Ram Mandir Donation: राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी और हेरफेर को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को लेकर अयोध्या की अदालत का रुख करेंगे. उनका कहना है कि राम मंदिर के लिए दी गई उनकी दान राशि का गलत इस्तेमाल और गबन हुआ है, इसलिए वे कोर्ट से अपनी राशि वापस दिलाने की मांग करेंगे. कांग्रेस नेता के अनुसार, मंदिर निर्माण के लिए दो बार धन जुटाया गया था.
पहली बार लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के समय चंदा लिया गया था, जिसमें उन्होंने भी सहयोग किया था, मगर उस पैसे का कोई सार्वजनिक ब्यौरा आज तक सामने नहीं आया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जब वीएचपी ने दोबारा अभियान शुरू किया, तब उन्होंने वीएचपी के बजाय सीधे राम मंदिर ट्रस्ट को 1.11 लाख रुपये की राशि भेजी और उसकी पक्की रसीद भी ली.
VIDEO | Bhopal, Madhya Pradesh: On Ram temple donation row, Congress leader Digvijaya Singh says, "There were two donation drives for the construction of the Ram Temple. I donated during LK Advani's Rath Yatra because I have faith in Lord Ram and in the temple. No account has… pic.twitter.com/Vk4YacOq4i
— Press Trust of India (@PTI_News) July 3, 2026
Ram Mandir Donation: शिवराज सिंह चौहान से अधिक दिया था दान
दिग्विजय सिंह ने यह भी बताया कि उस समय के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक लाख रुपये का सहयोग दिया था, जिससे अधिक राशि देने की इच्छा के कारण उन्होंने 1.11 लाख रुपये दान किए थे. उन्होंने शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस राशि को ट्रस्ट में जमा करवाने की बात कही थी, लेकिन जब वह पत्र वापस आ गया तो उन्होंने खुद यह पैसा जमा कराया.
चंपत राय और बैंक कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप
उन्होंने ट्रस्ट के मुख्य पदाधिकारियों और चंपत राय पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि बाहरी लोगों को कम पैसों पर काम पर रखा गया और रोज आने वाले चंदे में से 10 से 20 फीसदी रकम कथित रूप से गायब की जाती रही. इस पूरे खेल में बैंक कर्मियों की मिलीभगत होने की आशंका जताते हुए उन्होंने इसे राम भक्तों की आस्था के साथ बहुत बड़ा छल करार दिया.
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दान वापस लेकर दूसरे ट्रस्ट को सौंपने का एलान
कांग्रेस नेता ने घोषणा की कि वे कोर्ट के जरिए अपना दान वापस मांगेंगे ताकि उस पैसे को शंकराचार्य मठ या रामालय ट्रस्ट जैसे किसी अन्य धार्मिक ट्रस्ट को सौंप सकें. पुलिस की कार्यप्रणाली पर अविश्वास जताते हुए उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह बीजेपी के दबाव में काम करती है.
महाकाल मंदिर की जमीन को लेकर उठाए सवाल
राम मंदिर के साथ ही उन्होंने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्थाओं पर भी उंगली उठाई. उनका आरोप है कि वीएचपी और आरएसएस से जुड़े संगठनों ने जैसे राम मंदिर के चंदे में धांधली की, वैसा ही कुछ महाकाल मंदिर में भी हुआ है. उन्होंने कहा कि सुंदरलाल पटवा की सरकार ने मंदिर के पास की एक मूल्यवान भूमि आरएसएस के ट्रस्ट को दी थी, जिसका उनकी सरकार के समय पुरजोर विरोध किया गया था और इसके पूरे दस्तावेज मौजूद हैं. वहां पहले आरएसएस का गेस्ट हाउस बना, फिर जिस जगह पर सरस्वती शिशु मंदिर चलता था, उसे गिराकर अब 100 कमरों का होटल तैयार किया जा रहा है, जहां रुकने वाले लोगों को वीआईपी दर्शन का लाभ मिलता है. उन्होंने इस पूरे मामले की जांच की मांग भी उठाई है.
उज्जैन से अयोध्या तक गैर-राजनीतिक पदयात्रा
दिग्विजय सिंह ने आगामी 2 अक्टूबर से उज्जैन से लेकर अयोध्या तक एक पदयात्रा शुरू करने का एलान किया है. उन्होंने साफ किया कि यह पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक यात्रा होगी, जिसमें किसी भी दल के झंडे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. राम में विश्वास रखने वाला और मंदिर के लिए दान देने वाला कोई भी नागरिक इस यात्रा का हिस्सा बन सकता.
कोर्ट में केस दर्ज कराने की तैयारी
इससे पहले भोपाल में महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित सद्बुद्धि यज्ञ और प्रदर्शन के दौरान भी दिग्विजय सिंह ने यह मुद्दा उठाया था. उन्होंने सवाल किया कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से इस्तीफे तो लिए गए, पर उन पर एफआईआर क्यों नहीं हुई. उन्होंने बताया कि दिल्ली के एक बड़े क्रिमिनल लॉयर के सुझाव पर वे 5 या 6 जुलाई को अपने वकील से चर्चा करेंगे और उसके बाद अयोध्या कोर्ट में केस दर्ज कराएंगे. उन्होंने कहा कि आरोप सही पाए जाने पर दोषी ट्रस्टियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.
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