इस खबर में क्या है?
Supreme Court : महिला वकील पर हुए गंभीर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान के आधार पर सुनवाई शुरू कर दी है. यह कार्रवाई एक अधिवक्ता द्वारा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के कार्यालय में भेजे गए पत्र के बाद की गई है. पत्र में आरोप लगाया गया था कि महिला वकील पर धारदार हथियारों से बेरहमी से हमला किया गया है, जिसके बाद मामला गंभीरता से लिया गया और अदालत ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए सुनवाई शुरू करने का निर्णय लिया.
पत्र और तस्वीरों के आधार पर कोर्ट ने लिया संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इस मामले पर गंभीरता से विचार किया. कोर्ट के समक्ष पेश पत्र के साथ कुछ तस्वीरें भी संलग्न थीं, जिनमें महिला वकील पर हुए हमले की भयावहता साफ तौर पर दिखाई दे रही थी. इन तस्वीरों में यह स्पष्ट हुआ कि पीड़िता पर अत्यंत बेरहमी से धारदार हथियार से हमला किया गया है. हमले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने तत्काल प्रभाव से मामले में हस्तक्षेप किया और जांच शुरू कराने के निर्देश दिए.
The Supreme Court has registered a suo motu case after receiving a letter from a lawyer informing the office of the Chief Justice of India about an alleged brutal assault on a woman lawyer with sharp weapons.
— ANI (@ANI) April 27, 2026
A Bench led by Justice Surya Kant took note of the serious nature of… pic.twitter.com/tat18FYUJW
AIIMS ट्रॉमा सेंटर में हुआ प्रारंभिक इलाज
हमले के बाद महिला वकील की हालत गंभीर हो गई थी, जिसके चलते उन्हें पहले AIIMS ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया. वहां डॉक्टरों की टीम ने उनका तत्काल उपचार शुरू किया. शुरुआती इलाज के बाद उनकी स्थिति को स्थिर करने का प्रयास किया गया, क्योंकि चोटें काफी गंभीर थीं.
पति मुख्य आरोपी, पुलिस की गिरफ्त में
इस मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि महिला वकील पर हमले का मुख्य आरोपी उसका पति बताया गया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए अंतरिम आदेश जारी किए कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो.
महिला अधिकारी को जांच सौंपने का निर्देश
कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए, विशेषकर किसी महिला अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाए ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके. इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि मामले की हर पहलू से गहन जांच की जाए.
नाबालिग बच्चों को लेकर भी निर्देश
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पति दो नाबालिग बच्चों को अपने साथ ले गया है. इस पर कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि बच्चों का तत्काल पता लगाया जाए और उन्हें सुरक्षित स्थिति में लाया जाए. साथ ही, बड़ी बेटी की कस्टडी फिलहाल उसके ननिहाल में रहने की अनुमति दी गई है, जहां वह वर्तमान में रह रही है.
अस्पतालों की भूमिका पर जांच के आदेश
हमले के बाद पीड़िता को कुछ अस्पतालों में भर्ती कराने का प्रयास किया गया था, लेकिन गुरु तेग बहादुर अस्पताल, कैलाश दीपक अस्पताल और आरके अस्पताल ने इलाज करने से इनकार कर दिया. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और इन अस्पतालों की भूमिका की जांच के निर्देश दिए हैं कि आखिर एक गंभीर रूप से घायल महिला का इलाज क्यों नहीं किया गया.
मुआवजे और आर्थिक सहायता पर निर्देश
पीड़िता की आर्थिक स्थिति और इलाज के खर्च को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) को निर्देश दिया है कि वह उचित मुआवजे और आर्थिक सहायता की व्यवस्था करे. कोर्ट ने कहा कि पीड़िता और उसकी नाबालिग बेटियों की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए तुरंत सहायता सुनिश्चित की जाए.
अगली सुनवाई पर नजर
मामले की अगली सुनवाई अब तय तारीख पर होगी, जिसमें जांच की प्रगति और अन्य निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी.
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