Share Market Today: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार की शुरुआत मुश्किल कर दी. इस बार बाजार की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ युद्ध की खबर नहीं, बल्कि उससे पैदा हुई कच्चे तेल की तेजी रही. ब्रेंट क्रूड 96.99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा तो तेल आयात पर निर्भर भारत में महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने का डर निवेशकों पर हावी हो गया.
इसी दबाव में कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट आई. सुबह करीब 9:24 बजे सेंसेक्स 760 अंक गिरकर 76,183 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 232 अंक टूटकर 23,823 पर कारोबार कर रहा था. बाद में सेंसेक्स की गिरावट 808 अंक तक पहुंची और निफ्टी 23,807 के निचले स्तर तक फिसल गया.
Share Market Today: भारत ही नहीं, ग्लोबल मार्केट में भी बिकवाली का दबाव
ईरान-अमेरिका तनाव का असर बुधवार को दुनिया के कई शेयर बाजारों में नजर आया. एशिया में कारोबार के दौरान प्रमुख इंडेक्स दबाव में रहे और निवेशकों की बिकवाली से बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई.
| प्रमुख इंडेक्स | गिरावट |
|---|---|
| जापान निक्केई | 2.90% |
| दक्षिण कोरिया कोस्पी | 3.08% |
| शंघाई कंपोजिट | 1.14% |
| हांगकांग हैंग सेंग | 1.35% |
एशियाई बाजारों की कमजोरी से पहले अमेरिकी बाजार भी दबाव में आ चुके थे. मंगलवार को डाउ जोन्स लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ. S&P 500 और नैस्डैक में भी नुकसान दर्ज किया गया. डाउ जोन्स 0.8%, S&P 500 0.71% और नैस्डैक 1% गिरकर बंद हुए.
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शेयरों में गिरावट के साथ अमेरिकी बॉन्ड बाजार का संकेत भी निवेशकों के लिए राहत वाला नहीं रहा. 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड सोमवार के 4.75% से बढ़कर 4.79% हो गई. यील्ड में यह बढ़ोतरी भी बाजार की चिंता बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रही.
तेल की कीमत बढ़ने से भारत की चिंता क्यों बढ़ी
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने का असर सीधे देश के आयात बिल और महंगाई पर पड़ सकता है. यही वजह है कि अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तेल की कीमत में उछाल को भारतीय निवेशकों ने गंभीर जोखिम के तौर पर लिया.
बुधवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 5.91 प्रतिशत चढ़कर 96.99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. एक महीने से अधिक समय बाद तेल की कीमत 96 डॉलर के ऊपर पहुंचने से बाजार में यह आशंका मजबूत हुई कि अगर तनाव लंबा चला तो ऊर्जा कीमतों का दबाव और बढ़ सकता है.
युद्ध की खबरों ने बढ़ाया दबाव
अमेरिकी सेना की ओर से ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले और उसके बाद ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट ने बाजार का जोखिम बढ़ा दिया. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के IRGC ने जॉर्डन स्थित कैंप टिटिन में अमेरिकी सैन्य बैरक पर हमले का दावा किया. ईरानी सेना ने बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर अमेरिकी बलों को निशाना बनाने की भी बात कही.
इन घटनाओं ने निवेशकों की उस चिंता को बढ़ाया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष और फैल सकता है और इसका असर तेल की आपूर्ति पर पड़ सकता है.
सेंसेक्स-निफ्टी के अहम स्तर टूटे
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 76,183 तक गिरा और एक समय इसकी गिरावट 808 अंक रही. दूसरी ओर निफ्टी 23,850 के स्तर से नीचे चला गया और 23,807 तक फिसल गया.
बाजार में बिकवाली का असर व्यापक रहा. वैश्विक बाजारों में भी तनाव और तेल की तेजी से जोखिम लेने की क्षमता कमजोर हुई. भारतीय बाजार में निवेशकों ने भी ऐसी स्थिति में सतर्क रुख अपनाया.
महंगा क्रूड कंपनियों की कमाई पर भी डालेगा असर
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं रहता. ईंधन और कच्चे माल की लागत बढ़ने से कई कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है. तेल विपणन कंपनियों के साथ टायर, पेंट और विमानन क्षेत्र भी महंगे क्रूड से प्रभावित हो सकते हैं. शुरुआती कारोबार में BPCL, HPCL, Indian Oil, MRF, JK Tyre, CEAT, Asian Paints और IndiGo के शेयरों में दबाव देखा गया.
अब बाजार के लिए असली संकेत क्या होगा
निवेशकों की नजर अब अमेरिका-ईरान तनाव के अगले घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमत पर रहेगी. अगर सैन्य टकराव बढ़ता है और ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहता है, तो भारतीय बाजार पर दबाव बना रह सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान को बातचीत की मेज पर लौटने के लिए दबाव बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. ऐसे में फिलहाल तनाव कम होने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहा है. बाजार के लिए आने वाले सत्रों में तेल की कीमत और भू-राजनीतिक घटनाक्रम सबसे अहम संकेत बन सकते हैं.
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