Bihar Politics: बिहार में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. आरा से पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को पार्टी ने निलंबित करते हुए एक आधिकारिक नोटिस थमा दिया है. पत्र में कहा गया है कि उनकी गतिविधियाँ लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ रहीं, जिससे संगठन को नुकसान पहुंचा.
पार्टी ने उनसे यह भी पूछा है कि क्यों न उन्हें सीधे तौर पर संगठन से निष्कासित कर दिया जाए. इस पर लिखित जवाब देने के लिए सात दिनों की मोहलत दी गई है.

चुनाव प्रचार में पार्टी रणनीति पर उठाए थे सवाल
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2013 में बीजेपी में शामिल हुए आरके सिंह हालिया चुनाव अभियान के दौरान लगातार एनडीए और बीजेपी की रणनीति पर खुलकर टिप्पणी कर रहे थे. उन्होंने सम्राट चौधरी, जदयू नेता अनंत सिंह और आरजेडी के सूरजभान सिंह पर हत्या से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया था. इतना ही नहीं, उन्होंने लोगों से अपील की थी कि ऐसे प्रत्याशियों को वोट देना आत्मघाती होगा. अपने एक पोस्ट में तो उन्होंने यहां तक लिखा कि ऐसे लोगों को चुनने से अच्छा है कि ‘चुल्लू भर पानी में डूब मरें’.
कटिहार की मेयर समेत दो और नेताओं को नोटिस
इसी के साथ बीजेपी ने कटिहार से एमएलसी अशोक अग्रवाल और कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कदम उठाया है. दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है और इनसे भी सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है.
अडाणी पावर एग्रीमेंट पर किस तरह के लगाए थे आरोप?
आरके सिंह ने हाल ही में अडाणी समूह के साथ हुए बिजली खरीद समझौते पर गंभीर सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि बिहार सरकार और अडाणी पावर लिमिटेड के बीच हुआ 25 साल का पावर परचेज एग्रीमेंट राज्य की जनता के साथ सीधा धोखा है और इसमें वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है.
महंगी बिजली खरीद पर जनता पर बढ़ेगा बोझ: आरके सिंह का आरोप
आरके सिंह के मुताबिक, इस समझौते के तहत बिहार सरकार अडाणी समूह से 6 रुपये 75 पैसे प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदेगी, जबकि मौजूदा बाजार दर इससे काफी कम है. उनका आरोप है कि इतनी ऊंची कीमत पर बिजली खरीदने का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा और आने वाले समय में बिजली बिलों का भार कई गुना बढ़ सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि एग्रीमेंट की शर्तों और आवंटन प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां हुई हैं.
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