Child Speech Development : बच्चे की भाषा सीखने की शुरुआत रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातचीत से होती है. माता-पिता बच्चे से किस तरह बात करते हैं, उसे कितना समय देते हैं और उसके इशारों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, ये सभी बातें भाषा सीखने के अवसर बढ़ा सकती हैं. पीडियाट्रिशियन मेहर ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर किए गए वीडियो में बच्चों की बोलने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए चार जरूरी बातें बताई हैं.
इन तरीकों को अपनाकर पेरेंट्स बच्चे को नए शब्दों से परिचित कराने और बातचीत के लिए प्रोत्साहित करने में मदद कर सकते हैं.
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1. बच्चे के इशारों को समझें और जवाब दें
बच्चे बोलना सीखने से पहले इशारों, आवाजों और चेहरे के भावों के जरिए अपनी जरूरत बताने की कोशिश करते हैं. ऐसे में पेरेंट्स को उनकी बात समझने के साथ जवाब भी देना चाहिए. अगर बच्चा पानी की ओर इशारा करता है, तो उससे पूछें, “तुम्हें पानी चाहिए?” इस तरह की बातचीत से बच्चे को अपनी जरूरतों और शब्दों के बीच संबंध समझने का मौका मिलता है.
2. स्क्रीन की जगह बातचीत को दें प्राथमिकता
मोबाइल और टीवी देखने में समय बिताने के बजाय बच्चे को माता-पिता और परिवार के अन्य लोगों के साथ बातचीत करने का अवसर मिलना चाहिए. बच्चे आसपास के लोगों की आवाज, चेहरे और हाव-भाव से भी सीखते हैं. इसलिए उनके साथ खेलते समय चीजों के नाम बताएं, सवाल पूछें और उनकी आवाजों पर प्रतिक्रिया दें. इससे उन्हें भाषा सुनने और समझने के अधिक अवसर मिलते हैं.
3. कहानी सुनाने को बनाएं रोज की आदत
कहानियां बच्चों को नए शब्दों और वाक्यों से परिचित कराने का एक तरीका हैं. पेरेंट्स रोज कुछ समय निकालकर बच्चे को छोटी-छोटी कहानियां सुना सकते हैं. तस्वीरों वाली किताबों के जरिए जानवरों, रंगों और आसपास की चीजों के नाम बताना भी उपयोगी हो सकता है. कहानी सुनाते समय बच्चे से आसान सवाल पूछें और उसे जवाब देने के लिए समय दें.
4. उम्र के अनुसार खाने की बनावट का रखें ध्यान
बच्चे के आहार पर ध्यान देना भी जरूरी है. उम्र और खाने की क्षमता के अनुसार उचित बनावट वाला भोजन देने से बच्चे को चबाने का अभ्यास मिलता है और जबड़े व मुंह की मांसपेशियां काम करती हैं. हालांकि, केवल ठोस भोजन खाने से बच्चा जल्दी बोलना सीख जाएगा, इसकी गारंटी नहीं है. भोजन का चुनाव बच्चे की उम्र और सुरक्षित तरीके से खाने की क्षमता के मुताबिक ही करना चाहिए.
बच्चा देर से बोल रहा है, तो कब लें डॉक्टर की सलाह?
हर बच्चे में भाषा विकास की गति एक जैसी नहीं होती. फिर भी, अगर बच्चा अपनी उम्र के अनुसार शब्द बोलने, आवाजों पर प्रतिक्रिया देने या दूसरों की बात समझने में कठिनाई महसूस कर रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में पीडियाट्रिशियन से सलाह लें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर बच्चे की सुनने की क्षमता और भाषा विकास का आकलन कराने की सलाह दे सकते हैं. घरेलू उपायों के भरोसे जांच में देरी करना उचित नहीं है.
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