जिसके साथ ही वर्ष 1961 से चला आ रहा पुराना इनकम टैक्स एक्ट इतिहास बन जाएगा. सरकार का कहना है कि नए कानून का मकसद टैक्स नियमों को सरल, स्पष्ट और आम लोगों के अनुकूल बनाना है.
सरकार अब जटिल प्रावधानों और दबाव वाली टैक्स वसूली की जगह ऐसा सिस्टम चाहती है, जिसमें लोग आसानी से नियम समझें और स्वेच्छा से टैक्स भरें. इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा.
12 लाख रुपये तक की आय पूरी तरह टैक्स फ्री
नए आयकर ढांचे में आम करदाताओं को बड़ी राहत दी गई है. सालाना 12 लाख रुपये तक कमाने वालों को किसी तरह का इनकम टैक्स नहीं देना होगा. अलग-अलग छूट और कटौती के जटिल नियमों को हटाकर सीधे और साफ टैक्स स्लैब लागू किए जाएंगे. अधिक आय वालों के लिए टैक्स दर क्रमशः बढ़ेगी और 24 लाख रुपये से ऊपर की आय पर 30 प्रतिशत टैक्स तय किया गया है.
‘असेसमेंट ईयर’ जैसे शब्दों से मिलेगी मुक्ति
नए कानून में टैक्स से जुड़े तकनीकी शब्दों को भी सरल बनाया जाएगा. ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ जैसे शब्द अब इस्तेमाल में नहीं रहेंगे. उनकी जगह केवल ‘टैक्स ईयर’ शब्द लागू होगा. इससे रिटर्न फाइल करते समय होने वाली उलझन काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है.
सिगरेट और पान मसाले पर बढ़ेगा टैक्स बोझ
सरकार स्वास्थ्य के लिहाज से नुकसानदेह माने जाने वाले उत्पादों पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है. सिगरेट और पान मसाले पर अब GST के अलावा अलग से अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे एक ओर राजस्व में इजाफा होगा, वहीं इन उत्पादों के सेवन को हतोत्साहित करने में भी मदद मिलेगी.
GST में बड़े बदलाव की फिलहाल कोई योजना नहीं
वर्ष 2025 में GST दरों में जो संशोधन किए गए थे, वही व्यवस्था 2026 में भी जारी रहेगी. ज्यादातर वस्तुएं और सेवाएं 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत GST स्लैब के अंतर्गत ही रहेंगी. महंगे और हानिकारक उत्पादों पर अपेक्षाकृत ऊंची दरें लागू रहेंगी. सरकार का लक्ष्य GST सिस्टम को स्थिर बनाए रखना है, ताकि व्यापार और उपभोक्ता दोनों को स्पष्टता बनी रहे.
कस्टम ड्यूटी बनेगी अगला सुधार क्षेत्र
इनकम टैक्स और GST के बाद सरकार का अगला फोकस कस्टम ड्यूटी पर रहेगा. आयात-निर्यात से जुड़े कई टैक्स स्लैब पहले ही कम किए जा चुके हैं और आगे प्रक्रियाओं को और आसान करने की तैयारी है. इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को गति मिलने की उम्मीद है.
कस्टम्स सिस्टम भी होगा डिजिटल
इनकम टैक्स की तरह कस्टम्स प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल और फेसलेस बनाने पर काम चल रहा है. इससे बंदरगाहों पर माल अटकने की समस्या कम होगी, कागजी औपचारिकताएं घटेंगी और कारोबारियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. सरकार का दावा है कि इससे कस्टम्स व्यवस्था तेज, पारदर्शी और ज्यादा भरोसेमंद बनेगी.
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