संजीव मुखिया को CBI की क्लीन चिट, जांच में नहीं मिला पेपर चोरी या लीक कराने का सबूत

NEET Paper Leak : नीट पेपर लीक 2024 मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच में बड़ा अपडेट सामने आया है. सीबीआई ने जांच के बाद स्पष्ट किया है कि संजीव मुखिया की नीट-2024 पेपर लीक में कोई प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई है. एजेंसी के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि उन्होंने प्रश्नपत्र चोरी कराया, लीक कराया या अभ्यर्थियों तक पहुंचाने में कोई भूमिका निभाई.

जांच में क्या मिला?

सीबीआई के मुताबिक, जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजी, तकनीकी और अन्य साक्ष्यों से संजीव मुखिया के खिलाफ ऐसे प्रमाण नहीं मिले, जिनके आधार पर उन्हें नीट पेपर लीक का मुख्य आरोपी माना जा सके. इसी आधार पर एजेंसी ने उन्हें इस मामले में राहत दी है.

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पहले ईओयू के रडार पर थे संजीव मुखिया

नीट-2024 पेपर लीक की शुरुआती जांच बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने की थी. जांच के दौरान हजारीबाग के ओएसिस स्कूल को कथित साजिश का केंद्र माना गया था. उस समय संजीव मुखिया का नाम भी सामने आया था. पूर्व में अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों में उनका नाम जुड़ने के कारण ईओयू ने उन्हें संदेह के आधार पर आरोपी बनाया था.

बाद में CBI ने संभाली जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई. एजेंसी ने पूरे घटनाक्रम की दोबारा पड़ताल की, तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया तथा कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट भी दाखिल की. हालांकि, जांच के दौरान संजीव मुखिया के खिलाफ नीट पेपर लीक में प्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला.

कौन हैं संजीव मुखिया?

संजीव मुखिया बिहार के नालंदा जिले के नगरनौसा के निवासी हैं. उनका नाम पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़ी जांच में सामने आ चुका है. वह पूर्व में गिरफ्तार होकर जेल भी जा चुके हैं. उनके बेटे का नाम भी शिक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में सामने आया था. हालांकि, NEET-2024 पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण उन्हें राहत मिली है.

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छात्र आंदोलन की गूंज के बीच आज सदन में पेश होगा सेकंड सप्लीमेंट्री बजट

Bihar Monsoon Session: बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र का चौथा दिन गुरुवार को काफी अहम रहने वाला है. एक ओर सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का द्वितीय अनुपूरक बजट सदन में पेश करेगी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष नीट पेपर लीक और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है. बुधवार को सदन के बाहर छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के बाद आज विधानसभा के भीतर भी इन मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं.

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छात्र आंदोलन और लाठीचार्ज पर गरमा सकता सदन

बुधवार को राजधानी पटना में नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया था. राजभवन मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई. हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इस घटना के बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर है और आज सदन में इस मुद्दे पर जवाब मांगने की तैयारी कर चुका है.

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प्रश्नकाल से होगी शुरुआत, फिर पेश होगा बजट

आज की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू होगी. प्रश्नकाल में शिक्षा और सहकारिता विभाग से जुड़े तारांकित प्रश्नों का सरकार जवाब देगी. इसके बाद वित्त मंत्री वर्ष 2026-27 का द्वितीय अनुपूरक बजट (Second Supplementary Budget) सदन में पेश करेंगे. साथ ही बिहार विनियोग विधेयक, 2026 भी सदन के पटल पर रखा जाएगा.

तीसरे दिन 13 अहम विधेयकों को मिली मंजूरी

मॉनसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को सरकार ने 13 महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन से पारित कराया. इनमें अपराध नियंत्रण कानून में संशोधन, निजी एवं विशिष्ट विश्वविद्यालयों की स्थापना, नगर विकास से जुड़े प्रावधान, पंचायतों के वित्तीय अधिकार तथा स्टाम्प कानून में संशोधन जैसे अहम प्रस्ताव शामिल रहे.

दूसरे दिन भी पारित हुए थे सात महत्वपूर्ण विधेयक

इससे पहले मंगलवार को मॉनसून सत्र के दूसरे दिन विधानसभा ने सात महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी थी. इनमें शामिल हैं—

  • बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026
  • बिहार माल एवं सेवा कर (GST) संशोधन विधेयक, 2026
  • बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक, 2026
  • बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) संशोधन विधेयक, 2026
  • बिहार चिकित्सा संशोधन विधेयक, 2026
  • बिहार नर्सेस पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026
  • बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजन के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026
  • चौथे दिन की कार्यवाही पर सबकी नजर

सरकार जहां बजट और विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष छात्र आंदोलन, नीट पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास करेगा. ऐसे में मॉनसून सत्र के चौथे दिन विधानसभा में जोरदार हंगामे और तीखी राजनीतिक नोकझोंक की संभावना बनी हुई है.

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बिहार में भारी बारिश का अलर्ट, झारखंड में बदलेगा मौसम; पढ़ें किस राज्य में कैसा रहेगा हाल

Weather Update: देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है. मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 23 से 28 जुलाई के बीच मध्य भारत, पूर्वोत्तर, दक्षिण भारत और राजस्थान के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. बिहार के कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि झारखंड में भी गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई गई है.

मध्य भारत में कई दिनों तक बारिश का दौर

मौसम विभाग के अनुसार, 23 से 26 जुलाई के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी बारिश होने की संभावना है. वहीं 23 से 28 जुलाई तक पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में लगातार बारिश का दौर बना रह सकता है. विदर्भ में 23 और 24 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, हालांकि 25 जुलाई के बाद बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम हो सकती है.

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राजस्थान में कई संभागों पर भारी बारिश का खतरा

मानसून के सक्रिय होने से राजस्थान में बारिश का सिलसिला तेज हो गया है. मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार 23 से 26 जुलाई के बीच कोटा, जयपुर, भरतपुर, अजमेर, उदयपुर, जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकांश हिस्सों में बारिश होगी. कुछ स्थानों पर भारी, जबकि एक-दो जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की भी संभावना है.

झारखंड में गरज-चमक और तेज हवाओं का अनुमान

रांची मौसम केंद्र के अनुसार 23 से 25 जुलाई तक झारखंड के मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा. राज्य के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक हो सकती है. रांची समेत कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है. दक्षिणी, मध्य, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी जिलों में वज्रपात का भी खतरा बना हुआ है.

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Weather Update-झारखंड

बिहार के कई जिलों में येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने 23 जुलाई के लिए बिहार के उत्तरी, पूर्वी और सीमांचल क्षेत्र के अधिकांश जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है. इन इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश, 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है.

हालांकि पटना, गया, नालंदा, नवादा, औरंगाबाद, रोहतास, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, अरवल और जहानाबाद समेत दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम बिहार के जिलों के लिए फिलहाल कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है. इन क्षेत्रों में हल्की बारिश या बादल छाए रहने की संभावना है.

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Weather Update-बिहार

दिल्ली में उमस के बीच बारिश के आसार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 23 और 24 जुलाई को मौसम उमस भरा रहेगा. अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है. इस दौरान बादल छाए रहेंगे और कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक तथा तेज हवाएं चल सकती हैं.

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Weather Update-दिल्ली

दक्षिण भारत में भी बरसेंगे बादल

मौसम विभाग के अनुसार 23 से 28 जुलाई के बीच तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और तेलंगाना के कई हिस्सों में बारिश होगी. वहीं केरल, माहे और लक्षद्वीप में कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है.

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पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 23 से 28 जुलाई के दौरान कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. वहीं 23 से 26 जुलाई के बीच इन राज्यों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है.

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पटना में आज भी गरमाएगा छात्र आंदोलन, गांधी मैदान में AISA का अनिश्चितकालीन धरना

Patna Student Protest: राजधानी पटना में बुधवार को छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद गुरुवार को भी आंदोलन जारी रहेगा. छात्र संगठन AISA ने गांधी मैदान में अनिश्चितकालीन धरने का एलान किया है. वहीं, देर रात करीब दो बजे पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष सुशांत शेखर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. प्रदर्शन के बाद राजधानी समेत पूरे बिहार में पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

देर रात तक चली पुलिस कार्रवाई

बुधवार को हुए बवाल के बाद पुलिस ने देर रात तक कार्रवाई जारी रखी. इसी क्रम में पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष सुशांत शेखर को हिरासत में लिया गया. गुरुवार को प्रस्तावित धरना और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है. प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है.

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नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े छात्र

छात्र संगठन नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. बुधवार सुबह बड़ी संख्या में छात्र गांधी मैदान से राजभवन मार्च के लिए निकले.

जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर छात्रों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ गए. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई.

डाकबंगला चौराहे पर बढ़ा तनाव, वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल

प्रदर्शनकारी जब डाकबंगला चौराहे पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. इसके बाद आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे. हालात बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा.

इस दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हुई. पत्थरबाजी में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हो गए. मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा.

कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और जवान घायल

प्रदर्शन के दौरान कई पुलिस अधिकारी और जवान चोटिल हुए. इनमें आईजी जितेंद्र राणा के पैर में चोट लगी, जबकि टाउन डीएसपी-2 कामाख्या नारायण के नाक, हाथ और शरीर पर चोट आई. गांधी मैदान थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा का सिर फट गया. पत्रकार नगर थाना प्रभारी सोनू कुमार के नाक पर भी चोट लगी.

इसके अलावा कोतवाली थाना के दारोगा चंदन राज, एएसआई संजीव कुमार सिंह, एएसआई रितेश कुमार, पुलिस लाइन के सिपाही ओमप्रकाश चंद्रा, मुन्ना कुमार और सूरज कुमार सिंह, कोतवाली के एएसआई अरविंद कुमार निराला, गांधी मैदान के पीएसआई अभिषेक रंजन तथा कांस्टेबल पूजा कुमारी और दुर्गा कुमारी भी घायल हुए हैं.

पूरे बिहार में बढ़ाई गई चौकसी

पटना में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है. राजधानी के प्रमुख चौराहों, सरकारी कार्यालयों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. गुरुवार को प्रस्तावित छात्र आंदोलन को देखते हुए प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

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Purnea Airport: पूर्णिया एयरपोर्ट के विस्तार को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने स्थायी सिविल एन्क्लेव के निर्माण के लिए करीब 294.05 करोड़ रुपये की लागत से ईपीसी (EPC) टेंडर जारी कर दिया है. इसकी जानकारी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया. उन्होंने कहा कि यह परियोजना सीमांचल और उत्तर-पूर्वी बिहार की हवाई कनेक्टिविटी को नई पहचान देगी.

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Purnea Airport: प्रधानमंत्री के उद्घाटन का भी किया जिक्र

सम्राट चौधरी ने बताया कि 15 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्णिया हवाई अड्डे के अंतरिम सिविल एन्क्लेव का उद्घाटन किया था. इसके बाद सीमांचल और उत्तर-पूर्वी बिहार के लाखों लोगों को पहली बार नियमित हवाई सेवा का लाभ मिला. उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय से बेहतर एयर कनेक्टिविटी की प्रतीक्षा कर रहा था.

रोजाना हो रही हैं 10 उड़ानों का संचालन

मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में पूर्णिया एयरपोर्ट से प्रतिदिन 10 उड़ानों का सफल संचालन हो रहा है. इससे यह स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही है और यात्रियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है.

अत्याधुनिक टर्मिनल समेत कई सुविधाएं विकसित होंगी

करीब 294.05 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत स्थायी सिविल एन्क्लेव का निर्माण किया जाएगा. इसके साथ अत्याधुनिक टर्मिनल भवन, आधुनिक एयरपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और बाहरी क्षेत्र के विकास से जुड़े कई कार्य किए जाएंगे. परियोजना पूरी होने के बाद यात्रियों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी.

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सीमांचल में पर्यटन और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

सम्राट चौधरी ने कहा कि स्थायी सिविल एन्क्लेव बनने से सीमांचल क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही एयर कनेक्टिविटी और मजबूत होगी. उन्होंने कहा कि केंद्र और बिहार सरकार के समन्वित प्रयासों से विकसित बिहार के लक्ष्य को नई गति मिल रही है.

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Bihar Monsoon Session: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार का दिन कई बड़े फैसलों के नाम रहा. सदन ने कानून-व्यवस्था, शिक्षा, नगर विकास, पंचायत व्यवस्था और स्टाम्प कानून से जुड़े 13 महत्वपूर्ण विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. इन फैसलों के बाद अब पेपर लीक गिरोह, भू-माफिया और संगठित अपराधियों पर शिकंजा कसने का रास्ता साफ हो गया है. वहीं सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा और गाली-गलौज करने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है.

पेपर लीक गिरोह और भू-माफिया पर सीधे CCA की कार्रवाई

विधानसभा ने बिहार अपराध नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी. नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक गिरोह, भू-माफिया, संगठित अपराध, विस्फोटक से जुड़े अपराध, वन संपदा की तस्करी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर अब सीधे क्राइम कंट्रोल एक्ट (CCA) के तहत कार्रवाई की जाएगी.

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उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन को बताया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर किसी के खिलाफ अभद्र भाषा, गाली-गलौज या अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के लिए भी सजा का प्रावधान किया गया है. ऐसे मामलों में छह महीने से एक वर्ष तक की जेल हो सकती है.

निजी विश्वविद्यालयों को लेकर बदले नियम

निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार चाहती है कि बिहार के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े. उन्होंने कहा कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के जरिए हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये राज्य से बाहर जा रहे हैं, इसलिए बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का माहौल तैयार किया जा रहा है.

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उन्होंने बताया कि यदि कोई प्रायोजक संस्था भवन और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का लिखित आश्वासन देती है, तो उसे एक सत्र के लिए अस्थायी संचालन की अनुमति दी जाएगी. तय समय सीमा में शर्तें पूरी नहीं होने पर यह अनुमति स्वत: समाप्त हो जाएगी.

स्टाम्प ड्यूटी चोरी पर अब लगेगा बराबर का जुर्माना

सदन ने भारतीय स्टाम्प (बिहार संशोधन) विधेयक भी पारित कर दिया. इसके तहत यदि कोई व्यक्ति संपत्ति का वास्तविक मूल्य छिपाकर कम स्टाम्प शुल्क देता है, तो उससे बकाया राशि के बराबर जुर्माना वसूला जाएगा.

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री मदन सहनी ने बताया कि अब निबंधन अधिकारियों को जमीन के बाजार मूल्य की जांच करने का अधिकार मिलेगा. साथ ही अपने दायित्वों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

इन विधेयकों पर भी लगी मुहर

बुधवार को विधानसभा ने कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी दी. इनमें शहीद जुब्बा सहनी वास्तुकला एवं असैनिक अभियंत्रण विद्यालय विधेयक, बिहार अभियंत्रण (संशोधन) विश्वविद्यालय विधेयक, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं कंप्यूटर विज्ञान विद्यालय विधेयक, बिहार कारा सुधारात्मक सेवा विधेयक, बिहार दुकान एवं प्रतिष्ठान निरसन विधेयक, निबंधन (बिहार संशोधन) विधेयक, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, बिहार राज्य पंचायत (संशोधन) विधेयक और बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय विधेयक शामिल हैं.

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बिहार में अब घर बैठे डाउनलोड कर सकेंगे जमीन की रजिस्ट्री, निबंधन विभाग ऑनलाइन करेगा पुराने रिकॉर्ड

Bihar Land Registry: जमीन की रजिस्ट्री की कॉपी लेने के लिए अगर हर बार निबंधन कार्यालय जाना पड़ता है, तो जल्द ही यह परेशानी खत्म होने वाली है. बिहार सरकार ऐसी व्यवस्था करने जा रही है, जिससे लोग घर बैठे अपनी जमीन की रजिस्ट्री का दस्तावेज डाउनलोड कर सकेंगे. इसके लिए निबंधन विभाग वर्षों पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने के अंतिम चरण में पहुंच चुका है. सबसे पहले 1990 से 1995 तक के दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे.

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1908 तक के पुराने रिकॉर्ड भी होंगे ऑनलाइन

विभाग ने डिजिटलाइजेशन का काम दो चरणों में पूरा करने की योजना बनाई है. पहले चरण में वर्ष 1990 से 1995 तक के रजिस्ट्री दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे. इसके बाद दूसरे चरण में वर्ष 1908 से 1989 तक के रिकॉर्ड भी ऑनलाइन कर दिए जाएंगे. इससे लोग अपने पूर्वजों की जमीन से जुड़े दस्तावेज भी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे.

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अभी एक कॉपी के लिए करना पड़ता है आवेदन

फिलहाल रजिस्ट्री की नकल लेने के लिए संबंधित जिला निबंधन कार्यालय में आवेदन देना पड़ता है. इसके लिए 100 रुपये शुल्क जमा करना होता है. आवेदन के बाद विभाग दस्तावेज की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराता है. इस पूरी प्रक्रिया में लोगों का समय भी खर्च होता है और कई बार कार्यालय के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं.

1.70 लाख दस्तावेज अपलोड करने की तैयारी

निबंधन विभाग पहले चरण में करीब 1.70 लाख रजिस्ट्री दस्तावेज ऑनलाइन करने जा रहा है. इन रिकॉर्ड की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है. अब दूसरी एजेंसी मूल दस्तावेजों से उनका मिलान कर रही है. सत्यापन पूरा होते ही सभी रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड कर दिए जाएंगे.

डिजिटल दस्तावेज होंगे मान्य

अवर निबंधक के अनुसार, वर्ष 1908 से 1989 तक के रिकॉर्ड को डिजिटल करना सबसे कठिन काम है. हालांकि, यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोगों को अपने पुराने रजिस्ट्री दस्तावेज हासिल करने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. विभाग का कहना है कि ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाने वाले डिजिटल दस्तावेज सभी जरूरी सरकारी और कानूनी कार्यों में मान्य होंगे.

लोगों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोग कहीं से भी रजिस्ट्री के दस्तावेज डाउनलोड कर सकेंगे. इससे न सिर्फ समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि वर्षों पुराने रिकॉर्ड खोजने की परेशानी भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी.

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आय कम, लेकिन संपत्ति कई गुना ज्यादा

चार्जशीट के अनुसार, प्रमोद सिंह वर्ष 2008 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) में संविदा पर ब्लॉक अकाउंट मैनेजर नियुक्त हुआ था. झरिया और जोड़ापोखर में उसकी जिम्मेदारी एनआरएचएम की राशि का लेखा-जोखा, खर्च और कैश बुक का रखरखाव था. उस समय उसे करीब 17 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता था. जांच में एसीबी का दावा है कि इतनी आय के बावजूद उसने और उसकी पत्नी ने करोड़ों रुपये की संपत्ति खड़ी कर ली.

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सरकारी राशि का रास्ता बदला, फिर वापस आई रकम

एसीबी के मुताबिक, सरकारी राशि सीधे अपने खाते में लाने के बजाय प्रमोद सिंह ने कथित तौर पर अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई. बाद में वही राशि वापस लेकर उसका इस्तेमाल किया गया. जांच एजेंसी का कहना है कि इसी तरीके से सरकारी धन को छिपाने और अवैध संपत्ति बनाने का खेल खेला गया.

करीबी के नाम खरीदी गाड़ी, बाद में पत्नी के नाम करा दी

चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि प्रमोद सिंह ने एक वाहन पहले अपने करीबी व्यक्ति के नाम खरीदा. वाहन का इस्तेमाल वह खुद करता रहा और बाद में उसका स्वामित्व पत्नी प्रिया सिंह के नाम स्थानांतरित करा दिया. एसीबी का दावा है कि जांच में इतनी बड़ी संपत्ति अर्जित करने का कोई वैध आय स्रोत सामने नहीं आया. इसी आधार पर विशेष अदालत में प्रमोद सिंह और उसकी पत्नी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है.

ED पहले ही कर चुकी है बड़ी कार्रवाई

इससे पहले वर्ष 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रमोद सिंह की 1.63 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की थी. इसमें धनबाद का मकान, जमीन, तीन लग्जरी वाहन, 2.17 लाख रुपये नकद और बैंक खातों में जमा करीब चार लाख रुपये शामिल हैं.

12 समन भेजे, एक बार भी नहीं पहुंचा

ईडी ने पूछताछ के लिए प्रमोद सिंह को 12 बार समन भेजा, लेकिन वह एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुआ. इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया. वह फरवरी 2025 से जेल में बंद है. उसके खिलाफ एनआरएचएम में करीब 9.39 करोड़ रुपये के गबन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच अभी भी जारी है.

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झारखंड में खुले में मांस बिक्री पर सख्ती, सरकार को मिला नियमावली बनाने का समय

Jharkhand High Court: झारखंड में खुलेआम कटे हुए बकरे और मुर्गे की बिक्री पर अब सख्ती की तैयारी शुरू हो गई है. इस मामले में झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से साफ कहा है कि सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि नियमावली तैयार कर उसे लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे. राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में खुले में मांस बेचने के मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार को 20 अगस्त तक शपथ पत्र दाखिल कर प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है.

हाइकोर्ट ने सरकार को दिया अंतिम मौका

चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को नियमावली तैयार करने के लिए समय दिया. अदालत ने कहा कि खुले में मांस की बिक्री को कानून और स्वच्छता मानकों के अनुरूप विनियमित करने के लिए जल्द नियम लागू किए जाएं. साथ ही राज्य सरकार के सचिव को शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया गया कि नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया किस चरण में है. मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी.

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सरकार बोली- नियमावली का ड्राफ्ट तैयार है

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता योगेश मोदी ने अदालत को बताया कि खुले में कटे मांस की बिक्री और स्लॉटर हाउस के संचालन को लेकर नियमावली का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है. फिलहाल इसे वित्त विभाग की स्वीकृति के लिए भेजा गया है. मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा. सरकार ने पूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय मांगा. अदालत ने समय तो दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब और अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

पहले भी मिल चुका था दो महीने का समय

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान याद दिलाया कि इससे पहले भी राज्य सरकार को दो माह के भीतर नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया गया था. इसके बावजूद अब तक नियम लागू नहीं हो सके हैं. अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक सरकार को शपथ पत्र के माध्यम से पूरी प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी.

जनहित याचिका में उठाया गया स्वास्थ्य का सवाल

यह मामला श्यामानंद पांडेय की ओर से दायर जनहित याचिका के जरिए हाइकोर्ट पहुंचा है. याचिका में कहा गया है कि रांची सहित झारखंड के कई शहरों और कस्बों में खुलेआम कटे हुए बकरे और चिकन को लटकाकर बेचा जाता है. इससे न केवल स्वच्छता के नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है. खुले वातावरण में रखे मांस पर धूल, गंदगी और मक्खियां बैठने से खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा पैदा होता है.

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का भी दिया गया हवाला

याचिका में कहा गया है कि खुले में मांस की बिक्री खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े नियमों के विपरीत है. साथ ही सर्वोच्च न्यायालय की ओर से समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों की भावना के भी अनुकूल नहीं है. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि राज्य सरकार स्पष्ट नियम बनाकर आधुनिक और स्वच्छ स्लॉटर हाउस की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि लोगों को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके.

2023 के आदेश के बाद भी नहीं बनी नियमावली

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह भी जानकारी दी गई कि 19 जुलाई 2023 को हाइकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य सरकार को खुले में मांस की बिक्री को नियंत्रित करने और स्लॉटर हाउस के संचालन के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया था. हालांकि, दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी नियमावली लागू नहीं हो सकी. यही कारण है कि अदालत अब इस मामले की लगातार निगरानी कर रही है.

20 अगस्त की सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब 20 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में राज्य सरकार को शपथ पत्र के साथ यह बताना होगा कि नियमावली तैयार करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है. अदालत की अगली टिप्पणी से यह तय होगा कि इस मामले में सरकार की कार्रवाई को लेकर आगे क्या दिशा तय की जाती है.

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