Tejashwi Yadav : बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पहली बार खुलकर सामने आए हैं और उन्होंने हार को लेकर बड़ा दावा किया है. यूरोप दौरे के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से बातचीत में तेजस्वी ने पूरे चुनाव को “फिक्स” बताते हुए कहा कि नतीजों ने लोकतंत्र की बुनियाद हिला दी है. शनिवार को उन्होंने यह बातचीत वाला वीडियो सार्वजनिक किया, जिसके बाद राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है.
चर्चा लगभग 45 मिनट चली, जिसमें तेजस्वी ने कहा कि बिहार में लोकतंत्र खतरे में है और इस विषय पर राष्ट्रव्यापी बहस जरूरी है. उनका आरोप है कि राज्य के मतदाताओं ने बदलाव का निर्णय ले लिया था, लेकिन “मशीनरी ने जनादेश को दबा दिया.”
सीटों में भारी गिरावट पर सवाल
बिहार की समस्त जनता इस बार बिहार में बदलाव चाहती थी!
— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) December 6, 2025
बिहार में एक नई युवा ऊर्जा वाली सरकार चाहती थी!
पर भाजपाई तंत्र ने जन आकांक्षाओं को कुचल दिया और जबरदस्ती जनादेश को दबाकर चुनाव आयोग की मदद से 20 साल से चली आ रही अहंकारी और निरंकुश BJP नीतीश सरकार को फिर से बिहार की सत्ता में… pic.twitter.com/lolXxqf3pp
तेजस्वी ने कहा कि आज तक कोई यह समझ नहीं पा रहा कि महागठबंधन 75 से सीधे 25 सीटों पर कैसे आ गया. उनके अनुसार, वोट प्रतिशत स्पष्ट रूप से बढ़ा था और बिहार की जनता परिवर्तन के पक्ष में थी, लेकिन नतीजे इसके ठीक उलट घोषित किए गए. तेजस्वी का सीधा आरोप है — “यह चुनाव जनता की जीत नहीं, मशीनरी की जीत है.”
पोस्टल बैलेट की गिनती में 143 सीटों पर महागठबंधन आगे चल रहा था
तेजस्वी ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया. उन्होंने दावा किया कि पोस्टल बैलेट की गिनती में 143 सीटों पर महागठबंधन आगे चल रहा था, लेकिन ईवीएम परिणाम घोषित होने के बाद तस्वीर बिल्कुल बदल गई. तेजस्वी के शब्दों में — “ईवीएम में अदृश्य शक्तियां काम कर रही थीं, जो बदलाव होने नहीं देना चाहती थीं.”
साधन और संसाधन के इस्तेमाल का आरोप
तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि मतदान से 10 दिन पहले करीब 40 हजार करोड़ रुपये “रिश्वत की तरह” बांटे गए. उनका कहना है कि चुनाव जीतने के लिए हर संभव साधन और संसाधन का इस्तेमाल किया गया. तेजस्वी ने दोहराया कि पेंशन बढ़ाने और माई-बहिन मान जैसी योजनाएं महागठबंधन की थीं, लेकिन सत्ता पक्ष ने संसाधनों के दुरुपयोग से चुनावी माहौल पलट दिया.
सीसीटीवी फुटेज पर उठाया सवाल
तेजस्वी ने चुनाव आयोग की भी आलोचना की और पूछा कि सीसीटीवी फुटेज को केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रखने का नियम क्यों बनाया गया है. उनके अनुसार यदि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तो फुटेज को एक वर्ष या उससे अधिक तक सुरक्षित रखने में क्या समस्या है.
तेजस्वी यादव के इन बयानों के बाद बिहार की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है. विपक्ष इन्हें “लोकतंत्र की आवाज दबाने का प्रयास” बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तेजस्वी के आरोप राजनीतिक निराशा से भरे हुए हैं और उनके पक्ष में कोई ठोस प्रमाण नहीं है.
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