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ठेले-खोमचे वालों से भी वसूला जाएगा UPI चार्ज? जानिए ₹1 लाख वाला असली नियम

UPI MDR Charges : 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होने जा रहा है. हालांकि हर छोटे दुकानदार पर यह चार्ज नहीं लगेगा और आम ग्राहक के लिए UPI ट्रांसफर मुफ्त रहेगा. जानिए ₹1 लाख की सीमा और तीन महीने वाली शर्त कैसे तय करेगी कि किस मर्चेंट पर MDR लागू होगा.

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UPI MDR Charges : 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होने जा रहा है. हालांकि हर छोटे दुकानदार पर यह चार्ज नहीं लगेगा और आम ग्राहक के लिए UPI ट्रांसफर मुफ्त रहेगा. जानिए ₹1 लाख की सीमा और तीन महीने वाली शर्त कैसे तय करेगी कि किस मर्चेंट पर MDR लागू होगा.

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UPI MDR Charges: 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने जा रहा है. इस फैसले के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या अब चाय, सब्जी, ठेले और रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों को भी हर बड़े UPI पेमेंट पर चार्ज देना पड़ेगा. हालांकि पूरा मामला सिर्फ ₹2,000 की सीमा तक सीमित नहीं है. छोटे दुकानदारों के लिए असली पेंच उनके मासिक UPI कारोबार और लगातार तीन महीने तक ₹1 लाख की सीमा पार करने से जुड़ा है.

वहीं आम ग्राहक के लिए राहत की बात यह है कि UPI से दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने, बिल बांटने या अपने दूसरे खाते में पैसा ट्रांसफर करने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा.

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UPI MDR Charges : छोटे दुकानदारों को कब मिलेगी राहत?

नियम के मुताबिक जिन दुकानदारों के पास GST नंबर नहीं है और जिनके QR कोड पर महीने में ₹1 लाख तक का UPI पेमेंट आता है, उन्हें Person-to-Person Merchant (P2M) कैटेगरी में रखा जाएगा. ऐसे व्यापारियों पर कोई MDR नहीं लगेगा.

इसका सीधा मतलब है कि छोटे चाय दुकानदार, सब्जी विक्रेता, ठेले और रेहड़ी-पटरी वाले, अगर तय सीमा के भीतर हैं, तो उन्हें UPI पेमेंट लेने पर MDR की चिंता नहीं करनी होगी.

लेकिन ₹1 लाख से ऊपर पहुंचा तो क्या होगा?

यहीं से नियम का दूसरा हिस्सा शुरू होता है. बाजार की रिपोर्ट के मुताबिक चाय-पान, रेहड़ी-पटरी और छोटे किराना दुकानदारों का औसत मासिक UPI लेन-देन ₹1 लाख से ₹3.5 लाख तक पहुंच जाता है.

यदि कोई छोटा व्यापारी लगातार 3 महीने तक ₹1 लाख से ज्यादा का UPI लेन-देन करता है, तो उसे ‘बड़ा मर्चेंट’ माना जाएगा. ऐसी स्थिति में ₹2,000 से बड़े ट्रांजैक्शन पर उससे MDR वसूला जा सकता है.

यानी किसी दुकानदार के लिए सिर्फ यह देखना जरूरी नहीं होगा कि एक ग्राहक ने कितने रुपये का UPI पेमेंट किया. उसकी मर्चेंट कैटेगरी और मासिक डिजिटल लेन-देन भी अहम भूमिका निभाएगा.

₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर कितना MDR लगेगा?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो मर्चेंट और उसके बैंक के बीच का चार्ज होता है. नए नियम के तहत ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लगेगा.

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₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर सामान्य MDR दरें लागू होंगी. हालांकि यह चार्ज आम ग्राहक के UPI ट्रांसफर पर नहीं लगाया जाएगा.

ट्रांजैक्शन की रकमलागू MDR शुल्क
₹2,000 तकशून्य (0%)
₹2,000 से अधिक (सामान्य मर्चेंट)0.4% (अधिकतम ₹300)
पेट्रोल, बिजली-पानी, रेलवे, इंश्योरेंस₹5 (फिक्स्ड)
कैपिटल मार्केट (म्यूचुअल फंड, शेयर)0.02% (अधिकतम ₹300)

ग्राहकों की जेब पर नहीं पड़ेगा सीधा असर

UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि UPI पूरी तरह मुफ्त रहेगा.

  • P2P ट्रांसफर: दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने, बिल स्प्लिट करने या खुद के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने पर शून्य चार्ज लगेगा.
  • ऐप शुल्क पर रोक: कोई भी UPI ऐप, जैसे PhonePe या Google Pay, ग्राहकों से कोई प्लेटफॉर्म फीस नहीं ले सकता.
  • रोजमर्रा के पेमेंट: ₹2,000 तक की खरीदारी पर ग्राहक या दुकानदार किसी को कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना है.

NPCI ने यह फैसला क्यों लिया?

UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. अगस्त में रिकॉर्ड 24.51 बिलियन ट्रांजैक्शन के जरिए ₹29.82 ट्रिलियन का लेन-देन हुआ.

NPCI का मकसद छोटे लेन-देन को पूरी तरह फ्री रखना है, जबकि बड़े मर्चेंट पेमेंट्स से मिलने वाले MDR के जरिए पेमेंट सिस्टम के बुनियादी ढांचे को टिकाऊ बनाना है.

इसलिए नए नियम का असर सीधे हर UPI यूजर पर नहीं पड़ेगा. खासतौर पर छोटे दुकानदारों के मामले में ₹1 लाख की मासिक सीमा और लगातार तीन महीने की शर्त अहम होगी.

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Soni
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार हैं और Hellocities24 में ऑथर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार समेत देशभर की ताजा खबरों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर लेखन करती हैं. पाठकों तक तेज और भरोसेमंद खबरें पहुंचाना प्रमुख उद्देश्य है.
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