Dhanbad News :झारखंड के धनबाद जिले में पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. राजगंज थाना क्षेत्र से जुड़ी इस घटना में सड़क दुर्घटना में घायल एक व्यक्ति की बाइक, जिसे पुलिस ने कार्रवाई के तहत जब्त कर थाना परिसर में रखा था, अचानक गायब हो गई. लंबे इलाज के बाद जब पीड़ित व्यक्ति अपनी बाइक लेने थाने पहुंचा, तो उसे पता चला कि वाहन वहां मौजूद ही नहीं है. इस घटना ने न केवल पुलिस की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं, बल्कि आम लोगों के बीच भी असुरक्षा की भावना को बढ़ा दिया है.
शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीण एसपी के पास
मामले में पीड़ित की पहचान बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के विराजपुर मंझीलाडीह निवासी मटन प्रसाद महतो के रूप में हुई है, जो डीजीएमएस में निजी सहायक के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि थाना में मौजूद पुलिसकर्मी बाइक के गायब होने को लेकर स्पष्ट जानकारी देने से बचते रहे. इतना ही नहीं, उन पर दूसरी बाइक लेने का दबाव भी बनाया गया.
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पूरे मामले से आहत होकर उन्होंने गुरुवार को ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी को लिखित आवेदन सौंपा और राजगंज थाना के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. आवेदन में उन्होंने साफ कहा कि जब बाइक पुलिस की निगरानी में थी, तो उसके गायब होने की जिम्मेदारी भी पुलिस की ही बनती है.
दुर्घटना के बाद जब्त हुई थी बाइक
पीड़ित ने बताया कि 21 जुलाई 2025 को वह अपने कार्यालय का काम समाप्त कर अपनी बाइक से घर लौट रहे थे. इसी दौरान खरनी गोड़ के पास एक ट्रैक्टर ने लापरवाहीपूर्वक टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसे में उनके हाथ और पैर को गंभीर नुकसान पहुंचा. घटना की सूचना मिलते ही राजगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उनकी बाइक के साथ-साथ दुर्घटना में शामिल ट्रैक्टर को भी अपने कब्जे में लेकर थाना ले आई. इस मामले में राजगंज थाना कांड संख्या 71/2025 उनके भतीजे मिथुन कुमार साव के लिखित बयान के आधार पर दर्ज किया गया.
इलाज के बाद बाइक मांगने पर हुआ खुलासा
घटना के बाद मटन प्रसाद महतो का इलाज धनबाद से लेकर कोलकाता के विभिन्न अस्पतालों में चला. स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्होंने अपने भतीजे को थाना भेजकर जब्त बाइक वापस लाने को कहा. लेकिन जब उनके भतीजे ने थाना पहुंचकर बाइक के बारे में जानकारी मांगी, तो पुलिस ने पहले तो वाहन के वहां होने से ही इनकार कर दिया. बाद में जब लगातार दबाव बनाया गया, तो पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर दूसरी बाइक लेने का सुझाव दिया. हालांकि पीड़ित ने साफ कर दिया कि वह किसी दूसरी बाइक को स्वीकार नहीं करेंगे और अपनी ही बाइक वापस चाहते हैं.
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है. लोगों का कहना है कि यदि थाना परिसर में जब्त वाहन भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता अपने सामान की सुरक्षा को लेकर कैसे भरोसा करे. वहीं, पीड़ित ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं.
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