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Samrat Choudhary : बिहार में नई सरकार बनने के बाद सत्ता की असली तस्वीर विभागों के बंटवारे के साथ सामने आ गई है. 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों के शपथ लेने के बाद हुई बैठक में जिम्मेदारियों का वितरण तय किया गया. इस बंटवारे में सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास मौजूद विभागों को लेकर है, जिन्होंने 29 विभाग अपने पास रखे हैं, जबकि जेडीयू के दोनों डिप्टी सीएम को मिलाकर 18 विभाग दिए गए हैं. यही वह बिंदु है जहां से सरकार के भीतर शक्ति संतुलन और राजनीतिक संदेश दोनों साफ होते हैं.
विभागों का बंटवारा बना पावर मैसेज
नई कैबिनेट में जिम्मेदारियों का यह वितरण सिर्फ प्रशासनिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा. इसे सत्ता के अंदरूनी संतुलन और आने वाले राजनीतिक समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. मुख्यमंत्री लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं और राज्य में सख्त प्रशासनिक फैसलों की शुरुआत भी हो चुकी है. बदलते हालात में यह सवाल अहम हो गया है कि सरकार के भीतर नियंत्रण किस स्तर पर केंद्रित रहेगा. राजनीतिक नजरिए से देखें तो यह पूरी कवायद भविष्य की रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही है.
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‘योगी मॉडल’ जैसी संरचना पर चर्चा
Yogi Adityanath के नेतृत्व वाले Uttar Pradesh में पहले से केंद्रीकृत प्रशासनिक ढांचे की चर्चा होती रही है, जहां मुख्यमंत्री के पास 30 से अधिक विभाग हैं. इसमें गृह और प्रशासन जैसे अहम विभाग शामिल हैं, जो कानून-व्यवस्था और अफसरशाही पर सीधा नियंत्रण दर्शाते हैं. बिहार में भी कुछ वैसी ही झलक देखने को मिल रही है, जहां प्रमुख विभागों का बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री के पास केंद्रित है.
गठबंधन सरकार में अलग परिस्थिति
हालांकि उत्तर प्रदेश की तुलना में बिहार का राजनीतिक ढांचा अलग है, क्योंकि यहां गठबंधन सरकार काम कर रही है. इसके बावजूद मुख्यमंत्री के पास गृह, सामान्य प्रशासन, कैबिनेट सचिवालय, विजिलेंस, निर्वाचन और कानून-व्यवस्था से जुड़े अहम विभाग मौजूद हैं. पहले भी डिप्टी सीएम रहते हुए उनके पास गृह विभाग था, और अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके अधिकार क्षेत्र का दायरा और बढ़ गया है. फिलहाल उनके पास कुल 29 विभाग हैं, जिनमें आगे कुछ बदलाव चुनावी परिणामों के बाद संभव माने जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री के पास मौजूद प्रमुख विभाग
इन विभागों के जरिए शासन के बड़े हिस्से पर सीधा नियंत्रण स्थापित होता है. उनके पास शामिल प्रमुख विभाग इस प्रकार हैं:
- राजस्व एवं भूमि सुधार
- खान एवं भू-तत्व
- नगर विकास एवं आवास
- स्वास्थ्य
- उद्योग
- पथ निर्माण
- कृषि
- लघु जल संसाधन
- श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण
- युवा, रोजगार एवं कौशल विकास
- पर्यटन
- कला एवं संस्कृति
- डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन
- आपदा प्रबंधन
- पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण
- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण
- सूचना प्रावैधिकी
- खेल
- सहकारिता
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन
- गन्ना उद्योग
- लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण
- पंचायती राज विभाग
डिप्टी सीएम को दी गई ‘डिलीवरी’ की जिम्मेदारी
उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Choudhary को ऐसे विभाग दिए गए हैं, जो सीधे विकास कार्यों और सेवा वितरण से जुड़े हैं. उनके जिम्मे कुल 10 विभाग हैं:
- जल संसाधन
- संसदीय कार्य
- सूचना एवं जन-सम्पर्क
- भवन निर्माण
- अल्पसंख्यक कल्याण
- शिक्षा
- विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- उच्च शिक्षा
दूसरे डिप्टी सीएम के पास वित्त और कल्याण
दूसरे उपमुख्यमंत्री Birendra Prasad Yadav को आर्थिक और सामाजिक कल्याण से जुड़े विभाग सौंपे गए हैं. उनके पास ये 8 विभाग हैं:
- ऊर्जा
- योजना एवं विकास
- मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन
- वित्त
- वाणिज्य-कर
- समाज कल्याण
- खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण
- ग्रामीण कार्य
‘सिंगल कमांड’ सिस्टम की ओर इशारा
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह पूरा ढांचा एक केंद्रीकृत नियंत्रण प्रणाली की ओर संकेत करता है, जहां निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सकती है. इस मॉडल में अफसरों की जवाबदेही सीधे शीर्ष स्तर पर तय होती है और कामकाज की निगरानी भी एक केंद्र से संचालित होती है. यह भी माना जा रहा है कि इसमें टीम को काम करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन नियंत्रण का केंद्र मुख्यमंत्री ही बने हुए हैं.
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