इस खबर में क्या है?
Bokaro News : बोकारो स्टील सिटी में विस्थापितों को व्यावसायिक अवसर देने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. विभिन्न सेक्टरों में बीएसएल द्वारा तैयार की गई 96 दुकानों के आवंटन के लिए लॉटरी चार मई को नगर सेवा भवन परिसर में आयोजित की जाएगी. इस योजना के तहत बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया था, जिससे प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है और अब सभी की नजर लॉटरी प्रक्रिया पर टिकी हुई है.
आवेदनों की जांच के बाद बनी अंतिम सूची
दुकान आवंटन के लिए कुल 1589 आवेदन प्राप्त हुए थे. इनमें से जांच प्रक्रिया के बाद 1577 आवेदनों को योग्य पाया गया, जबकि शेष को अयोग्य घोषित किया गया है. योग्य और अयोग्य आवेदकों की सूची 27 अप्रैल से नगर सेवा भवन परिसर में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आवेदक अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से देख सकें.
संशोधन के लिए दिया गया अवसर
जिन आवेदकों को सूची में किसी प्रकार की त्रुटि नजर आती है या उन्हें किसी जानकारी में सुधार कराना है, वे नगर सेवा विभाग के कक्ष संख्या 125 में स्थित टीए-एलआरए अनुभाग से संपर्क कर सकते हैं. विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि समय रहते सुधार करवाने पर ही आवेदकों की स्थिति लॉटरी में सही रूप से दर्ज हो सकेगी.
सेक्टरवार होगी लॉटरी प्रक्रिया
लॉटरी का आयोजन क्रमबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिसमें सेक्टर-1 से लेकर सेक्टर-12 तक की दुकानों का आवंटन चरणबद्ध ढंग से किया जाएगा. इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक निगरानी भी रखी जाएगी, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे.
सिंटर प्लांट में नई तकनीक से बढ़ी निगरानी
दूसरी ओर, बीएसएल के सिंटर प्लांट में तकनीकी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. सिन्टर मशीन-1 के ब्लोअर्स की कार्यप्रणाली को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए ऑनलाइन वाइब्रेशन मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया गया है.
मैन्युअल सिस्टम की जगह ऑटोमेटिक निगरानी
पहले ब्लोअर्स के कंपन की जानकारी मैन्युअल तरीके से ली जाती थी, जिससे समय और सटीकता दोनों में चुनौती रहती थी. अब सभी बैंड-1 ब्लोअर्स पर वाइब्रेशन सेंसर लगाए गए हैं, जो लगातार डेटा प्रदान कर रहे हैं. यह डेटा कोल्ड स्क्रीन-1 के लुब्रिकेशन रूम में लगे चार्टलेस रिकॉर्डर्स पर दिखाया जा रहा है.
इंट्रानेट पर भी उपलब्ध डेटा
नई प्रणाली के जरिए ब्लोअर्स की स्थिति की लगातार निगरानी संभव हो गई है. साथ ही, आइएंडए विभाग के सहयोग से यह जानकारी संयंत्र के इंट्रानेट नेटवर्क पर भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे संबंधित विभाग कभी भी डेटा देख सकते हैं. इससे कार्यप्रणाली अधिक सुरक्षित और प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है.
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