Hormuz Strait: मुंबई बंदरगाह पर बुधवार दोपहर एक बड़ा तेल टैंकर पहुंचा, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरकर भारत आने वाला पहला जहाज माना जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच इसकी सुरक्षित एंट्री को भारत के लिए राहत की खबर माना जा रहा है.
मुंबई पहुंचा कच्चे तेल से भरा टैंकर
बुधवार दोपहर करीब 1 बजे यह टैंकर मुंबई बंदरगाह पर पहुंचा और शाम 6:06 बजे इसे जवाहर द्वीप टर्मिनल पर लंगर डाल दिया गया. जहाज में करीब 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा हुआ है.
यह कच्चा तेल पूर्वी मुंबई के माहुल इलाके में स्थित रिफाइनरियों को सप्लाई किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार टैंकर से तेल उतारने की प्रक्रिया पूरी होने में लगभग 36 घंटे का समय लग सकता है.
इसे भी पढ़ें-मिडिल ईस्ट जंग का भारत में असर, LPG सप्लाई ठप; बेंगलुरु के होटल बंद होने की नौबत
सऊदी अरब से चला था जहाज, बीच रास्ते ट्रैकिंग से हुआ गायब
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक यह टैंकर लाइबेरिया ध्वज वाला “शेनलॉन्ग स्वेजमैक्स” है. जहाज ने 1 मार्च को सऊदी अरब के रास तनुरा बंदरगाह पर कच्चा तेल लोड किया और 3 मार्च को भारत के लिए रवाना हुआ था.
समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार 8 मार्च को यह पोत होर्मुज जलडमरूमध्य के पास था. इसी दौरान जहाज कुछ समय के लिए ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गया. बाद में 9 मार्च को यह फिर से ट्रैकिंग नेटवर्क पर दिखाई दिया.
खतरे वाले क्षेत्र में बंद किया गया था ट्रांसपोंडर
रिपोर्ट के अनुसार जहाज जब होर्मुज जलडमरूमध्य के संवेदनशील हिस्से से गुजर रहा था, तब उसने अपनी ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपोंडर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था.
यह एक समुद्री वीएचएफ रेडियो प्रणाली होती है, जो जहाज की पहचान, उसकी स्थिति, गति और दिशा जैसी जानकारी आसपास के जहाजों और तटीय नियंत्रण केंद्रों तक स्वतः पहुंचाती है. इसका इस्तेमाल आमतौर पर समुद्र में टकराव से बचाव और सुरक्षित नेविगेशन के लिए किया जाता है.
जहाज पर 29 सदस्यीय क्रू, भारतीय कप्तान
टैंकर में कुल 29 चालक दल के सदस्य सवार थे. इनमें भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं. जहाज का कप्तान भारतीय है.
यह टैंकर शेनलॉन्ग शिपिंग लिमिटेड का बताया जाता है, जबकि इसका संचालन एथेंस स्थित डायनाकॉम टैंकर मैनेजमेंट लिमिटेड द्वारा किया जाता है.
होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर बढ़ा तनाव
ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी और नियंत्रण कड़ा कर दिया गया है. हालांकि भारत की कूटनीतिक बातचीत के बाद भारतीय जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है.
फारस की खाड़ी में मौजूद हैं कई भारतीय जहाज
जहाजरानी मंत्रालय के अनुसार फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज सक्रिय हैं. इनमें से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं. वहीं चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में हैं, जिनमें 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं.
दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जिसकी चौड़ाई लगभग 33 किलोमीटर है. यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
इस मार्ग से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल की आवाजाही होती है. वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा और समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का करीब एक चौथाई इसी रास्ते से गुजरता है.
इसे भी पढ़ें-गैस सिलेंडर के बाद हवाई सफर महंगा; Air India ने टिकट पर जोड़ा फ्यूल सरचार्ज
इसे भी पढ़ें-LPG बुकिंग नियम सख्त, अब 25 दिन से पहले नहीं कर सकेंगे अगला सिलेंडर बुक
इसे भी पढ़ें-बेटी के जन्म पर कितने रुपए मिलेंगे? जानिए मातृ वंदना योजना का लाभ पाने का पूरा तरीका

