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Tejashwi Yadav : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्ष पर निशाना साधने के कुछ ही घंटों के भीतर बिहार की राजनीति में नया मोड़ आ गया. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सामने आकर न सिर्फ मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाए, बल्कि सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को भी घेर लिया. तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही, बल्कि बाहर से निर्देशित हो रही है.
महिला आरक्षण कानून पर उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस बिल को लेकर सरकार दावा कर रही है, उसकी बुनियादी समझ ही स्पष्ट नहीं है. उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि जब कानून पहले ही पारित हो चुका है, तो अब तक इसे लागू क्यों नहीं किया गया. उनके मुताबिक, इस मुद्दे के पीछे असली मकसद राजनीतिक है और इसे परिसीमन से जोड़कर देखा जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के नाम पर राजनीति करते हुए सत्ता पक्ष अपने फायदे के लिए जमीन तैयार कर रहा है.
बिहार सरकार पर “रिमोट कंट्रोल” का आरोप
राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर भी तेजस्वी ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि बिहार में फैसले स्थानीय स्तर पर नहीं लिए जा रहे हैं. उनके अनुसार, शासन व्यवस्था पर बाहरी प्रभाव बढ़ गया है और कई निर्णय बाहर से तय होकर राज्य में लागू किए जा रहे हैं. इस दौरान उन्होंने इशारों में कहा कि राज्य की दिशा और नीतियां सीमित लोगों के प्रभाव में तय हो रही हैं, जिससे संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है.
आरक्षण और विचारधारा पर हमला
आरक्षण के मुद्दे पर तेजस्वी यादव ने सत्तारूढ़ दल और उसके वैचारिक संगठनों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर व्यवहार में विरोधाभास दिखाई देता है. तेजस्वी ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देने में हमेशा आगे रहकर काम किया है. उन्होंने मांग रखी कि यदि सरकार सच में महिलाओं के हित में है, तो आरक्षण की सीमा 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जानी चाहिए.
निशांत कुमार के बयान पर भी प्रतिक्रिया
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी निशांत कुमार के बयान पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जब राज्य में शासन से जुड़े मुद्दों पर पहले ही समझौते हो चुके हैं, तो इस तरह के बयानों का विशेष महत्व नहीं रह जाता. इसके साथ ही उन्होंने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि अपराध के आंकड़े चिंताजनक हैं, लेकिन सरकार वास्तविक स्थिति के बजाय आंकड़ों पर जोर दे रही है.
विपक्ष का रुख साफ
तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध नहीं करता, बल्कि उस प्रक्रिया को लेकर चिंतित है, जिसके जरिए इसे लागू किया जा सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के नाम पर सामाजिक संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है, जिससे पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं. उनके अनुसार, इस मुद्दे पर पारदर्शिता और स्पष्टता जरूरी है, ताकि सभी वर्गों को न्याय मिल सके.
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