Jamui Case : जमुई कांड की पीड़ित बच्ची के परिवार से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक तस्वीर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री के आधिकारिक X हैंडल से परिवार के साथ तस्वीर पोस्ट की गई थी, जिसमें पीड़ित बच्ची की तस्वीर बिना ब्लर के दिखाई दी. करीब 15 मिनट बाद पोस्ट हटा दी गई.
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने का सवाल उठाया, जबकि राजद सांसद मीसा भारती मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR की मांग लेकर सचिवालय थाने पहुंचीं. हालांकि, थाने में उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की गई.
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#WATCH | Patna, Bihar | RJD MP Misa Bharti says, "… Patna's posh area, Secretariat police station, a female member of Parliament has been sitting here for five hours asking to register our FIR, but all the officers sitting inside aren't budging an inch. We keep saying that the… https://t.co/FA3kFbb47P pic.twitter.com/J56kTURO72
— ANI (@ANI) September 25, 2026
Jamui Case : परिवार ने CM से मुलाकात कर बताई स्थिति
पीड़ित बच्ची का परिवार 24 सितंबर की शाम पटना पहुंचा था. परिवार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर जमुई की घटना के बाद की स्थिति पर बात की.
पीड़ित की मां के अनुसार, मुख्यमंत्री ने परिवार को भरोसा दिया कि उनकी बेटी को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बेटी को अपनी बेटी की तरह समझते हुए उसकी सुरक्षा और आगे की पढ़ाई में मदद का भरोसा दिया.
परिवार की ओर से कहा गया कि घटना का दर्द अभी भी है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई और सरकार से मिले आश्वासन के बाद उन्हें कुछ राहत महसूस हुई.
मुलाकात की तस्वीर हटने के बाद बढ़ा विवाद
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उनके आधिकारिक X अकाउंट से परिवार के साथ तस्वीर पोस्ट की गई. पोस्ट में पीड़ित बच्ची और उसके परिवार से मुलाकात, जल्द न्याय और दोषियों के खिलाफ एक महीने में स्पीडी ट्रायल के जरिए कड़ी सजा सुनिश्चित करने की बात कही गई थी.
विवाद तस्वीर को लेकर शुरू हुआ. पोस्ट में पीड़ित बच्ची की तस्वीर बिना ब्लर के दिखाई दी. करीब 15 मिनट बाद पोस्ट को हटा दिया गया.
तेजस्वी ने उठाया नाबालिग की पहचान का मुद्दा
तस्वीर सामने आने के बाद तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्ट से नाबालिग पीड़िता की पहचान सामने आने का खतरा पैदा हुआ और इसे POCSO के तहत गंभीर मामला बताया.
तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री की पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया और कार्रवाई की मांग की. इस पूरे विवाद में मुख्य सवाल पीड़िता की पहचान से जुड़ा है और यह कि ऐसे मामले में कानून के प्रावधान किस तरह लागू होते हैं.
मीसा भारती ने POCSO की धाराओं के तहत FIR मांगी
तेजस्वी यादव के बाद राजद सांसद मीसा भारती सचिवालय थाने पहुंचीं. उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की.
मीसा भारती की ओर से POCSO एक्ट की धारा 23 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 74 के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई.
उन्होंने कहा कि जब जमुई कांड से जुड़े वीडियो को शेयर करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है, तो पीड़िता की पहचान से जुड़ी तस्वीर पोस्ट करने के मामले में भी कार्रवाई होनी चाहिए.
सचिवालय थाने में FIR दर्ज नहीं हुई
मीसा भारती ने बताया कि सचिवालय थाने के थानाध्यक्ष ने उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की. उन्होंने मुख्यमंत्री के गृह विभाग संभालने का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि अगर कानून सभी के लिए समान है तो इस मामले में भी कार्रवाई होनी चाहिए.
जमुई कांड में पहले भी पहचान को लेकर हुई कार्रवाई
जमुई में 19 सितंबर को कोचिंग से लौट रहे एक नाबालिग लड़के और लड़की को रास्ते में रोककर उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की गई थी. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी.
पीड़िता की पहचान वाले वीडियो को शेयर करने के मामले में भी पुलिस ने कार्रवाई की है. पुलिस ने ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स को नोटिस भेजने और पहचान उजागर करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी.
अब मुख्यमंत्री के आधिकारिक X अकाउंट से पोस्ट की गई तस्वीर को लेकर विपक्ष FIR की मांग कर रहा है. इस तरह जमुई कांड में पीड़िता की पहचान से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है.
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