Diwali 2026 : दिवाली पर हर कोई मां लक्ष्मी की कृपा और घर में सुख-समृद्धि की कामना करता है. इसके लिए लोग घरों की साफ-सफाई करते हैं, पूजा की तैयारी करते हैं और दीप जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत करते हैं. लेकिन सिर्फ घर को सजाना और पूजा-पाठ करना ही काफी नहीं माना गया है. व्यक्ति की रोजमर्रा की आदतें और व्यवहार भी उसके जीवन में सुख-समृद्धि से जुड़े माने जाते हैं. चाणक्य नीति के एक संस्कृत श्लोक में पांच ऐसी आदतों का जिक्र किया गया है, जिनसे मां लक्ष्मी रूठ सकती हैं. इनमें गंदे कपड़े पहनना, अधिक भोजन करना और कठोर वाणी बोलना जैसी आदतें शामिल हैं.
आइए जानते हैं वे पांच आदतें, जिन्हें दिवाली पर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी छोड़ना जरूरी माना गया है.
चाणक्य नीति में क्यों बताई गई हैं इन 5 आदतों से दूरी बनाने की बात?
चाणक्य नीति के अध्याय 4 के श्लोक संख्या 10 में व्यक्ति के रहन-सहन और व्यवहार से जुड़ी पांच कमियों का उल्लेख मिलता है.
संस्कृत श्लोक:
कुचैलिनं मलमूत्रधारिणं, बह्वाशिनं निष्ठुरभाषिणं च सूर्योदये चास्तमये शयानं, विमुञ्चति श्रीरपि चक्रपाणिम्.
इस श्लोक का भावार्थ है कि गंदे कपड़े पहनने वाले, शरीर और आसपास की स्वच्छता का ध्यान नहीं रखने वाले, जरूरत से ज्यादा भोजन करने वाले, कठोर वाणी बोलने वाले और सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सोने वाले व्यक्ति से मां लक्ष्मी भी दूर हो जाती हैं. यहां तक कि ऐसे व्यक्ति को भगवान विष्णु का साथ भी प्राप्त नहीं होता है.
इसे भी पढ़ें-दीपावली पर अपनों को भेजें ये खूबसूरत शुभकामना संदेश, हर संदेश में छिपी है सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना
दिवाली पर इन 5 आदतों को बदलने की करें शुरुआत
- गंदे कपड़े पहनने की आदत छोड़ें
चाणक्य नीति के अनुसार, गंदे कपड़े पहनना अच्छी आदत नहीं है. दिवाली जैसे त्योहार पर स्वच्छता का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि मां लक्ष्मी स्वच्छ और सुंदर स्थान पर निवास करती हैं. इसलिए त्योहार के दिन साफ-सुथरे कपड़े पहनें और अपने रहन-सहन में स्वच्छता बनाए रखें.
- घर और आसपास गंदगी न रखें
सिर्फ पूजा स्थल को साफ रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे घर और आसपास की सफाई का ध्यान रखना चाहिए. दिवाली से पहले घर की सफाई करने की परंपरा भी इसी मान्यता से जुड़ी है. गंदगी से दूर रहना और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना अच्छी आदतों में शामिल है.
- जरूरत से ज्यादा भोजन करने से बचें
चाणक्य नीति में अधिक भोजन करने की आदत को भी अनुचित बताया गया है. व्यक्ति को अपनी जरूरत के अनुसार संतुलित भोजन करना चाहिए. दिवाली पर तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां बनती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जरूरत से ज्यादा खाया जाए. भोजन की बर्बादी से भी बचना चाहिए.
- अपनी वाणी में रखें मिठास
कठोर वाणी बोलना भी उन पांच आदतों में शामिल है, जिनसे बचने की सलाह दी गई है. दिवाली खुशियां बांटने और रिश्तों में मिठास घोलने का त्योहार है. ऐसे में किसी से अपशब्द बोलने या कटु व्यवहार करने से बचना चाहिए. परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और अन्य लोगों के साथ प्रेम और विनम्रता से पेश आना चाहिए.
- सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सोने से बचें
चाणक्य नीति के श्लोक में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सोने की आदत को भी अच्छा नहीं माना गया है. धार्मिक मान्यताओं में इन दोनों समयों को विशेष महत्व दिया जाता है. इसलिए इस दौरान सोने के बजाय पूजा-पाठ, ध्यान और अन्य शुभ कार्यों में मन लगाना चाहिए.
दिवाली पर इन बातों का भी रखें ध्यान
दिवाली का त्योहार केवल दीप जलाने और मां लक्ष्मी की पूजा करने तक सीमित नहीं है. यह स्वच्छता, अच्छे व्यवहार और सकारात्मकता को अपनाने का भी अवसर है. चाणक्य नीति में बताई गई इन पांच आदतों से बचकर व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन और अच्छे संस्कारों को महत्व दे सकता है.
इसे भी पढ़ें-
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ समय क्या है? बिहार-झारखंड समेत जानें पटना, रांची और अन्य शहरों का मुहूर्त
आखिर भगवान कृष्ण को क्यों चढ़ाया जाता है 56 भोग? सात दिन भूखे रहने से जुड़ी है दिलचस्प कथा
Disclaimer: यह जानकारी केवल पारंपरिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों पर आधारित है. HelloCities24 इसकी सत्यता या वैधता की पुष्टि नहीं करता.



