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पटना में नीट छात्रा मौत मामले पर उबाल, विधानसभा घेराव को निकले प्रदर्शनकारियों ने तोड़ी बैरिकेडिंग

पटना
पटना में नीट छात्रा मौत मामले पर उबाल.

Patna News: पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. मंगलवार को इस घटना को लेकर राजधानी की सड़कों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. AISA और AIPWA से जुड़े कार्यकर्ता बिहार सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधानसभा घेराव के लिए निकले.

गांधी मैदान से डाकबंगला तक टकराव

प्रदर्शन की शुरुआत गांधी मैदान से हुई, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और महिला कार्यकर्ता जुटे. जुलूस जैसे ही डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ा, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी. इसके बावजूद आक्रोशित प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ने लगे. गांधी मैदान इलाके में भी रोकने की कोशिश हुई, लेकिन वहां भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी.

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महिलाओं ने बुलंद किए नारे

इस विरोध मार्च में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही. उन्होंने महिलाओं और छात्राओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. प्रदर्शन के दौरान सरकार के खिलाफ तीखे नारे लगाए गए. संगठनों का कहना है कि छात्रा की मौत की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

विधानसभा सत्र में भी गूंजा मामला

नीट छात्रा की मौत का मुद्दा बिहार विधानसभा के बजट सत्र में भी लगातार उठ रहा है. विपक्षी दल सरकार और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं. इस मामले से जुड़े घटनाक्रम में पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर भी सियासत गरम है. उनका आरोप है कि छात्रा मामले को उठाने की वजह से उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ा.

घटना के बाद से राज्य के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और छात्र संगठनों ने न्याय की मांग तेज कर दी है. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का हटाने का नोटिस, 100+ सांसदों का समर्थन

लोकसभा स्पीकर
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला.(फाइल फोटो)

No-Confidence Motion : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष ने औपचारिक पहल करते हुए लोकसभा सचिवालय में नोटिस जमा कर दिया है. यह कदम पिछले कुछ दिनों से जारी तनातनी के बीच उठाया गया है. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि मंगलवार दोपहर 1:14 बजे नियम 94C के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा गया.

नियमों के मुताबिक होगी आगे की प्रक्रिया

लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने पुष्टि की कि अध्यक्ष के खिलाफ नोटिस प्राप्त हुआ है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अब इस पर स्थापित संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जाएगा. सचिवालय स्तर पर नोटिस की वैधता और समर्थन का परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद अगला कदम तय होता है.

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विवाद की पृष्ठभूमि और विपक्ष के आरोप

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष में तीखी नोकझोंक हुई थी. विपक्ष का आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया. साथ ही कुछ महिला सांसदों के साथ सदन में अनुचित स्थिति बनने के आरोप भी लगाए गए. इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर हटाने का प्रस्ताव लाने का निर्णय किया गया.

100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर

नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक सहित कई विपक्षी दलों के 100 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं. तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस से दूरी बनाई है. यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत दिया गया है. विपक्ष ने 5 फरवरी को अध्यक्ष द्वारा दिए गए उस बयान पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया था कि कुछ सदस्य प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचकर अप्रत्याशित घटना की कोशिश कर सकते थे. नोटिस में इन टिप्पणियों को अपमानजनक और निराधार बताया गया है.

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Ferrari 849 Testarossa: इंडिया में एंट्री को तैयार सुपरकार; 10 करोड़ से ज्यादा कीमत, 1000+hp पावर और 330 kmph स्पीड

Ferrari
इंडिया में एंट्री को तैयार सुपरकार.

Ferrari 849 Testarossa : इटली की लग्ज़री स्पोर्ट्स कार निर्माता Ferrari अपनी नई फ्लैगशिप सुपरकार 849 Testarossa को भारतीय बाजार में उतारने जा रही है. ग्लोबल स्तर पर पेश होने के बाद अब इसका भारत लॉन्च मार्च 2026 के लिए तय किया गया है. कंपनी ने इसकी कीमत भी साफ कर दी है, जिससे यह देश की सबसे महंगी सीरीज-प्रोडक्शन कारों में शामिल होने वाली है.

भारतीय बाजार में Ferrari 849 Testarossa की एक्स-शोरूम कीमत 10.37 करोड़ रुपये रखी गई है. यह सुपरकार परफॉर्मेंस, टेक्नोलॉजी और डिजाइन का ऐसा मेल पेश करती है, जो इसे खास बनाता है.

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हाइब्रिड पावरट्रेन में जबरदस्त ताकत

Ferrari 849 Testarossa में एडवांस प्लग-इन हाइब्रिड सिस्टम दिया गया है. इसमें ट्विन-टर्बो V8 इंजन के साथ तीन इलेक्ट्रिक मोटर्स जोड़ी गई हैं. पूरा सेटअप मिलकर लगभग 1,035hp की पावर पैदा करता है.

अपडेटेड V8 इंजन नए सिलेंडर हेड्स, टर्बोचार्जर्स और एग्जॉस्ट सेटअप के साथ आता है. अकेला पेट्रोल इंजन करीब 819hp देता है, जबकि इलेक्ट्रिक मोटर्स मिलकर 217hp का अतिरिक्त बूस्ट देती हैं.

फ्रंट एक्सल पर लगी दो मोटर्स टॉर्क वेक्टरिंग को सपोर्ट करती हैं, जिससे हाई-स्पीड पर भी कार स्थिर रहती है. तीसरी मोटर इंजन और गियरबॉक्स के बीच लगी है, जो लगातार पावर सप्लाई में मदद करती है.

7.45 kWh बैटरी पैक के सहारे यह कार लगभग 25 किमी तक केवल इलेक्ट्रिक मोड में चल सकती है. इस मोड में ड्राइव फ्रंट व्हील तक सीमित रहती है और स्पीड करीब 128 kmph तक जाती है.

2.2 सेकंड में 0-100, रफ्तार में सुपरकारों को चुनौती

परफॉर्मेंस के मामले में 849 Testarossa बेहद आक्रामक साबित होती है. यह सुपरकार महज 2.2 सेकंड में 0 से 100 kmph तक पहुंच जाती है. 200 kmph की रफ्तार पकड़ने में इसे करीब 6.3 सेकंड लगते हैं.

इसकी टॉप स्पीड 330 kmph से ज्यादा बताई जा रही है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज रोड-लीगल कारों की श्रेणी में रखती है.

Spider वर्जन वजन थोड़ा ज्यादा होने से मामूली धीमा है, लेकिन इसकी परफॉर्मेंस भी हाई-एंड सुपरकार स्तर की है. दोनों वर्जन में 8-स्पीड ड्यूल-क्लच F1 गियरबॉक्स मिलता है, जो तेज और स्मूद गियर शिफ्टिंग देता है.

रेट्रो प्रेरित लेकिन फ्यूचरिस्टिक डिजाइन

Ferrari 849 Testarossa का लुक क्लासिक रेसिंग विरासत और मॉडर्न एयरोडायनामिक्स का मिश्रण है. इसका डिजाइन 1970 के दशक की स्पोर्ट्स प्रोटोटाइप कारों से प्रेरित बताया जाता है.

कैब-फॉरवर्ड प्रोफाइल, बड़े साइड एयर-इनटेक और शार्प बॉडी लाइन्स इसे एग्रेसिव अपील देते हैं. पीछे का डबल-टेल डिजाइन Ferrari 512 S की झलक देता है. फ्रंट का हॉरिजॉन्टल ब्रिज एलिमेंट पुरानी Ferrari कारों की याद दिलाता है.

भले ही कुछ एंगल से इसमें कंपनी के दूसरे मॉडल्स की झलक दिखे, लेकिन इसकी अलग पहचान साफ नजर आती है.

इंटीरियर में क्लासिक टच और नई टेक्नोलॉजी

केबिन को मॉडर्न रखा गया है, लेकिन Ferrari की पारंपरिक पहचान भी कायम है. गियर सेलेक्टर का डिजाइन क्लासिक गेटेड मैनुअल शिफ्टर जैसा रखा गया है, जो ब्रांड की विरासत को सलाम करता है.

स्टीयरिंग पर टच कंट्रोल की जगह फिजिकल बटन दिए गए हैं ताकि ड्राइविंग के दौरान बेहतर कंट्रोल मिले. ड्राइवर और पैसेंजर के लिए अलग-अलग डिजिटल डिस्प्ले मिलते हैं, जिन पर परफॉर्मेंस डेटा दिखता है.

खरीदार अपनी पसंद के मुताबिक कंफर्ट सीट या रेसिंग सीट का विकल्प चुन सकते हैं.

Ferrari 849 Testarossa भारत में अल्ट्रा-लक्ज़री और हाई-परफॉर्मेंस कार सेगमेंट में नया बेंचमार्क सेट करती दिख रही है. इसकी कीमत भले ही आम खरीदारों की पहुंच से बाहर हो, लेकिन सुपरकार प्रेमियों के लिए यह एक ड्रीम मशीन साबित हो सकती है.

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Bengal Earthquakes: चार दिन में 39 झटकों से दहशत, सिक्किम रहा केंद्र, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

Earthquake
बंगाल में चार दिनों में 39 झटकों से दहशत.

Bengal Earthquakes: पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से और सिक्किम से सटे इलाकों में पिछले चार दिनों से बार-बार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं. शुक्रवार देर रात से मंगलवार सुबह तक कुल 39 कंपन दर्ज किए गए, जिससे लोगों में डर का माहौल है. झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3 से 4 के बीच रही, लेकिन लगातार आ रही हलचल ने चिंता बढ़ा दी है.

भूकंप का केंद्र सिक्किम क्षेत्र बताया जा रहा है, फिर भी इसका असर दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और सिलीगुड़ी सहित उत्तर बंगाल के बड़े हिस्से में महसूस हुआ. आपदा प्रबंधन एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं.

कुछ घंटों में कई झटकों से बढ़ी बेचैनी

स्थानीय लोगों के अनुसार पहला झटका शुक्रवार देर रात महसूस हुआ. इसके बाद करीब चार घंटे बारह मिनट के भीतर एक के बाद एक कई झटके आए. बताया जा रहा है कि इसी अवधि में लगभग 12 बार जमीन हिली. इसके बाद भी कंपन का सिलसिला थमा नहीं और मंगलवार सुबह तक झटके महसूस होते रहे.

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लगातार हो रही हलचल से पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग अधिक सतर्क हो गए हैं. कई परिवार रात में घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित जगहों पर जाते देखे गए.

भूगर्भ विशेषज्ञ कर रहे पैटर्न का अध्ययन

भूगर्भ विशेषज्ञों का कहना है कि कम तीव्रता वाले लेकिन लगातार आने वाले झटके किसी बड़े भूगर्भीय बदलाव का संकेत हो सकते हैं. विशेषज्ञ संदीप बनर्जी के अनुसार यह गतिविधि “सीक्वेंस क्वेक” जैसी स्थिति भी हो सकती है, जिसमें छोटे झटके किसी बड़े भूकंप से पहले दर्ज होते हैं.

टीम यह भी जांच कर रही है कि कहीं क्षेत्र में बड़े निर्माण कार्य, जलाशय परियोजनाएं, सड़क कटिंग या सुरंग निर्माण जैसी गतिविधियों का असर तो नहीं पड़ रहा. हालांकि अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है.

अलर्ट मोड पर प्रशासन, लोगों को सलाह

सिक्किम आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है. प्रशासन ने अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में खुली व सुरक्षित जगहों का रुख करें.

उत्तर बंगाल पर्यटन का बड़ा केंद्र है, ऐसे में होटल और गेस्ट हाउस संचालकों को भी सुरक्षा उपाय मजबूत रखने को कहा गया है. जानकारों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं.

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Morning Latte Coffee: सुबह की लैटे कॉफी क्यों है खास? स्वाद के साथ देती है हल्की एनर्जी

Coffee
Morning Latte Coffee. फोटो-सोशल मीडिया

Morning Latte Coffee: सुबह की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में लोग ऐसी ड्रिंक चाहते हैं जो स्वादिष्ट भी हो और शरीर को हल्की ऊर्जा भी दे. इसी वजह से लैटे कॉफी अब सिर्फ कैफे तक सीमित नहीं रही, बल्कि घरों की मॉर्निंग रूटीन का हिस्सा बनती जा रही है. दूध और कॉफी के संतुलित मेल से तैयार यह पेय तेज नहीं बल्कि स्मूद फ्लेवर देता है, जो दिन की शुरुआत को आरामदायक बनाता है.

लैटे कॉफी उन लोगों के बीच ज्यादा लोकप्रिय है जिन्हें बहुत कड़क कॉफी पसंद नहीं होती. इसका क्रीमी टेक्सचर और हल्की कॉफी स्ट्रेंथ इसे ब्रेकफास्ट के साथ अच्छा विकल्प बनाती है. कई न्यूट्रिशन एक्सपर्ट भी मानते हैं कि सीमित मात्रा में कॉफी सुबह की सुस्ती कम करने में मदद कर सकती है.

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सुबह के समय लैटे कॉफी पीने के फायदे

लैटे कॉफी में दूध की मात्रा अधिक होने से यह ब्लैक कॉफी की तुलना में सौम्य होती है. इससे शरीर को कैफीन तो मिलता है, लेकिन उसका असर बहुत तेज नहीं पड़ता.

इसके कुछ प्रमुख फायदे:

  • शरीर को जेंटल एनर्जी बूस्ट
  • दिमाग को अलर्ट रखने में मदद
  • दूध से कैल्शियम और प्रोटीन की पूर्ति
  • खाली पेट ज्यादा भारी महसूस नहीं होती
  • तनाव भरी सुबह में रिलैक्स फील
  • कैफे जैसा स्वाद अब घर पर

महंगी कॉफी मशीन के बिना भी घर पर लैटे बनाई जा सकती है. सही अनुपात और तरीका अपनाने पर घर की लैटे भी कैफे जैसी क्रीमी बनती है.

लैटे कॉफी बनाने के लिए जरूरी चीजें

  • 1 कप फुल क्रीम दूध
  • 1 टीस्पून इंस्टेंट कॉफी
  • चीनी स्वादानुसार
  • 2 टेबलस्पून गरम पानी

बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि

सबसे पहले कप में कॉफी और चीनी डालें. उसमें गरम पानी मिलाकर अच्छी तरह घोल लें ताकि स्मूद बेस तैयार हो जाए.

दूसरी ओर दूध को उबालें और उसे थोड़ा फेंट लें ताकि झाग बन सके. अब इस गरम और झागदार दूध को धीरे-धीरे कॉफी वाले कप में डालें. ऊपर से फोम डालकर सर्व करें. चाहें तो कोको पाउडर या कॉफी पाउडर हल्का छिड़क सकते हैं.

इस आसान तरीके से बनी लैटे कॉफी सुबह को ज्यादा सुकूनभरी और एक्टिव बना सकती है.

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Border 2 : 18वें दिन भी ‘बॉर्डर 2’ की दहाड़, 300 करोड़ पार; बॉक्स ऑफिस पर जलवा कायम

Border 2
18वें दिन भी 'बॉर्डर 2' की दहाड़, 300 करोड़ पार.

Border 2 Box Office collection day 18: सनी देओल की वॉर ड्रामा ‘बॉर्डर 2’ सिनेमाघरों में रिलीज के बाद से लगातार दर्शकों का ध्यान खींच रही है. 23 जनवरी 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने कमाई के मोर्चे पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है. तीसरे हफ्ते में पहुंचने के बावजूद फिल्म की कमाई की रफ्तार कायम है और यह भारत में 300 करोड़ क्लब से आगे निकल चुकी है.

तीसरे हफ्ते में भी मजबूत पकड़

बॉक्स ऑफिस ट्रैकर सैकनिल्क के आंकड़ों के अनुसार, रिलीज के 18वें दिन फिल्म ने करीब 1.85 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया. इसके साथ ही भारत में फिल्म की कुल कमाई लगभग 311.60 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. शुरुआती दिनों से ही फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था. पहले वीकेंड में ही इसने 224 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर लिया था.

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रिपब्लिक डे के आसपास आई छुट्टियों का फायदा भी फिल्म को मिला, जिससे कलेक्शन में उछाल आया. दूसरे वीकेंड तक यह 300 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी थी. हालांकि अब भी यह ‘बजरंगी भाईजान’ (320 करोड़) और ‘वॉर’ (318 करोड़) के लाइफटाइम कलेक्शन से पीछे चल रही है, लेकिन ट्रेड पंडित मानते हैं कि इसकी रन अभी खत्म नहीं हुई है.

विदेशों में भी कमाई का सिलसिला

सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, ओवरसीज में भी ‘बॉर्डर 2’ को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन करीब 458 करोड़ रुपये के आसपास बताया जा रहा है. विदेशों में भारतीय दर्शकों के बीच देशभक्ति विषय वाली फिल्मों की लोकप्रियता का फायदा इस फिल्म को मिला है.

1971 युद्ध की पृष्ठभूमि पर कहानी

फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है और इसकी कहानी 1971 के भारत-पाक युद्ध की पृष्ठभूमि पर बुनी गई है. बड़े पैमाने पर शूट किए गए युद्ध दृश्य और इमोशनल एंगल दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच रहे हैं. फिल्म में सनी देओल के साथ वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी, मोना सिंह और सोनम बाजवा प्रमुख भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं.

आगे मिल सकती है नई चुनौती

आने वाले हफ्ते में शाहिद कपूर की फिल्म ‘ओ रोमियो’ रिलीज होने वाली है. इस फिल्म से ‘बॉर्डर 2’ के स्क्रीन काउंट और कलेक्शन पर असर पड़ सकता है. ‘ओ रोमियो’ में शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की जोड़ी के साथ अविनाश तिवारी, नाना पाटेकर, फरीदा जलाल, दिशा पटानी और तमन्ना भाटिया भी नजर आएंगे.
ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि नई रिलीज के बावजूद ‘बॉर्डर 2’ अपनी स्थिर कमाई से लंबी रेस का खिलाड़ी साबित हो सकती है.

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असम में सियासी जमीन तलाश रहा झामुमो, आदिवासी बेल्ट पर नजर; भाजपा-कांग्रेस के बीच नई हलचल

JMM Assam
असम के तिनसुकिया में आदिवासी संगठनों की महासभा में सीएम हेमंत सोरेन.

JMM Assam Politics: झारखंड तक सीमित रहने वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा अब पूर्वोत्तर भारत में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की रणनीति पर काम कर रही है.
असम विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी आदिवासी और टी-ट्राइब समुदाय के बीच पैठ बनाने की कोशिशों में जुटी है.

झामुमो ने संकेत दिए हैं कि वह आने वाले समय में क्षेत्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करना चाहती है. इसी सोच के तहत असम को एक नए राजनीतिक मैदान के रूप में देखा जा रहा है, जहां सामाजिक समीकरण और समुदाय आधारित राजनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

आदिवासी बेल्ट में संभावनाएं तलाश रही पार्टी

पार्टी सूत्र बताते हैं कि झामुमो की नजर असम की 35 से 40 ऐसी विधानसभा सीटों पर है, जहां आदिवासी और चाय बागान से जुड़े समुदायों का प्रभाव निर्णायक माना जाता है. इन इलाकों में लंबे समय से पहचान, अधिकार और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे उठते रहे हैं.

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असम में आदिवासी आबादी बड़ी संख्या में मौजूद है. विभिन्न सामाजिक संगठनों के अनुमान के मुताबिक यह संख्या करीब 70 लाख के आसपास है. हालांकि आधिकारिक आंकड़ों में अनुसूचित जनजाति का दर्जा पाने वालों की संख्या इससे कम है. यही अंतर कई बार राजनीतिक बहस का विषय भी बनता है.

झामुमो का मानना है कि इन समुदायों के बीच भरोसा कायम कर वह एक नया जनाधार तैयार कर सकती है.

तिनसुकिया की रैली से मिला सियासी संकेत

हाल ही में तिनसुकिया जिले में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में हेमंत सोरेन की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी असम को लेकर गंभीर है. ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ असम के मंच से आदिवासी एकजुटता, राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक अधिकारों पर जोर दिया गया.

सभा में बड़ी भीड़ जुटने को झामुमो सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है. पार्टी नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रम बढ़ सकते हैं.

ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर रणनीति

असम दौरे से पहले झामुमो ने एक टीम राज्य में भेजकर जमीनी हालात का आकलन कराया. इस टीम ने स्थानीय आदिवासी संगठनों, सामाजिक समूहों और क्षेत्रीय नेताओं से बातचीत की. चर्चाओं में रोजगार, शिक्षा, जमीन के अधिकार और सामाजिक पहचान जैसे मुद्दे प्रमुख रहे.

पार्टी का फोकस फिलहाल संगठन खड़ा करने और स्थानीय नेतृत्व को आगे लाने पर है, ताकि बाहरी पार्टी की छवि न बने.

चुनाव लड़ने पर अभी अंतिम फैसला नहीं

झामुमो नेतृत्व ने साफ किया है कि अभी चुनाव लड़ने को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. पहले सामाजिक और राजनीतिक माहौल को समझा जा रहा है. पार्टी अध्यक्ष स्तर पर ही इस पर अंतिम मुहर लगेगी.

हालांकि अंदरूनी स्तर पर यह चर्चा जरूर है कि अगर माहौल अनुकूल रहा तो सीमित सीटों पर प्रयोग किया जा सकता है.

भाजपा-कांग्रेस भी सक्रिय

असम की सियासत पहले से ही बहुकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रही है. भाजपा जहां अपने मौजूदा जनाधार को मजबूत करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस भी आदिवासी और चाय बागान मजदूर समुदायों के बीच सक्रियता बढ़ा रही है.

ऐसे में झामुमो की एंट्री चुनावी समीकरणों में नया फैक्टर जोड़ सकती है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भले ही पार्टी तुरंत बड़ा असर न डाले, लेकिन कुछ सीटों पर वोट प्रतिशत प्रभावित कर सकती है.

पूर्वोत्तर में क्षेत्रीय दलों की बढ़ती भूमिका

पूर्वोत्तर राज्यों में क्षेत्रीय पहचान और समुदाय आधारित राजनीति का असर लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में झामुमो जैसी पार्टी, जिसकी जड़ें आदिवासी राजनीति से जुड़ी हैं, यहां अपने लिए जगह बनाने की कोशिश कर रही है.

आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि झामुमो असम में सिर्फ राजनीतिक संदेश देना चाहती है या वाकई चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है.

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बुलेट ट्रेन
बुलेट ट्रेन की सांकेतिक तस्वीर

Bullet Train In Bihar: बिहार और पूर्वी भारत को हाई स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. वाराणसी–पटना–सिलीगुड़ी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए एलाइनमेंट सर्वे अप्रैल 2026 से शुरू करने की तैयारी है. यह परियोजना उन सात नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में शामिल है, जिनका ऐलान केंद्रीय बजट में किया गया था. इस रूट पर प्रस्तावित ट्रेनें 300 किमी/घंटा से अधिक रफ्तार से दौड़ेंगी.

करीब 750 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ेगा. वाराणसी से शुरू होकर यह लाइन पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक जाएगी. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) मार्च में सर्वे कमेटी गठित करने की योजना बना रहा है, जिसके बाद जमीनी और हवाई—दोनों तरह के सर्वे शुरू होंगे.

यात्रा समय में होगी बड़ी कटौती

इस कॉरिडोर के चालू होने पर वाराणसी से सिलीगुड़ी की दूरी लगभग 2 घंटे 55 मिनट में तय होने का अनुमान है. फिलहाल यही सफर रेल या सड़क से 12 से 15 घंटे तक ले लेता है.

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बिहार के कई प्रमुख शहर इस लाइन से जुड़ सकते हैं, जिनमें बक्सर, आरा, पटना, मनेर, मोकामा, कटिहार और किशनगंज का नाम शामिल है. इससे राज्य के भीतर और बाहर आवाजाही का समय काफी घटेगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

एलिवेटेड ट्रैक और सेफ्टी पर विशेष जोर

घनी आबादी वाले इलाकों में एलिवेटेड ट्रैक बनाने की योजना है ताकि जमीन अधिग्रहण कम हो और शहरी यातायात प्रभावित न हो. पटना शहर से 15–20 किमी के दायरे में स्टेशन विकसित करने का प्रस्ताव है, जिससे शहर और आसपास के जिलों के यात्रियों को सुविधा मिले.
सुरक्षा और शोर नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए कुछ हिस्सों में ट्रैक को विशेष कवर से ढकने की योजना भी बताई जा रही है, ताकि दुर्घटना जोखिम और ध्वनि प्रदूषण कम रहे.

पटना–दिल्ली कनेक्टिविटी को भी मिलेगा बल

हाई स्पीड नेटवर्क विकसित होने के बाद पटना से दिल्ली यात्रा का समय भी काफी घट सकता है. अभी हवाई यात्रा सामान्य परिस्थितियों में 1.5–2 घंटे लेती है, लेकिन कोहरे और देरी के समय यह 4–5 घंटे तक खिंच जाती है.
अनुमान है कि हाई स्पीड रेल से यह दूरी करीब 3 घंटे में तय हो सकेगी. किराया संरचना को विमान सेवाओं के आसपास रखने की चर्चा है, ताकि यात्रियों को व्यवहारिक विकल्प मिल सके.

सात हाई स्पीड कॉरिडोर का राष्ट्रीय प्लान

केंद्र सरकार ने देशभर में सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की है. इनमें वाराणसी–सिलीगुड़ी के अलावा दिल्ली–वाराणसी, मुंबई–पुणे, चेन्नई–बेंगलुरु, हैदराबाद–बेंगलुरु, पुणे–हैदराबाद और हैदराबाद–चेन्नई रूट शामिल हैं.
इन परियोजनाओं से 40–50 शहरों को तेज रेल नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा का समय घटेगा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी.

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Slow Smartphone: पुराना फोन क्यों होने लगता है स्लो? वजहें समझें और स्पीड बढ़ाने के आसान तरीके जानें

Smartphone
पुराना फोन क्यों होने लगता है स्लो?

Slow Smartphone: नया स्मार्टफोन जब हाथ में आता है तो उसकी स्पीड और स्मूथनेस प्रभावित करती है. ऐप्स झटपट खुलते हैं, गेमिंग में लैग नहीं होता और मल्टीटास्किंग भी आसान लगती है. लेकिन समय बीतते ही वही डिवाइस पहले जैसा तेज नहीं रहता. कई यूजर्स के मन में सवाल आता है कि क्या कंपनियां जानबूझकर फोन स्लो करती हैं या इसके पीछे तकनीकी कारण हैं.

असल में स्मार्टफोन की परफॉर्मेंस कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है—प्रोसेसर, स्टोरेज, बैटरी, सॉफ्टवेयर और ऐप्स का बोझ. जैसे-जैसे ये चीजें बदलती हैं, डिवाइस का व्यवहार भी बदलने लगता है. आइए समझते हैं कि फोन की स्पीड कम होने के पीछे क्या कारण काम करते हैं.

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ओवरहीटिंग और थर्मल थ्रॉटलिंग

जब फोन ज्यादा गरम हो जाता है, तो उसका प्रोसेसर खुद को सुरक्षित रखने के लिए स्पीड कम कर देता है. इसे थर्मल थ्रॉटलिंग कहा जाता है.
लंबे समय तक गेम खेलना, चार्जिंग के दौरान हैवी यूज या गर्म मौसम में इस्तेमाल करने से फोन जल्दी हीट होता है. पुराने डिवाइस में कूलिंग सिस्टम भी उतना प्रभावी नहीं रहता, इसलिए समय के साथ यह समस्या बढ़ सकती है.

स्टोरेज भरना भी बनता है कारण

फोन की स्टोरेज अगर लगभग फुल हो जाए तो उसकी रीड-राइट स्पीड पर असर पड़ता है. इससे ऐप्स खुलने में समय लगता है और सिस्टम लैग करने लगता है.
लगातार फाइल सेव और डिलीट करने से स्टोरेज चिप की परफॉर्मेंस भी घटती है. इसलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि स्टोरेज का कुछ हिस्सा हमेशा खाली रखें.

बैटरी हेल्थ का असर

बैटरी की क्षमता समय के साथ कम होती है. जब बैटरी कमजोर होने लगती है, तो फोन पावर मैनेजमेंट के तहत परफॉर्मेंस को सीमित कर सकता है ताकि अचानक शटडाउन से बचा जा सके.
इसी वजह से कुछ यूजर्स को लगता है कि फोन पहले से धीमा हो गया है, जबकि असल में सिस्टम बैटरी बचाने की कोशिश कर रहा होता है.

सॉफ्टवेयर अपडेट और नई मांगें

हर नया सॉफ्टवेयर अपडेट नए फीचर्स और सिक्योरिटी सुधार लाता है, लेकिन ये अक्सर लेटेस्ट हार्डवेयर को ध्यान में रखकर डिजाइन होते हैं. पुराने फोन उन फीचर्स को स्मूथली हैंडल नहीं कर पाते.
हालांकि कंपनियां सिक्योरिटी के लिए अपडेट जरूरी मानती हैं, पर पुराने डिवाइस पर इससे परफॉर्मेंस का दबाव बढ़ सकता है.

ऐप्स का बढ़ता बोझ

आज के ऐप्स पहले से कहीं ज्यादा फीचर-भरे और डेटा-हैवी हो चुके हैं. सोशल मीडिया ऐप्स लगातार बैकग्राउंड में काम करते रहते हैं, जिससे RAM और प्रोसेसर पर दबाव पड़ता है.
पुराने फोन जिनकी RAM कम होती है, वे इन ऐप्स के साथ जल्दी स्लो महसूस होने लगते हैं.

  • फोन को फिर से तेज कैसे बनाएं
  • अनावश्यक फाइलें और ऐप्स हटाएं
  • स्टोरेज का 20–25% हिस्सा खाली रखें
  • बैकग्राउंड ऐप्स को सीमित करें
  • बैटरी हेल्थ बहुत खराब हो तो बदलवाने पर विचार करें
  • जरूरत न हो तो हर बड़ा अपडेट तुरंत इंस्टॉल न करें

फोन को ओवरहीट होने से बचाएं

सही देखभाल और समझदारी से इस्तेमाल करने पर स्मार्टफोन लंबे समय तक अच्छा परफॉर्म कर सकता है. कई बार स्लोनेस का हल नया फोन नहीं, बल्कि सही मेंटेनेंस होता है.

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Mahashivratri 2026 Date: कब है महाशिवरात्रि? जानें सही तिथि, पूजा मुहूर्त, व्रत नियम और पूरी विधि

Mahashivratri
महाशिवरात्रि 2026

Mahashivratri 2026 Date : महाशिवरात्रि हिंदू परंपरा का एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्व है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन से जोड़ा जाता है. इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और शिवलिंग के अभिषेक-पूजन का विशेष महत्व माना गया है. शिवभक्त पूरे श्रद्धाभाव से उपवास रखते हैं और निशिता काल में पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है.

कब है महाशिवरात्रि 2026, क्या कहता है पंचांग?

पंचांग गणना के अनुसार वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी. यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को पड़ता है. मान्यता है कि चतुर्दशी तिथि की रात्रि में किया गया शिव पूजन विशेष पुण्य प्रदान करता है.

चतुर्दशी तिथि का समय

  • प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 4:23 बजे
  • समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 5:09 बजे

निशिता काल और चार प्रहर पूजा समय

महाशिवरात्रि पर निशिता काल को सबसे श्रेष्ठ पूजा समय माना गया है.

निशिता काल पूजा

  • रात 11:38 बजे से 12:29 बजे तक
  • अवधि: 51 मिनट

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चार प्रहर पूजा मुहूर्त

  • प्रथम प्रहर: 5:43 PM – 8:53 PM
  • द्वितीय प्रहर: 8:53 PM – 12:03 AM
  • तृतीय प्रहर: 12:03 AM – 3:14 AM
  • चतुर्थ प्रहर: 3:14 AM – 6:24 AM (16 फरवरी)

व्रत पारण समय

  • 16 फरवरी, सुबह 7:49 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक

नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ समय

नक्षत्र

  • उत्तराषाढ़ा रात 7:29 बजे तक
  • इसके बाद श्रवण नक्षत्र

योग

  • व्यतिपात योग रात 2:45 बजे तक
  • फिर वरियान योग

शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: 4:53 AM – 5:39 AM
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:42 AM – 12:26 PM
  • विजय मुहूर्त: 2:04 PM – 2:47 PM

अशुभ समय

  • राहुकाल: 4:18 PM – 5:43 PM
  • यमगण्ड: 12:04 PM – 1:29 PM
  • गुलिक काल: 2:53 PM – 4:18 PM

महाशिवरात्रि पूजा विधि और अभिषेक क्रम

महाशिवरात्रि पर सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लिया जाता है. घर या मंदिर में शिवलिंग स्थापित कर गंगाजल से अभिषेक किया जाता है.

अभिषेक की पारंपरिक सामग्री

जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से क्रमशः अभिषेक किया जाता है. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भस्म, चंदन और सफेद पुष्प अर्पित किए जाते हैं.

मंत्र जाप और रात्रि जागरण का महत्व

“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 या 1008 बार जप शुभ माना गया है. महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी विशेष फल देता है.
रात्रि के चारों प्रहरों में शिव पूजन, आरती और ध्यान करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की मान्यता है.

व्रत का महत्व और क्या करें–क्या न करें

महाशिवरात्रि व्रत को मनोकामना पूर्ति और कष्टों से मुक्ति का माध्यम माना जाता है. विवाह, करियर और आर्थिक पक्ष से जुड़ी बाधाओं के निवारण की भी मान्यता है.

क्या करें

  • बेलपत्र अर्पित करें
  • सात्विक आहार लें
  • संयम और शांति रखें

क्या न करें

  • मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज
  • क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहें
  • शिवलिंग पर तुलसी पत्र अर्पित न करें

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