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West Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का लंबा और बेहद तीखा चुनावी चरण अब समाप्त हो गया है. करीब 46 दिनों तक चले इस सियासी संघर्ष का अंत रिकॉर्ड स्तर की वोटिंग के साथ हुआ, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है. अब सभी दलों और जनता की निगाहें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं. यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं माना जा रहा, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 वर्षों से कायम राजनीतिक दबदबे और भाजपा के अधूरे वैचारिक लक्ष्य के बीच सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा है.
रिकॉर्ड मतदान ने तोड़े पुराने आंकड़े
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस बार राज्य में मतदान ने सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. दो चरणों में संपन्न हुए चुनाव में कुल 92.47 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई. पहले चरण में 93.19 प्रतिशत और दूसरे चरण में 91.66 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. यह आंकड़ा अब तक के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक बताया जा रहा है.
2011 का भी रिकॉर्ड पीछे छूटा
इससे पहले वर्ष 2011 में राज्य में 84.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जब ममता बनर्जी ने 34 वर्षों से सत्ता में रही वामपंथी सरकार को हटाया था. इस बार का मतदान उस रिकॉर्ड से भी काफी आगे निकल गया है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि इतनी बड़ी भागीदारी का फायदा किस राजनीतिक दल को मिलता है.
ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती
लगातार तीन बार सत्ता में रहने के बाद ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है. उनके लिए यह राजनीतिक रूप से निर्णायक क्षण है. अगर वह चौथी बार सरकार बनाने में सफल रहती हैं, तो राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की राजनीति में उनकी भूमिका और मजबूत हो सकती है, खासकर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले. हालांकि इस बार उन्हें सत्ता विरोधी माहौल, भ्रष्टाचार के आरोप और भर्ती घोटालों जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ा है. टीएमसी को भरोसा है कि उसकी योजनाएं, जैसे लक्ष्मी भंडार, मतदाताओं को अपने पक्ष में बनाए रखेंगी.
भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई
भाजपा इस चुनाव को अपने लिए बेहद अहम मान रही है. पार्टी ने बंगाल में अपने विस्तार को लगातार बढ़ाया है. वर्ष 2011 में जहां उसका वोट शेयर महज 4 प्रतिशत था, वहीं 2021 में वह 77 सीटों तक पहुंच चुकी थी. इस बार भाजपा ने भ्रष्टाचार और मतदाता सूची में संशोधन (SIR) को बड़ा मुद्दा बनाया. पार्टी का दावा है कि यह फर्जी नाम हटाने की प्रक्रिया है, जबकि टीएमसी ने इसे गरीबों के खिलाफ साजिश बताया और आरोप लगाया कि लाखों नाम सूची से हटाए गए हैं.
मतगणना के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
मतदान प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब पूरी तैयारी मतगणना को लेकर की जा रही है. इस बार काउंटिंग सेंटर्स पर सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम किए गए हैं. QR कोड आधारित फोटो पहचान पत्र को अनिवार्य किया गया है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति प्रवेश न कर सके. इसके अलावा तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. 4 मई को जब ईवीएम खुलेंगी, तब यह साफ हो जाएगा कि राज्य में ममता बनर्जी का दबदबा कायम रहता है या भाजपा पहली बार सत्ता तक पहुंचने में सफल होती है.
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