Bihar Politics : पटना के संपतचक में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान बिहार सरकार के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री सम्राट चौधरी का रुख बेहद सख्त नजर आया. अपने संबोधन में उन्होंने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब लापरवाही और अयोग्यता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में वही टिकेगा, जो जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह सक्षम होगा. हथियार संचालन को लेकर उन्होंने दो टूक कहा कि जिन कर्मियों में जरूरी दक्षता नहीं है, उनके लिए इस पद पर बने रहना उचित नहीं है.
बदले दौर में बदली सोच
सम्राट चौधरी ने कहा कि यह बदला हुआ समय है और इसके साथ प्रशासन की अपेक्षाएं भी बदली हैं. कानून-व्यवस्था को लेकर अब नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने संकेत दिया कि सरकार अब सिर्फ दावे नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है.
पुलिस को मिली खुली छूट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उल्लेख करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि जिस तरह देश की सुरक्षा एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने की छूट दी गई है, उसी तरह बिहार पुलिस को भी कानून के दायरे में रहकर पूरी कार्रवाई का अधिकार दिया गया है. उन्होंने दोहराया कि अब किसी भी पुलिसकर्मी का हाथ बंधा नहीं रहेगा.
कार्रवाई और पेशेवर रवैये पर जोर
सम्राट चौधरी ने साफ किया कि अब पुलिस से केवल उपस्थिति नहीं, बल्कि प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है. उन्होंने कहा कि अपराध और अव्यवस्था के लिए समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए और इसे खत्म करने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं.
सख्ती के साथ विकास का संदेश
अपने सख्त बयान के बीच गृहमंत्री ने संपतचक क्षेत्र के लिए एक विकासात्मक घोषणा भी की. उन्होंने कहा कि अगले वर्ष से पहले इलाके में डिग्री कॉलेज शुरू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. इसके लिए संबंधित अधिकारियों को जमीन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं.
विपक्ष पर साधा निशाना
राजनीतिक संदर्भ में बोलते हुए सम्राट चौधरी ने आरजेडी नेतृत्व पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि देश लोकतांत्रिक व्यवस्था से चलता है, जहां जनता सर्वोपरि होती है. उनके मुताबिक, जनप्रतिनिधियों की भूमिका सेवक की होती है, न कि सत्ता के उत्तराधिकारी की.
आगे के संकेत क्या हैं
सम्राट चौधरी के इस भाषण को प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक स्पष्टता—दोनों के रूप में देखा जा रहा है. उनके शब्दों से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में बिहार में पुलिस व्यवस्था को लेकर अनुशासन, जवाबदेही और कार्रवाई का दबाव और बढ़ सकता है.
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