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Success Story : 18 रुपये की नौकरी से 180 करोड़ के कारोबार तक, ऐसे खड़ी की जयराम बानन ने ‘सागर रत्न’ की बादशाहत

Sagar Ratna Success Story : जयराम बानन ने कभी महज 18 रुपये महीने की नौकरी से अपने करियर की शुरुआत की थी. बर्तन धोने से लेकर रेस्टोरेंट चलाने तक के अनुभव ने उन्हें अपना कारोबार खड़ा करने का रास्ता दिखाया. आज सागर रत्न एक जाना-पहचाना शाकाहारी रेस्टोरेंट ब्रांड है, जिसका वित्त वर्ष 2024-25 में राजस्व 179.65 करोड़ रुपये रहा.

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Sagar Ratna Success Story : जयराम बानन ने कभी महज 18 रुपये महीने की नौकरी से अपने करियर की शुरुआत की थी. बर्तन धोने से लेकर रेस्टोरेंट चलाने तक के अनुभव ने उन्हें अपना कारोबार खड़ा करने का रास्ता दिखाया. आज सागर रत्न एक जाना-पहचाना शाकाहारी रेस्टोरेंट ब्रांड है, जिसका वित्त वर्ष 2024-25 में राजस्व 179.65 करोड़ रुपये रहा.

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Sagar Ratna Success Story : कभी कैंटीन में बर्तन धोकर महीने के 18 रुपये कमाने वाले जयराम बानन आज दक्षिण भारतीय व्यंजनों के मशहूर ब्रांड ‘सागर रत्न’ के पीछे की प्रमुख शख्सियत हैं. कर्नाटक के उडुपी जिले से निकले बानन ने सीमित संसाधनों के बीच काम शुरू किया और अपने अनुभव को कारोबार की ताकत बनाया. उनकी सफलता का सफर मुंबई की एक कैंटीन से शुरू होकर दिल्ली के रेस्टोरेंट बाजार तक पहुंचा. आज वित्त वर्ष 2024-25 में सागर रत्न का राजस्व करीब 179.65 करोड़ रुपये रहा. यह कहानी केवल एक रेस्टोरेंट खोलने की नहीं, बल्कि छोटे काम से शुरुआत कर अपने दम पर बड़ा कारोबार खड़ा करने की है.

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Sagar Ratna Success Story : बर्तन धोने से मैनेजर बनने तक का सफर

जयराम बानन का शुरुआती जीवन आसान नहीं था. परीक्षा में असफल होने के बाद उन्होंने घर छोड़ दिया और मुंबई पहुंच गये. वहां पनवेल स्थित हिंदुस्तान ऑर्गेनिक केमिकल्स की कैंटीन में उन्हें बर्तन धोने का काम मिला. इसके बदले हर महीने केवल 18 रुपये मिलते थे.

बानन ने इस काम को अपनी मंजिल नहीं माना. अगले आठ वर्षों में उन्होंने वेटर, हेड वेटर और मैनेजर तक का सफर तय किया. इस दौरान उनका मासिक वेतन बढ़कर करीब 200 रुपये हो गया. कैंटीन में काम करते हुए उन्होंने भोजन तैयार करने की व्यवस्था, सामान की खरीद, ग्राहकों की जरूरत और कर्मचारियों को संभालने का अनुभव हासिल किया. आगे चलकर यही अनुभव उनके कारोबार के काम आया.

Success Story : 18 रुपये की नौकरी से 180 करोड़ के कारोबार तक, ऐसे खड़ी की जयराम बानन ने 'सागर रत्न' की बादशाहत Sagar Ratna Restaurant
Sagar Ratna Restaurant

2,000 रुपये से भी कम निवेश में संभाली कैंटीन

वर्ष 1973 में जयराम बानन दिल्ली आ गये. यहां उन्होंने गाजियाबाद स्थित सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की कैंटीन का जिम्मा संभाला. इस काम में उन्होंने 2,000 रुपये से भी कम का निवेश किया और तीन रसोइयों के साथ शुरुआत की.

कैंटीन संचालन के अनुभव ने उन्हें अपना रेस्टोरेंट खोलने का आत्मविश्वास दिया. कई वर्षों की मेहनत और बचत के बाद उन्होंने वर्ष 1986 में दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी मार्केट में 40 सीटों वाला ‘सागर’ रेस्टोरेंट शुरू किया. यहां इडली, डोसा और सांभर जैसे दक्षिण भारतीय व्यंजन परोसे जाते थे.

पहले दिन 408 रुपये की बिक्री, फिर बढ़ने लगी मांग

रेस्टोरेंट खुलने के पहले दिन कुल बिक्री 408 रुपये रही. शुरुआती दौर में किराये और दूसरे खर्चों के कारण कारोबार चलाना चुनौतीपूर्ण था. ग्राहकों को आकर्षित करने और रेस्टोरेंट को आगे बढ़ाने के लिए बानन खुद सुबह सात बजे से आधी रात तक काम करते थे.

धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी. मांग बढ़ने पर रेस्टोरेंट की ऊपरी मंजिल पर भी बैठने की व्यवस्था करनी पड़ी. इसके बावजूद ग्राहकों की कतारें लगने लगीं. छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह कारोबार आगे चलकर बड़े ब्रांड की नींव बना.

‘सागर’ से ‘सागर रत्न’ तक कैसे पहुंचा कारोबार

दिल्ली में कारोबार को मिली सफलता के बाद बानन ने विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाया. वर्ष 1991 में उन्होंने ‘वुडलैंड्स’ का अधिग्रहण किया. इसके बाद वर्ष 1999 में लुधियाना में ‘सागर रत्न’ का पहला फ्रेंचाइजी आउटलेट खुला. इससे उत्तर भारत में ब्रांड के विस्तार को गति मिली.

कारोबार के आगे बढ़ने के साथ इसमें निवेशकों की भी रुचि बढ़ी. वर्ष 2011 में इंडिया इक्विटी पार्टनर्स ने कंपनी में बहुसंख्यक हिस्सेदारी खरीदी. बाद में बानन ने निवेशकों की हिस्सेदारी वापस खरीद ली और वर्ष 2017 में ब्रांड का पूरा नियंत्रण फिर अपने हाथों में ले लिया.

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सागर रत्न ने अपनी पहचान मुख्य रूप से शाकाहारी दक्षिण भारतीय व्यंजनों और पारंपरिक रेसिपी के आधार पर बनाई. समय के साथ इसका कारोबार भारत से बाहर के बाजारों तक भी पहुंचा.

179.65 करोड़ रुपये रहा वित्त वर्ष 2024-25 का राजस्व

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, सागर रत्न का वित्त वर्ष 2024-25 में कुल राजस्व करीब 179.65 करोड़ रुपये रहा. इसी अवधि में कंपनी का कर पश्चात लाभ यानी पीएटी 12.26 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.

महीने के 18 रुपये से शुरू हुआ जयराम बानन का सफर आज करोड़ों रुपये के कारोबार तक पहुंच चुका है. उनकी कहानी में कैंटीन का अनुभव, लंबे समय तक लगातार काम करना और छोटे स्तर से कारोबार शुरू करना अहम पड़ाव रहे हैं.

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Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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