Ranchi News : रांची के सदर थाना क्षेत्र स्थित मौलाना आजाद कॉलोनी में मंगलवार को एक बेहद मार्मिक हादसा सामने आया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. मौलाना आजाद कॉलोनी में घर के पास खेल रहे दो नन्हे बच्चे अचानक पास से गुजर रहे खुले नाले की चपेट में आ गए. पानी का बहाव इतना तेज था कि दोनों बच्चे संभल नहीं पाए और नाले में बहने लगे.
मां ने जान जोखिम में डालकर बचाया एक बेटा
बच्चों को बहता देख उनकी मां बिना किसी देरी के नाले में उतर गई. तेज पानी के बीच उसने पूरी ताकत लगाकर एक बच्चे को पकड़ लिया और बाहर निकाल लाई. हालांकि दूसरा बच्चा उसके हाथ से फिसल गया और पानी के साथ आगे बढ़ गया. मां की आंखों के सामने दो साल का बेटा नाले में ओझल हो गया.
इलाके में मची अफरातफरी, शुरू हुई तलाश
घटना के बाद कॉलोनी में अफरा-तफरी मच गई. आसपास के लोग दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी गई. स्थानीय लोग नाले के किनारे-किनारे बच्चे को खोजने लगे. कुछ ही दूरी पर, नाले में लगे एक पाइप के पास कीचड़ में फंसा बच्चे का शव बरामद हुआ.
खेलते-खेलते नाले में गिरे दो भाई
स्थानीय निवासियों के अनुसार, हादसे का शिकार हुए दोनों बच्चे सगे भाई थे. बड़े बच्चे की उम्र करीब तीन साल थी, जबकि छोटे भाई की उम्र दो साल बताई जा रही है. दोनों घर के बाहर खेल रहे थे, तभी फिसलन के कारण उनका संतुलन बिगड़ा और वे सीधे खुले नाले में गिर गए.
तेज बहाव बना मौत की वजह
मां ने बच्चों को गिरते देख तुरंत दौड़ लगाई और बचाने की कोशिश की. बड़े बेटे को तो वह सुरक्षित निकाल लाई, लेकिन छोटे बेटे को पानी के तेज बहाव ने उससे छीन लिया. करीब डेढ़ घंटे तक चले प्रयासों के बाद बच्चे का शव मिला.
खुले नाले पर लोगों का फूटा गुस्सा
घटना के बाद कॉलोनी के लोग आक्रोशित हैं. उनका कहना है कि यह नाला पूरी तरह खुला हुआ है और इसके चारों ओर किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं है. बरसात के मौसम में यहां पानी की रफ्तार बेहद खतरनाक हो जाती है. इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया.
ट्रांसफार्मर भी बना हुआ है खतरा
स्थानीय लोगों और बच्चों के दादा ने बताया कि कॉलोनी में एक बिजली ट्रांसफार्मर भी घरों के बेहद पास असुरक्षित स्थिति में लगा है. लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर उसे घेरने की योजना बनाई थी, ताकि बच्चे सुरक्षित रहें, लेकिन इससे पहले ही यह दर्दनाक हादसा हो गया.
नाला सीधे स्वर्णरेखा नदी से जुड़ा
बताया जाता है कि यह नाला काफी लंबा है और आगे जाकर स्वर्णरेखा नदी में मिल जाता है. बरसात के दिनों में पानी का दबाव और अधिक बढ़ जाता है, जिससे यहां रहने वालों के लिए खतरा बना रहता है.
पुरानी घटनाओं की याद फिर ताजा
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 2006-07 के दौरान भी इसी इलाके में इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं. पूर्व मेयर रमा खलखो ने बताया कि 2008 में कुछ पुलों का निर्माण जरूर हुआ था, लेकिन नाले को ढकने या सुरक्षा दीवार बनाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए.
नगर निगम पर उठ रहे गंभीर सवाल
लोगों का कहना है कि नगर निगम इन दिनों अतिक्रमण हटाने के नाम पर घरों को तोड़ने में व्यस्त है, जबकि शहर के भीतर मौजूद ऐसे खुले और जानलेवा नालों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा. बरसात के मौसम में राजधानी के अलग-अलग इलाकों से बच्चों के नाले में गिरने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं.
स्थायी समाधान की मांग तेज
घटना के बाद स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि नगर विकास विभाग से नाले को ढकने, गार्डवाल निर्माण और नियमित सफाई की मांग कर रहे हैं, ताकि आगे किसी और मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े.
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