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Kolkata Rail: कोलकाता में पूर्वी रेलवे ने भारतीय रेल के 173वें स्थापना दिवस को इस बार एक विशेष और व्यापक स्वच्छता अभियान के रूप में मनाया. वर्ष 1853 में बोरी बंदर से ठाणे तक चली पहली रेल यात्रा की ऐतिहासिक गूंज को याद करते हुए इस आयोजन को केवल औपचारिक समारोह तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे एक जन-जागरूकता और स्वच्छता मिशन के रूप में आगे बढ़ाया गया. पूरे ज़ोन में एक महीने से चल रहे स्वच्छता जागरूकता अभियान के अंतिम चरण के रूप में 16 अप्रैल को विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें कोच और रेलवे ट्रैक की सफाई पर विशेष जोर दिया गया. इस पहल का उद्देश्य यह संदेश देना रहा कि भारतीय रेल की गौरवशाली विरासत का वास्तविक सम्मान तभी संभव है जब यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ यात्रा अनुभव प्रदान किया जाए.
विरासत और जिम्मेदारी का अनोखा संगम
इस अवसर पर पूर्वी रेलवे ने अपनी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक जिम्मेदारियों से जोड़ते हुए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 173 वर्षों की यह यात्रा केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य के लिए जिम्मेदारी का भी प्रतीक है. इसी सोच के तहत स्थापना दिवस को स्वच्छता अभियान के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया, ताकि रेलवे परिसरों, प्लेटफॉर्मों और ट्रेनों में स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके. यह पहल भारतीय रेलवे की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है जिसमें यात्रियों के अनुभव को लगातार बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है.
महाप्रबंधक ने हावड़ा स्टेशन पर किया निरीक्षण
पूर्वी रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देवुस्कर ने इस अभियान के दौरान हावड़ा स्टेशन का दौरा किया और वहां की स्वच्छता व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया. उन्होंने स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में यात्रियों से सीधे संवाद किया और उन्हें स्वच्छता बनाए रखने के महत्व के बारे में जागरूक किया. उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे कूड़ेदानों का उपयोग करें और रेलवे परिसर या पटरियों पर कचरा न फेंकें. इसके साथ ही उन्होंने ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS) की भूमिका को भी समझाया, जो ट्रेनों में यात्रियों की सीटों से कचरा एकत्र करने के लिए नियुक्त रहते हैं. महाप्रबंधक ने यह भी बताया कि शौचालयों का उपयोग करने के बाद फ्लश करना आवश्यक है और बायो-टॉयलेट में किसी भी प्रकार का कचरा न डाला जाए, ताकि सिस्टम सुचारू रूप से कार्य करता रहे.
पूरे ज़ोन में व्यापक जागरूकता अभियान
इस अभियान को केवल हावड़ा स्टेशन तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे पूरे पूर्वी रेलवे नेटवर्क में लागू किया गया. महाप्रबंधक के नेतृत्व में सभी प्रमुख विभागाध्यक्ष, मंडल रेल प्रबंधक, अपर मंडल रेल प्रबंधक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई. सियालदह, हावड़ा, मालदा और आसनसोल जैसे प्रमुख मंडलों में अधिकारियों ने स्वयं यात्रियों से संवाद कर उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक किया. इस दौरान रेलवे सुरक्षा बल, सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की टीमों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने स्टेशनों, प्लेटफॉर्मों और ट्रेन कोचों में सफाई अभियान चलाकर यात्रियों को स्वच्छता संदेश दिया.
यात्रियों की भागीदारी पर विशेष जोर
रेलवे अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि स्वच्छता केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है. इसके लिए यात्रियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है. उन्होंने कहा कि रेलवे को केवल एक परिवहन प्रणाली नहीं, बल्कि एक साझा सार्वजनिक स्थान के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसकी स्वच्छता सभी की जिम्मेदारी है. यात्रियों से अपील की गई कि वे स्वच्छता नियमों का पालन करें और कचरा प्रबंधन में सहयोग करें, ताकि रेलवे परिसर स्वच्छ और व्यवस्थित बना रहे.
निष्कर्ष की ओर बढ़ता अभियान
इस पूरे अभियान का उद्देश्य केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक बदलाव की शुरुआत करना है. पूर्वी रेलवे ने यह स्पष्ट किया कि स्वच्छता को एक आदत और संस्कृति के रूप में अपनाना होगा. 173वें स्थापना दिवस का यह आयोजन इस बात का प्रतीक बन गया कि रेलवे अपनी गौरवशाली विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ भविष्य के लिए एक स्वच्छ और बेहतर प्रणाली बनाने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
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