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Bhagalpur News : भागलपुर शहर में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गयी कई बड़ी परियोजनाएं वर्षों बाद भी अधूरी बनी हुई हैं. जलापूर्ति, सीवरेज ट्रीटमेंट और सड़क-नाला निर्माण जैसे अहम कार्य तय समय सीमा पार कर चुके हैं, लेकिन उनकी प्रगति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है. स्थिति यह है कि कुछ योजनाओं का उद्घाटन होने के बाद भी वे पूरी क्षमता से चालू नहीं हो पायी हैं, जबकि कई परियोजनाएं अब तक ठेका एजेंसी के चयन के चरण में ही अटकी हुई हैं.
इसके बावजूद बुडको को लगातार नई योजनाओं की जिम्मेदारी भी सौंपी जाती रही है, जिससे कार्यों का दबाव तो बढ़ा, लेकिन जमीन पर रफ्तार नहीं दिख रही है. शहरवासियों का मानना है कि यदि इन परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाता, तो जलापूर्ति, जल निकासी और सड़क व्यवस्था में काफी सुधार संभव था, लेकिन मौजूदा हालात में लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए अब भी इंतजार करना पड़ रहा है.
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समय सीमा पार, योजनाएं अधूरी
शहर में जलापूर्ति फेज-1 और फेज-2 की योजनाएं लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं. इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी निर्धारित समय के भीतर पूरे नहीं हो सके. इन योजनाओं के अधूरे रहने का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है, क्योंकि कई इलाकों में पानी की आपूर्ति और जल निकासी की समस्या अब भी बनी हुई है. लोगों को उम्मीद थी कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से शहर की व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन देरी ने उम्मीदों पर असर डाला है.
ठेका प्रक्रिया में सुस्ती से बढ़ी समस्या
कई योजनाओं में अब तक ठेका एजेंसी का चयन नहीं हो सका है, जिससे काम शुरू ही नहीं हो पाया. जिन परियोजनाओं पर काम चल भी रहा है, वहां गति काफी धीमी बनी हुई है. इससे यह स्पष्ट है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय और गति दोनों की कमी है. प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया लंबी होने के कारण भी देरी की स्थिति बनी हुई है.
उद्घाटन के बाद भी पूरी तरह चालू नहीं एसटीपी
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन यह अब तक पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो सका है. कुल दस पंपिंग स्टेशनों में से पांच का निर्माण पूरा हुआ है, जबकि शेष का कार्य जारी है. कुछ पंपिंग स्टेशनों के पूरा होने का दावा किया गया है, लेकिन पूरे सिस्टम के चालू नहीं होने से इसका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है.
फंड की कमी से अटके कई काम
जलापूर्ति फेज-2 योजना के लिए पिछले कुछ महीनों से फंड नहीं मिलने के कारण काम प्रभावित हुआ है. इस परियोजना में अब भी बड़ी राशि की देनदारी शेष है. वहीं सिकंदरपुर से मिरजानहाट दुर्गास्थान तक सड़क और नाला निर्माण की योजना में नाला का काम पूरा हो चुका है, लेकिन फंड के अभाव में सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पाया है. इससे स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है.
1156.94 करोड़ की योजनाएं लंबित
कुल मिलाकर बुडको के पास 1156.94 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लंबित हैं. इतनी बड़ी राशि के प्रोजेक्ट अधूरे रहने से शहर के विकास की गति प्रभावित हो रही है. इन योजनाओं में जलापूर्ति, एसटीपी, सड़क-नाला निर्माण और अन्य बुनियादी कार्य शामिल हैं, जिनका सीधा संबंध आम जनता की सुविधाओं से है.
तय समय से लंबित प्रमुख योजनाएं
- एसटीपी : 413 करोड़ रुपये
- जलापूर्ति फेज-2 : 331.35 करोड़ रुपये
- जलापूर्ति फेज-1 : 299.41 करोड़ रुपये
- शवदाह गृह : 11.17 करोड़ रुपये
ठेका एजेंसी का इंतजार कर रही योजनाएं
- विस्तारित क्षेत्र जलापूर्ति (अमृत 2.0) : 62.05 करोड़ रुपये
- लोहापट्टी सड़क व नाला निर्माण : 83 लाख रुपये
- चंपानाला छठ घाट निर्माण : 89 लाख रुपये
- मोजाहिदपुर थाना के सामने पन्ना मिल रोड : 3.01 करोड़ रुपये
- शीतला स्थान चौक से बबरगंज होकर अलीगंज सड़क : 5.14 करोड़ रुपये
धीमी गति से चल रही योजनाएं
- गुड़हट्टा चौक से शीतला स्थान नाला निर्माण : 1.82 करोड़ रुपये
- सिकंदरपुर से मिरजानहाट दुर्गास्थान तक सड़क व नाला : 1.18 करोड़ रुपये
अन्य क्षेत्रों में भी फंसी परियोजनाएं
कहलगांव, पीरपैंती और सुलतानगंज जैसे क्षेत्रों में भी कई योजनाएं विभिन्न कारणों से अटकी हुई हैं. इन इलाकों में भी विकास कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय असंतोष बढ़ रहा है.
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