Bihar Electricity: बिहार में बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब नए बिजली कनेक्शन के लिए लोगों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. कई बार कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ताओं को बिजली कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते थे और प्रक्रिया में महीनों लग जाते थे. लेकिन अब राज्य सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव कर दिया है. नई व्यवस्था के तहत तय समयसीमा में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की बात कही गई है.
जेडीयू ने सोशल मीडिया पोस्ट में दी जानकारी
जेडीयू के आधिकारिक एक्स अकाउंट से इस संबंध में एक पोस्ट साझा किया गया है. पोस्ट में बताया गया है कि बिजली उपभोक्ताओं को अब तीन दिनों के भीतर कनेक्शन देने की व्यवस्था की गई है. साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि तय समय में कनेक्शन नहीं दिया गया तो संबंधित अधिकारियों पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा.
अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए नीतीश सरकार ने राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है।
— Janata Dal (United) (@Jduonline) April 7, 2026
अब समय पर सेवा सुनिश्चित नहीं करने पर अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इस प्रावधान से बिजली सेवाओं में पारदर्शिता और तेजी आएगी।@NitishKumar#Bihar #NitishKumar#JDU… pic.twitter.com/z6lDKH0yfr
पोस्ट के मुताबिक, जिम्मेदार अधिकारी को हर दिन की देरी पर 1000 रुपये का जुर्माना अपनी जेब से देना होगा. इस फैसले को उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा कदम बताया गया है.
समय पर सेवा नहीं देने पर तय होगी जवाबदेही
शेयर किए गए पोस्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है. इसमें कहा गया है कि समय पर सेवा उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाएगा.
पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस प्रावधान के लागू होने से बिजली सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और कामकाज की रफ्तार तेज होगी. इसका सीधा लाभ बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को मिलेगा.
इलाके के हिसाब से तय की गई अलग-अलग समय सीमा
पोस्ट में यह भी बताया गया है कि बिजली कनेक्शन देने की समय सीमा इलाके के हिसाब से अलग-अलग तय की गई है. शहरी क्षेत्र में रहने वाले उपभोक्ताओं को आवेदन मिलने के तीन दिनों के भीतर कनेक्शन दिया जाएगा.
वहीं अन्य शहरी इलाकों या टाउनशिप में यह समय सीमा 7 दिन रखी गई है. इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है. ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह अवधि तय की गई है.
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