Pakistan Afghanistan War : पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा तनाव अब गंभीर सैन्य टकराव का रूप लेता दिख रहा है. डूरंड लाइन के विभिन्न सेक्टरों में दोनों ओर से गोलाबारी और जवाबी कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं. हालात ऐसे बन गए हैं कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं और मंत्रियों की बयानबाजी भी तेज हो गई है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
कैसे शुरू हुआ ताजा विवाद?
अफगान तालिबान प्रशासन का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से कथित सीमा उल्लंघन और हवाई हमलों के बाद उसने जवाबी सैन्य कार्रवाई की. काबुल के अनुसार यह ऑपरेशन रमजान की 9वीं तारीख, 26 फरवरी की रात लगभग 8 बजे शुरू हुआ.
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पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसकी कार्रवाई आतंकवाद-रोधी अभियान का हिस्सा है और यह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम है.
तालिबान का पक्ष: भारी नुकसान का दावा
तालिबान के प्रवक्ता Zabihullah Mujahid ने कहा कि अफगान बलों ने सीमा पर संगठित और समन्वित कार्रवाई की. अफगान प्रशासन के मुताबिक:
- 19 पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर कब्जा किया गया.
- 55 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा.
- खोस्त प्रांत के अंजार सर क्षेत्र में एक बड़े मुख्यालय को निशाना बनाया गया.
- कई हथियार और सैन्य उपकरण जब्त किए गए.
- 8 अफगान लड़ाके मारे गए और 11 घायल हुए.
तालिबान का कहना है कि यह कार्रवाई अफगान संप्रभुता की रक्षा के लिए की गई.
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: अलग तस्वीर
पाकिस्तान ने तालिबान के दावों को “भ्रामक” बताया है. सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के अनुसार:
- पाकिस्तान के केवल 2 सैनिक हताहत हुए.
- जवाबी कार्रवाई में 133 तालिबानी लड़ाके मारे गए.
- 200 से अधिक घायल हुए.
- 27 चौकियों को नष्ट किया गया और 9 पर कब्जा किया गया.
गृह मंत्री Mohsin Naqvi ने कहा कि सेना ने “मुंहतोड़ जवाब” दिया है और देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा.
रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए स्थिति को “खुले युद्ध” जैसी करार दिया और कहा कि अब धैर्य की सीमा समाप्त हो चुकी है.
‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ क्या है?
पाकिस्तान ने जिस सैन्य अभियान की घोषणा की है, उसे ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ नाम दिया गया है. पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन उन ठिकानों के खिलाफ है जहां से पाकिस्तान के खिलाफ उग्रवादी गतिविधियां संचालित की जाती हैं.
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चितराल, खैबर, मोहमंद, कुर्रम और बाजौर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्रवाई की गई. काबुल और कंधार के आसपास धमाकों और गोलीबारी की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित है.
डूरंड लाइन: पुराना विवाद, नई आग
करीब 2,611 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन लंबे समय से दोनों देशों के बीच तनाव का केंद्र रही है. अफगानिस्तान इस सीमा को ऐतिहासिक रूप से मान्यता नहीं देता, जबकि पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है.
अक्टूबर 2025 में भी पाकिस्तान ने अफगान क्षेत्र के भीतर एयरस्ट्राइक की थी, जिस पर दोनों देशों के बीच तीखी प्रतिक्रिया हुई थी. हालिया घटनाक्रम उसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है.
सीमावर्ती इलाकों में हालात
तोरखम बॉर्डर और आसपास के गांवों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है. कई इलाकों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं.
लगातार हो रही गोलाबारी से लोगों में भय का माहौल है. सीमावर्ती जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.
क्षेत्रीय असर और अंतरराष्ट्रीय चिंता
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा खिंचता है तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर पड़ सकता है. दोनों देश पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में सैन्य तनाव से हालात और जटिल हो सकते हैं.
फिलहाल दोनों देशों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं और स्वतंत्र पुष्टि का अभाव है. कूटनीतिक पहल और संवाद की संभावना पर भी नजर बनी हुई है.
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