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भारत से आगे ये देश, जहां संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी कहीं ज्यादा; देखें पूरी लिस्ट

Women Reservation: नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होने के बाद भारत में महिलाओं को राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने का रास्ता खुल गया है. हालांकि वैश्विक स्तर पर कई देश पहले ही इस मामले में आगे हैं. ऐसे में भारत की स्थिति और तुलना एक बार फिर चर्चा में है.

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Women Reservation : देश में महिलाओं को राजनीति में मजबूत भागीदारी देने के उद्देश्य से नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू कर दिया गया है. 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता तैयार हुआ है. केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद अब इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है. हालांकि इसके पूर्ण क्रियान्वयन और समयसीमा को लेकर अभी भी बहस जारी है.

इस अधिनियम के तहत लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 815 करने का प्रस्ताव रखा गया है. इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी. इस फैसले का उद्देश्य महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देना और राजनीतिक व्यवस्था में संतुलन बनाना है. लंबे समय से महिला आरक्षण की मांग को देखते हुए इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है.

दुनिया के कई देश भारत से काफी आगे

अगर वैश्विक स्तर पर तुलना की जाए तो संसद में महिलाओं की भागीदारी के मामले में कई देश भारत से काफी आगे हैं. अंतर-संसदीय आंकड़ों के अनुसार कुछ देशों ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है और वहां महिलाओं की हिस्सेदारी बेहद मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी है.

इन देशों में न केवल महिलाओं की संख्या अधिक है, बल्कि वे नीति निर्माण और नेतृत्व में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. कई छोटे देश भी इस मामले में बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुके हैं, जो यह दिखाता है कि सही नीतियों और प्रयासों से महिलाओं को राजनीति में मजबूत स्थान दिया जा सकता है.

संसद में महिलाओं की सबसे ज्यादा भागीदारी वाले देश

नीचे कुछ ऐसे देशों की सूची दी गई है, जहां संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व भारत के मुकाबले काफी ज्यादा है:

  • रवांडा – 63.8%
  • क्यूबा – 57.2%
  • न्यूजीलैंड – 49.2%
  • डेनमार्क – 48%
  • आइसलैंड – 47.6%
  • स्वीडन – 45% से अधिक
  • नॉर्वे – 45% से अधिक
  • दक्षिण अफ्रीका – 45% से अधिक

इसके अलावा लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में भी महिलाओं का औसत प्रतिनिधित्व 35.6 प्रतिशत के आसपास है, जो वैश्विक स्तर पर काफी बेहतर माना जाता है.

भारत की स्थिति और चुनौतियां

भारत में फिलहाल महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम है. 18वीं लोकसभा में कुल 74 महिला सांसद हैं, जो कुल सदस्यों का लगभग 14 प्रतिशत ही है. यह आंकड़ा न केवल विकसित देशों से, बल्कि कई विकासशील देशों से भी कम है.

हालांकि नए कानून के लागू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले वर्षों में यह स्थिति बदलेगी. महिलाओं की संख्या बढ़ने से नीतियों में विविधता आएगी और समाज के अलग-अलग वर्गों की आवाज को बेहतर प्रतिनिधित्व मिलेगा.

आगे क्या होगा

नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होना एक बड़ी शुरुआत है, लेकिन इसका असर पूरी तरह तब दिखेगा जब इससे जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी. सीटों का पुनर्गठन और परिसीमन जैसी प्रक्रियाएं इसके लिए अहम होंगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस कानून को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. इससे महिलाओं को सिर्फ संख्या में ही नहीं, बल्कि प्रभाव और भूमिका में भी मजबूती मिलेगी.

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सोनी कुमारी
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. सरल भाषा और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पहचान मानी जाती है. डिजिटल पत्रकारिता में समाचार लेखन और कंटेंट प्रेजेंटेशन का अच्छा अनुभव है. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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