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पापांकुशा एकादशी आज; भगवान विष्णु की पूजा में न भूलें ये नियम, जानें कब करना है पारण

Papankusha Ekadashi 2026 : पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर को रखा जाएगा और 23 अक्टूबर को पारण होगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, पारण का समय सुबह 5:51 बजे से 8:08 बजे तक है. जानिए भगवान विष्णु की पूजा विधि, व्रत कथा का महत्व और इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कार्यों से जुड़ी मान्यताएं.

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Papankusha Ekadashi 2026 : पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर को रखा जाएगा और 23 अक्टूबर को पारण होगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, पारण का समय सुबह 5:51 बजे से 8:08 बजे तक है. जानिए भगवान विष्णु की पूजा विधि, व्रत कथा का महत्व और इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कार्यों से जुड़ी मान्यताएं.

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Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ व्रत का पारण कब और किस समय करना है, यह जानना जरूरी है. साल 2026 में यह व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा, जबकि पारण 23 अक्टूबर, शुक्रवार को किया जाएगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 22 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत में पूजा-पाठ, मंत्र जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और दान-पुण्य का विशेष महत्व है. व्रत कथा का श्रवण भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी 2026 की तिथि, पारण का समय, पूजा विधि और इसके धार्मिक महत्व से जुड़ी जरूरी बातें.

पापांकुशा एकादशी 2026: कब शुरू होगी तिथि और किस दिन रखा जाएगा व्रत?

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. साल 2026 में पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा. इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत कथा पढ़ते या सुनते हैं.

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द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और 22 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी.

  • पापांकुशा एकादशी व्रत: 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार
  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 21 अक्टूबर 2026, दोपहर 2:11 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 22 अक्टूबर 2026, दोपहर 2:47 बजे

Papankusha Ekadashi 2026 Paran Time: 23 अक्टूबर को इस समय खोलें व्रत

एकादशी व्रत में पारण का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक परंपरा के अनुसार, व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय के भीतर किया जाता है. साल 2026 में पापांकुशा एकादशी का पारण शुक्रवार, 23 अक्टूबर को होगा.

  • पारण की तारीख: 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
  • पारण का शुभ समय: सुबह 5:51 बजे से 8:08 बजे तक
  • द्वादशी तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर 2026, दोपहर 2:35 बजे

पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें?

पापांकुशा एकादशी पर श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का संकल्प लेते हैं. पूजा में पीले फूल, चंदन, फल और तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है. इस दिन मंत्र जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और व्रत कथा का श्रवण भी किया जाता है.

पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें.
  • भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें.
  • भगवान को पीले फूल, चंदन, फल और भोग अर्पित करें. पूजा में तुलसी दल भी चढ़ाएं.
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
  • पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें.
  • अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या आवश्यक वस्तुओं का दान करें.
  • व्रत के दौरान अपनी धार्मिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार करें.
  • अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर पारण करके व्रत पूरा करें.

पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा पढ़ने का क्या है महत्व?

एकादशी के दिन केवल उपवास ही नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की आराधना और व्रत कथा के श्रवण को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. व्रत कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है.

ज्योतिषाचार्य गोपाल कृष्ण के अनुसार, “पापांकुशा एकादशी भगवान विष्णु की आराधना का महत्वपूर्ण अवसर है. इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा, मंत्र जाप, व्रत कथा का पाठ और दान-पुण्य करना चाहिए. व्रत का उद्देश्य केवल उपवास रखना नहीं, बल्कि अपने आचरण में सुधार करना और अच्छे कर्मों की ओर आगे बढ़ना भी है.”

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पापांकुशा एकादशी का धार्मिक महत्व: पूजा और दान-पुण्य से जुड़ी हैं ये मान्यताएं

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पापांकुशा एकादशी को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति पाने तथा जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करने का अवसर मिलता है.

इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है. जरूरतमंदों की सहायता करना और दूसरों के प्रति दया का भाव रखना भी पुण्यकारी माना गया है. यह व्रत लोगों को गलत कर्मों से दूर रहने, अपने आचरण में सुधार लाने और सदाचार अपनाने की प्रेरणा देता है.

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Disclaimer: यह जानकारी केवल पारंपरिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों पर आधारित है. HelloCities24 इसकी सत्यता या वैधता की पुष्टि नहीं करता.

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Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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