भागलपुर : शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा में बंद एक सजायाफ्ता कैदी की इलाज के दौरान मौत हो गई. मृतक की पहचान बेगूसराय जिले के बिहट खेमकरणपुर वार्ड नंबर 27 निवासी 42 वर्षीय राजीव कुमार के रूप में हुई है. जेल प्रशासन के अनुसार अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में कराया गया भर्ती
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को राजीव कुमार को लगातार उल्टी की शिकायत होने लगी. स्थिति गंभीर होने पर उन्हें इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) लाया गया. यहां डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू में भर्ती किया, लेकिन उपचार के दौरान शाम करीब चार बजे उनकी मौत हो गई.
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शनिवार को अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम कराया गया. पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई और नाथनगर के अंचलाधिकारी को दंडाधिकारी के रूप में मौजूद रखा गया. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया.
परिजनों ने जताया संदेह
मृतक के भाई राजकुमार सिंह का कहना है कि राजीव को पहले से किसी प्रकार की बीमारी नहीं थी. अचानक उल्टी होने और उसके बाद मौत हो जाने की बात उन्हें समझ नहीं आ रही है. उन्होंने बताया कि शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे जेल प्रशासन की ओर से सूचना दी गई थी कि राजीव की तबीयत खराब है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जब परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी.
परिजनों का यह भी कहना है कि मौत की जानकारी शुक्रवार को ही मिल गई थी, लेकिन शनिवार दोपहर तक शव नहीं सौंपा गया, जिससे उन्हें काफी परेशानी हुई. परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
हाईकोर्ट से मिली थी रिहाई
परिजनों के अनुसार राजीव हत्या के एक मामले में सजा काट रहा था और करीब सात वर्षों से भागलपुर जेल में बंद था. इस बीच उन्होंने मामले को लेकर उच्च न्यायालय में अपील की थी, जहां से उसे राहत मिलने की बात परिवार ने कही है. भाई के अनुसार हाल ही में राजीव से उनकी बातचीत हुई थी और वह जेल से बाहर आने को लेकर काफी उत्साहित था.
2013 की हत्या के मामले में था दोषी
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2013 में बरौनी थाना क्षेत्र के कोल बोल्ड रोड स्थित मछली आढ़त के पास अमलेश कुमार नामक युवक की हत्या हुई थी. उस मामले में राजीव कुमार को दोषी ठहराया गया था. बताया गया था कि रंगदारी को लेकर हुए विवाद के कारण यह घटना हुई थी.
मामले में पहले राजीव को बेगूसराय जेल में रखा गया था, बाद में उसे भागलपुर केंद्रीय कारा स्थानांतरित कर दिया गया था.
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