Raunak Kedia Murder: भागलपुर के दवा कारोबारी पुत्र रौनक केडिया हत्याकांड में करीब दो साल बाद अदालत ने दोषियों को सजा सुना दी है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश 19 खुशबू श्रीवास्तव की अदालत ने मुख्य साजिशकर्ता अमित कुमार सिंह उर्फ अमित मंडल और आलोक राज उर्फ दिलखुश को आजीवन कारावास की सजा दी है. वहीं हत्या में इस्तेमाल हथियार छिपाने वाले अजीत कुमार उर्फ अम्का को 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है.
8 लाख के लेन-देन ने बना दिया हत्या का प्लान
रौनक केडिया की हत्या के पीछे 8 लाख रुपये के लेन-देन का विवाद सामने आया था. पुलिस जांच के मुताबिक अमित कुमार सिंह का रौनक के पिता के साथ पैसों को लेकर विवाद था.
इसी विवाद के बाद अमित ने रौनक की हत्या की साजिश रची और करीब 2 लाख रुपये में शूटर को हायर किया. अदालत में पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और अपर लोक अभियोजक जयप्रकाश मंडल की दलीलों के आधार पर दोष साबित होने के बाद अदालत ने सजा सुनाई.
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Raunak Kedia Murder: दुकान बंद कर घर लौट रहा था रौनक, रास्ते में मारी गोली
7 अगस्त 2024 की रात रौनक अपनी दुकान से घर के लिए निकला था. करीब 10 बजे एमपी द्विवेदी रोड स्थित आत्माराम मेडिकल बंद करने के बाद वह काजवलीचक स्थित अपने घर लौट रहा था.
विनोद कुमार जैन के घर के पास अपराधियों ने उसे पीछे से गोली मार दी. हमले के बाद वह सड़क पर खून से लथपथ पड़ा रहा.
बेटे को सड़क पर देखकर पिता के पैरों तले खिसक गई जमीन
रौनक के पिता बलराम केडिया कुछ देर बाद उसी रास्ते से गुजर रहे थे. सड़क पर एक युवक को घायल अवस्था में देखकर उन्होंने मोबाइल की टॉर्च जलायी.
रोशनी पड़ते ही उन्हें पता चला कि सड़क पर पड़ा युवक कोई और नहीं, उनका अपना बेटा रौनक था. उसे इलाज के लिए जीरोमाइल स्थित अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
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इस घटना के बाद भागलपुर में आक्रोश फैल गया था और हत्याकांड के विरोध में आंदोलन भी हुए थे.
10 दिन में पुलिस ने खोल दी हत्या की पूरी कड़ी
हत्याकांड के बाद पुलिस ने जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ाया. तत्कालीन एसएसपी आनंद कुमार के नेतृत्व में हुई जांच में 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जबकि 400 से ज्यादा मोबाइल नंबरों के डंप डेटा का विश्लेषण किया गया.
बिहार के साथ झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी छापेमारी की गयी. पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के बाद अजीत कुमार की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद किया. यही हथियार बाद में मुकदमे में महत्वपूर्ण साक्ष्य बना.
अदालत ने तीनों की भूमिका के हिसाब से सुनाई सजा
अदालत के फैसले में मुख्य साजिशकर्ता और हत्या के दोषियों को सबसे कड़ी सजा दी गयी है. वहीं वारदात में इस्तेमाल हथियार छिपाने वाले अभियुक्त को अलग सजा मिली है.
| दोषी | भूमिका | सजा |
|---|---|---|
| अमित कुमार सिंह उर्फ अमित मंडल | मुख्य साजिशकर्ता और हत्या का दोषी | आजीवन कारावास, आर्म्स एक्ट में भी सजा व जुर्माना |
| आलोक राज उर्फ दिलखुश | हत्या का दोषी | आजीवन कारावास, आर्म्स एक्ट में भी सजा व जुर्माना |
| अजीत कुमार उर्फ अम्का | हत्या में इस्तेमाल हथियार छिपाने का दोषी | 7 वर्ष कठोर कारावास और 5 वर्ष की अतिरिक्त सजा व जुर्माना |
जुर्माना नहीं देने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा.
दो साल बाद मिला रौनक के परिवार को अदालत का फैसला
7 अगस्त 2024 की रात हुई हत्या के बाद शुरू हुई पुलिस जांच, गिरफ्तारी और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया अब अदालत के फैसले तक पहुंच गयी है. महज 8 लाख रुपये के विवाद से शुरू हुई साजिश में 22 वर्षीय रौनक की जान चली गयी थी. अब अदालत ने मुख्य साजिशकर्ता समेत दो दोषियों को उम्रकैद और तीसरे दोषी को 7 साल की सजा सुनाकर मामले में फैसला दिया है.
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