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बिहार में बीच रास्ते खत्म हुआ एंबुलेंस का तेल, सिस्टम फेल—मरीज ने तड़पकर तोड़ा दम

Bihar Ambulance Issue : जमुई में 102 एंबुलेंस सेवा की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां ईंधन खत्म होने से बीच रास्ते में मरीज फंस गया. भीषण गर्मी के बीच इलाज न मिलने से उसने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और आपात सेवा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

Bihar Ambulance Issue : जमुई में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली घटना सामने आई है, जहां मरीज को हायर सेंटर ले जा रही 102 एंबुलेंस बीच रास्ते में ही ठप पड़ गई. महज 25 किलोमीटर चलने के बाद एंबुलेंस का ईंधन खत्म हो गया, जिससे मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल सका और उसने वाहन के भीतर ही दम तोड़ दिया. भीषण गर्मी और लू जैसे हालात ने स्थिति को और भयावह बना दिया.

सड़क किनारे खड़ी रही एंबुलेंस, दो घंटे तक तड़पता रहा मरीज

घटना सिकंदरा-शेखपुरा मार्ग पर मतासी के पास की है. झाझा प्रखंड के बाबू बांक गांव निवासी 75 वर्षीय धीरज रविदास को गंभीर हालत में पटना रेफर किया गया था. दोपहर 1:11 बजे एंबुलेंस सदर अस्पताल से रवाना हुई, लेकिन रास्ते में सिकंदरा के बाद कुछ दूरी पर ही 1:40 बजे ईंधन खत्म हो गया और एंबुलेंस सुनसान इलाके में खड़ी हो गई.

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परिजनों के अनुसार चालक ने पहले थोड़ी देर में तेल लाने की बात कही, लेकिन करीब दो घंटे तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी. इस दौरान 42-43 डिग्री तापमान के बीच मरीज की हालत बिगड़ती गई और आखिरकार शाम 3:31 बजे उसने दम तोड़ दिया.

परिजनों का आरोप: न इलाज मिला, न वैकल्पिक व्यवस्था

मृतक के पुत्र अजीत रविदास ने एंबुलेंस चालक और जेन प्लस कंपनी पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि न तो मरीज को बचाने की कोई कोशिश की गई और न ही दूसरी एंबुलेंस या अन्य व्यवस्था समय पर कराई गई. बाद में दूसरी 102 एंबुलेंस से शव को सदर अस्पताल लाया गया और फिर शव वाहन से घर भेजा गया.

उन्होंने बताया कि उनके पास पैसे मौजूद थे, जिससे रास्ते में ईंधन भरवाया जा सकता था, लेकिन चालक टालमटोल करता रहा और स्थिति को संभालने में विफल रहा. इस मामले को लेकर उन्होंने सिविल सर्जन, एसपी और डीएम से शिकायत करने और एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है.

इलाज के लिए पटना किया गया था रेफर

परिजनों के अनुसार धीरज रविदास की तबीयत दो दिन पहले बिगड़ी थी. झाझा में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सदर अस्पताल लाया गया, जहां जांच में सिर में ब्लड जमने की बात सामने आई. इसके बाद बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया था.

ईंधन खत्म होते ही बंद हो गई सभी सुविधाएं

एंबुलेंस में ईंधन खत्म होने के साथ ही उसमें लगे सभी उपकरण और सुविधाएं काम करना बंद कर गईं. एसी भी ठप हो गया, जिससे भीषण गर्मी में मरीज को राहत नहीं मिल सकी. इलाज की कोई सुविधा न होने से स्थिति और गंभीर होती चली गई.

कंपनी और प्रशासन ने दिए जांच के संकेत

जेन प्लस कंपनी के जिला क्लस्टर लीडर नीतीश कुमार ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है. उन्होंने कहा कि चालक के पास एक विशेष कंपनी का कार्ड था और उसी पेट्रोल पंप से ईंधन लेने का प्रावधान है, लेकिन वहां ईंधन उपलब्ध नहीं था. उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा.

वहीं सिविल सर्जन अशोक कुमार सिंह के अनुसार उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी, लेकिन एंबुलेंस में ईंधन खत्म होना गंभीर लापरवाही है. उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है.

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सोनी कुमारी
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