Japan Earthquake : जापान में एक बार फिर धरती की हलचल ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. बुधवार को देश के पूर्वी हिस्से में नोडा के समीप समुद्री इलाके में तेज़ भूकंपीय गतिविधि दर्ज की गई. इस झटके की तीव्रता 6 आंकी गई है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक संस्थान के अनुसार, भूकंप का उद्गम स्थल सतह से करीब 19.3 किलोमीटर नीचे था.
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब जापान हाल के हफ्तों में आए एक और बड़े भूकंप के प्रभावों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था. कुछ सप्ताह पहले आए 7.5 तीव्रता के झटके में दर्जनों लोग घायल हुए थे, जबकि लगभग 90 हजार निवासियों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया था.
इससे पहले 8 दिसंबर को भी जापान के तटीय क्षेत्र के पास समुद्र के भीतर भूकंप महसूस किया गया था. उस दौरान जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने आशंका जताई थी कि उत्तर-पूर्वी तट की ओर लगभग तीन मीटर ऊंची समुद्री लहरें बढ़ सकती हैं, जिसके बाद तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया गया था.
भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत सक्रिय क्षेत्र
जापान की भौगोलिक स्थिति उसे प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील बनाती है. यहां भूकंप आना असामान्य नहीं है और औसतन हर कुछ मिनटों में किसी न किसी हिस्से में धरती के कंपन दर्ज किए जाते हैं.
प्रशांत महासागर के चारों ओर फैले ज्वालामुखीय और टेक्टोनिक प्लेटों के सक्रिय घेराव, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है, का हिस्सा होने के कारण जापान में दुनिया के सबसे शक्तिशाली भूकंपों का बड़ा हिस्सा आता है. वैश्विक स्तर पर 6.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले लगभग पांच में से एक भूकंप जापान क्षेत्र में दर्ज होता है.
2011 की आपदा, जो इतिहास में दर्ज है
जापान के लिए 11 मार्च 2011 की तारीख आज भी एक भयावह स्मृति है. उस दिन उत्तर-पूर्वी इलाके में सेंडाई शहर के पास समुद्र के नीचे 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसे देश के इतिहास का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है.
इस भूकंप के बाद उठी विनाशकारी सुनामी लहरों ने प्रशांत तट के बड़े हिस्से को पूरी तरह तबाह कर दिया था. इस आपदा में करीब 20 हजार लोगों की जान चली गई थी और देश को अभूतपूर्व मानवीय व आर्थिक क्षति उठानी पड़ी थी.
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