mobile security : मोबाइल नंबर बदलना कई लोगों के लिए सामान्य बात है, लेकिन इसके साथ जुड़ा एक ऐसा जोखिम भी है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. बहुत से लोग नया नंबर लेने के बाद अपने पुराने नंबर को बैंकिंग, सोशल मीडिया, ईमेल और अन्य ऑनलाइन सेवाओं से हटाना भूल जाते हैं. यही छोटी सी चूक आगे चलकर बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है.
बंद हुआ नंबर किसी और के नाम हो सकता है जारी
टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय तक निष्क्रिय पड़े मोबाइल नंबरों को दोबारा बाजार में जारी कर देती हैं. यानी जिस नंबर का आप पहले इस्तेमाल करते थे, वह कुछ समय बाद किसी दूसरे ग्राहक के पास पहुंच सकता है. अगर आपके डिजिटल अकाउंट अभी भी उसी नंबर से जुड़े हैं, तो आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है.
पुराने नंबर से मिल सकते हैं सुरक्षा संदेश
कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लॉगिन, पासवर्ड बदलने या पहचान सत्यापित करने के लिए मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजते हैं. यदि आपका पुराना नंबर किसी अन्य व्यक्ति को मिल चुका है, तो ऐसे संदेश उसके मोबाइल पर पहुंच सकते हैं. इससे आपके अकाउंट की सुरक्षा कमजोर हो सकती है और अनधिकृत पहुंच का जोखिम बढ़ सकता है.
2FA सुरक्षा भी नहीं रह जाती पूरी तरह प्रभावी
अधिकांश लोग अतिरिक्त सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन यदि यह सुविधा पुराने मोबाइल नंबर से जुड़ी है, तो सुरक्षा की यह परत भी कमजोर पड़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एसएमएस आधारित सत्यापन पर निर्भर रहना अब पहले जितना सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता.
साइबर अपराधियों के लिए बन सकता है आसान रास्ता
दुनिया भर में हर साल बड़ी संख्या में मोबाइल नंबर दोबारा जारी किए जाते हैं. ऐसे में पुराने नंबर से जुड़े ईमेल, बैंकिंग या सोशल मीडिया अकाउंट साइबर अपराधियों के निशाने पर आ सकते हैं. यदि किसी को आपके पुराने नंबर तक पहुंच मिल जाती है, तो वह पासवर्ड रीसेट जैसी प्रक्रियाओं का फायदा उठाने की कोशिश कर सकता है.
नया नंबर लेने के बाद क्या करें?
मोबाइल नंबर बदलते ही सभी महत्वपूर्ण सेवाओं की जानकारी अपडेट करना जरूरी है. इनमें शामिल हैं:
- बैंक खाते और मोबाइल बैंकिंग ऐप
- यूपीआई और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म
- ईमेल अकाउंट
- व्हाट्सऐप
- फेसबुक
- इंस्टाग्राम
- अन्य सोशल मीडिया और ऑनलाइन सेवाएं
सिर्फ नया नंबर जोड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि पुराने नंबर को पूरी तरह हटाना भी आवश्यक है.
सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपनाएं बेहतर विकल्प
विशेषज्ञ एसएमएस आधारित ओटीपी के बजाय ऑथेंटिकेटर ऐप्स का उपयोग करने की सलाह देते हैं. ये ऐप मोबाइल नंबर पर निर्भर नहीं रहते और डिवाइस के भीतर ही सुरक्षा कोड तैयार करते हैं. इसके साथ ही अकाउंट रिकवरी सेटिंग्स की भी समय-समय पर जांच करनी चाहिए ताकि कहीं पुराना नंबर बैकअप संपर्क के रूप में दर्ज न रह जाए.
अभी क्यों जरूरी है जांच?
मोबाइल नंबरों का पुनः आवंटन दूरसंचार कंपनियों की नियमित प्रक्रिया है. ऐसे में उपयोगकर्ताओं को खुद यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका कोई पुराना नंबर महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़ा न हो. थोड़ी सी सावधानी आपकी बैंकिंग जानकारी, निजी डेटा और सोशल मीडिया अकाउंट को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.
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