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Apara Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है. सालभर आने वाली सभी एकादशियों का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अपरा एकादशी को विशेष फलदायी बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है.
शास्त्रों में अपरा एकादशी को ऐसा व्रत बताया गया है, जो मनुष्य को गलत कर्मों के प्रभाव से बाहर निकालने में सहायक माना जाता है. मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा से साधक के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है.
कब रखा जाएगा अपरा एकादशी व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष अपरा एकादशी तिथि 12 मई 2026 को दोपहर 2:53 बजे से शुरू होगी. वहीं तिथि का समापन 13 मई 2026 को दोपहर 1:30 बजे होगा.
उदयातिथि के आधार पर अपरा एकादशी का व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा. व्रत का पारण अगले दिन 14 मई को सुबह 5:31 बजे से 8:14 बजे के बीच करना शुभ माना गया है.
क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है अपरा एकादशी?
धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि मनुष्य कई बार अज्ञानता, लालच या परिस्थितियों के कारण ऐसे कर्म कर बैठता है, जिन्हें अधर्म या पाप की श्रेणी में रखा गया है. इसमें झूठ बोलना, छल करना, दूसरों की निंदा करना, निर्दोष को कष्ट देना और धार्मिक भावनाओं का अपमान करना जैसे कार्य शामिल हैं.
मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत ऐसे नकारात्मक कर्मों के प्रभाव को कम करने वाला माना गया है. इसी कारण इस एकादशी को “अपार पुण्य देने वाली” तिथि भी कहा जाता है.
धार्मिक मान्यता में बताया गया विशेष फल
शास्त्रों के अनुसार अपरा एकादशी का पुण्य कई बड़े धार्मिक अनुष्ठानों के बराबर माना गया है. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से वही फल प्राप्त हो सकता है, जो तीर्थ स्नान, दान-पुण्य और विशेष धार्मिक आयोजनों से मिलता है.
धार्मिक परंपराओं में कहा गया है कि मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान, कार्तिक पूर्णिमा पर तीर्थ दर्शन, शिवरात्रि व्रत और पितरों के लिए किए गए धार्मिक कर्मों के समान पुण्य इस एकादशी से प्राप्त हो सकता है.
ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
अपरा एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है. पीले वस्त्र, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित कर व्रत का संकल्प लिया जाता है. दिनभर सात्विकता और नियमों का पालन करने के बाद अगले दिन निर्धारित समय में पारण किया जाता है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्रदान करता है.
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