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नवगछिया में शंकरपुर का 100 साल पुराना चैती दुर्गा मंदिर गंगा में समाया, कटाव ने मिटाई धार्मिक विरासत

Ganga Erosion: नवगछिया के शंकरपुर में गंगा के भीषण कटाव ने करीब 100 साल पुराने चैती दुर्गा मंदिर का अस्तित्व मिटा दिया है. मंगलवार को ग्रामीणों की आंखों के सामने मंदिर का पूरा हिस्सा नदी की तेज धारा में समा गया. अब कटाव की बढ़ती रफ्तार से आसपास के घरों, खेतों और दूसरी महत्वपूर्ण जगहों पर भी खतरा मंडरा रहा है.

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Ganga Erosion: नवगछिया के शंकरपुर में गंगा के भीषण कटाव ने करीब 100 साल पुराने चैती दुर्गा मंदिर का अस्तित्व मिटा दिया है. मंगलवार को ग्रामीणों की आंखों के सामने मंदिर का पूरा हिस्सा नदी की तेज धारा में समा गया. अब कटाव की बढ़ती रफ्तार से आसपास के घरों, खेतों और दूसरी महत्वपूर्ण जगहों पर भी खतरा मंडरा रहा है.

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Bhagalpur Ganga Erosion: नवगछिया के शंकरपुर में गंगा का कटाव अब सिर्फ जमीन और घरों के लिए खतरा नहीं रह गया है. मंगलवार को करीब 100 साल पुराना चैती दुर्गा मंदिर भी नदी की तेज धारा में विलीन हो गया. वर्षों से ग्रामीणों की आस्था और धार्मिक आयोजनों का केंद्र रहे मंदिर को अपनी आंखों के सामने गंगा में समाता देखकर लोग भावुक हो उठे.

देखते ही देखते गंगा में समाया मंदिर

शंकरपुर और राघोपुर क्षेत्र में कई दिनों से गंगा किनारे कटाव तेजी से हो रहा था. नदी की धार लगातार जमीन काटते हुए मंदिर के करीब पहुंच रही थी. मंगलवार को स्थिति अचानक गंभीर हो गयी और मंदिर का बड़ा हिस्सा कटाव की चपेट में आ गया.

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कुछ ही देर में मंदिर का बाकी हिस्सा भी गंगा की तेज धारा में चला गया. ग्रामीण देखते रह गये और वर्षों पुरानी धार्मिक धरोहर हमेशा के लिए नदी में समा गयी.

Bhagalpur Ganga Erosion: चैती नवरात्र में बदल जाता था पूरा माहौल

चैती दुर्गा मंदिर से आसपास के कई गांवों की धार्मिक आस्था जुड़ी थी. ग्रामीणों के मुताबिक करीब एक सदी पुराने इस मंदिर में चैती नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते थे.

शंकरपुर, राघोपुर और आसपास के गांवों से लोग यहां पहुंचते थे. मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं था, बल्कि कई पीढ़ियों की धार्मिक यादों का हिस्सा रहा था.

कटाव अब विरासत के साथ रिहायशी इलाकों के लिए भी खतरा

मंदिर के गंगा में समाने के बाद ग्रामीणों की चिंता अब अपने घर और खेतों को लेकर बढ़ गयी है. राघोपुर क्षेत्र में गंगा का दबाव लगातार बढ़ रहा है और नदी किनारे की जमीन तेजी से कट रही है.

इससे पहले राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध का हिस्सा भी कटाव की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो चुका है. ग्रामीणों को आशंका है कि कटाव इसी रफ्तार से जारी रहा तो आने वाले दिनों में कई और घर, खेत और महत्वपूर्ण स्थल इसकी जद में आ सकते हैं.

मंदिर डूबा तो प्रशासन पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर के आसपास कटाव कई दिनों से जारी था. इसके बावजूद समय रहते पर्याप्त कटावरोधी इंतजाम नहीं किये जा सके. मंदिर के गंगा में समाने के बाद लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी है.

ग्रामीणों ने संवेदनशील इलाकों में तत्काल युद्धस्तर पर कटावरोधी काम शुरू कराने और खतरे की जद में आने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की मांग की है.

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लोगों को डर, कहीं अगली बारी घरों की न हो

मंदिर के विलीन होने के बाद शंकरपुर और राघोपुर के लोगों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा का है. ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की धारा लगातार रिहायशी इलाके की तरफ बढ़ रही है.

लोग चाहते हैं कि सिर्फ तत्काल बचाव के बजाय गंगा के कटाव को रोकने के लिए स्थायी और वैज्ञानिक योजना तैयार की जाए. उनका कहना है कि अगर अभी ठोस कदम नहीं उठाया गया तो मंदिर के बाद कई घर और खेत भी गंगा की धारा में समा सकते हैं.

एक मंदिर के साथ खत्म हुई कई पीढ़ियों की याद

ग्रामीणों के लिए चैती दुर्गा मंदिर का गंगा में विलीन होना केवल एक इमारत का खत्म होना नहीं है. इसके साथ पूजा-पाठ, चैती नवरात्र के आयोजन और कई पीढ़ियों से जुड़ी यादों का एक हिस्सा भी खत्म हो गया.

कटाव ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि अगर गंगा की धार पर समय रहते रोक नहीं लगायी गयी तो शंकरपुर और आसपास के इलाके में ऐसी कितनी और धार्मिक व सामाजिक धरोहरें बची रह पाएंगी.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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