Who after Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में भूचाल आ गया है. शनिवार को तेहरान स्थित उनके आधिकारिक आवास और दफ्तर पर हुए हवाई हमले में उनकी जान चली गई. बताया जा रहा है कि हमले में उनके परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए. 1989 से देश की बागडोर संभाल रहे 86 वर्षीय नेता की मृत्यु के साथ ही ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा खालीपन पैदा हो गया है.
ईरान की शासन प्रणाली ऐसी है, जिसमें नीतिगत और रणनीतिक फैसलों पर अंतिम मुहर सुप्रीम लीडर की होती है. विदेश नीति, रक्षा ढांचा, न्यायपालिका और प्रमुख नियुक्तियों तक में उनका निर्णायक प्रभाव रहता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब देश की कमान किसे सौंपी जाएगी. माना जा रहा है कि खामेनेई ने अपने जीवनकाल में उत्तराधिकार की रूपरेखा तैयार की थी, लेकिन उसका सार्वजनिक खुलासा कभी नहीं किया गया.
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खामेनेई की मौत के बाद सरकार ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और सात दिन की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है. 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सत्ता में आए रूहोल्लाह खुमैनी के निधन के पश्चात खामेनेई ने नेतृत्व संभाला था. वे पहले राष्ट्रपति रहे और बाद में देश के सर्वोच्च नेता बने. उनके कार्यकाल में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की भूमिका और प्रभाव लगातार मजबूत हुआ. कठोर शासन शैली और क्षेत्रीय रणनीति के कारण वे मध्य पूर्व की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते रहे.
सर्वोच्च नेता के चयन की संवैधानिक प्रक्रिया
ईरान के संविधान के तहत सर्वोच्च नेता की नियुक्ति और निगरानी का अधिकार विशेषज्ञों की सभा, यानी मजलिस-ए-खोबरेगान-ए-रहबरी को है. 88 सदस्यीय यह निकाय इस्लामी विद्वानों से मिलकर बना है, जिन्हें जनता सीधे मतदान के जरिए आठ वर्ष के लिए चुनती है. इसकी जिम्मेदारी केवल नए सर्वोच्च नेता का चयन करना ही नहीं, बल्कि उनके कार्यों की निगरानी करना और आवश्यक होने पर पद से हटाना भी है.
यह पूरी व्यवस्था ‘विलायत-ए-फकीह’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार केवल उच्च दर्जे का इस्लामी धर्मगुरु ही इस पद पर बैठ सकता है. हालांकि व्यवहार में यह प्रक्रिया काफी जटिल और सीमित दायरे वाली मानी जाती है. विशेषज्ञों की सभा के उम्मीदवारों की जांच-परख गार्जियन काउंसिल करता है, और गार्जियन काउंसिल के सदस्य स्वयं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सर्वोच्च नेता द्वारा नियुक्त होते हैं. इस तरह सत्ता संरचना एक प्रकार के बंद चक्र के रूप में काम करती है.
संभावित उत्तराधिकारियों के नाम
अमेरिका स्थित थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की हालिया रिपोर्ट में कुछ प्रमुख नामों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है.
- होज्जत-उल-इस्लाम मोहसिन कोमी: खामेनेई के करीबी सलाहकार माने जाते हैं. समर्थकों का तर्क है कि वे संक्रमण काल में स्थिरता और निरंतरता सुनिश्चित कर सकते हैं.
- आयतुल्लाह अलीरेजा आराफी: गार्जियन काउंसिल और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स दोनों में सदस्यता रखते हैं. ईरान की मदरसा प्रणाली में उनकी अहम भूमिका है.
- आयतुल्लाह मोहसिन अराकी: असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के वरिष्ठ सदस्य और मजबूत धार्मिक पृष्ठभूमि वाले नेता.
- आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसेनी एजई: वर्तमान में न्यायपालिका प्रमुख हैं, और प्रशासनिक व सुरक्षा मामलों का व्यापक अनुभव रखते हैं.
- आयतुल्लाह हाशेम होसैनी बुशेहरी: कोम में जुमे की नमाज के इमाम और असेंबली के प्रभावशाली सदस्य.
इन नामों के बीच संतुलन साधना विशेषज्ञों की सभा के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि हर उम्मीदवार के पीछे अलग-अलग शक्ति केंद्रों का समर्थन माना जाता है.
क्या बेटे को मिल सकती है जिम्मेदारी?
हालांकि खामेनेई ने औपचारिक तौर पर किसी उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं की थी, लेकिन उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम भी चर्चाओं में है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेतृत्व चयन को लेकर तेजी दिखा सकता है. संभावना जताई जा रही है कि प्रक्रिया को शीघ्र निष्कर्ष तक पहुंचाने की कोशिश की जाए.
यदि ऐसा होता है, तो मोजतबा खामेनेई को आगे लाने की पहल की जा सकती है. हालांकि यह निर्णय पूरी तरह विशेषज्ञों की सभा की औपचारिक स्वीकृति पर निर्भर करेगा.
अन्य राजनीतिक विकल्प भी मौजूद
वर्तमान में देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी एक प्रमुख राजनीतिक चेहरा हैं. यदि सत्ता संतुलन को नए तरीके से परिभाषित करने का प्रयास होता है, तो उनके नाम पर भी सहमति बन सकती है. इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे से जुड़े वरिष्ठ नेता अली लारिजानी का नाम भी चर्चा में है, जो संकट की घड़ी में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.
फिलहाल ईरान की ओर से नए सर्वोच्च नेता के चयन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा हालात को देखते हुए निर्णय में कुछ समय लग सकता है. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ईरान की सत्ता संरचना किस दिशा में आगे बढ़ती है और कौन नेता देश की बागडोर संभालता है.
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